Chandra Grahan 2025: मानव शरीर और ब्रह्मांड, चंद्रग्रहण का गहरा संबंध
Published by : Shaurya Punj Updated At : 07 Sep 2025 8:09 AM
मानव शरीर का चंद्रग्रहण से संबंध
Chandra Grahan 2025: भारतीय दर्शन में मानव शरीर को ब्रह्मांड का अंश माना गया है. ‘यत् पिंडे तत् ब्रह्माण्डे’ की परिभाषा इस रहस्य को उजागर करती है. सूर्य-विवेक और चंद्रमा-मन की प्रवृत्तियां जीवन को प्रभावित करती हैंयजानें चंद्रग्रहण का मानव जीवन और ब्रह्मांड से गहरा आध्यात्मिक व खगोलीय संबंध.
सलिल पांडेय, मिर्जापुर
Chandra Grahan 2025: मानव शरीर ब्रह्मांड का अंश है. विद्वानों ने इसको परिभाषित करते हुए ‘यत् पिंडे तत् ब्रह्माण्डे’ वाक्य का प्रयोग किया है. इसका अर्थ है कि ब्रह्मांड में जितने जीव-जंतु और पदार्थ हैं, वह सभी मानव पिंड में विद्यमान है. खगोल शास्त्र के अनुसार सूर्य, चन्द्रमा, तारे आकाशीय पिंड हैं. पृथ्वी भी ब्रह्मांड का पिंड है. इतना ही नहीं ब्रह्मांड में विविध प्रकार के जीव-जंतु हैं. सबका अंश कहीं न मनुष्य तन से जुड़ा है. इसे मनुष्य तन में स्थित मन की प्रवृत्तियों से समझा जा सकता है. धरती पर जानवर भी हैं. यदि मनुष्य का मन हिंसक प्रवृति का हो जाता है तब उसकी तुलना जानवर से होने लगती है ओर यदि वह उच्च स्तर का का आचरण करता है तब उसे देवता कहा जाता है. भारतीय मनीषियों ने अंतरिक्ष में स्थित ग्रहों को ईश्वर मानकर उसकी पूजा भी की जाती है. इसमें सर्वाधिक महत्व सूर्य और चन्द्रमा को दिया गया है. भारतीय पंचांग में काल का विभाजन सौर वर्ष और चन्द्र वर्ष के रूप में किया है. सूर्य एक माह में राशि परिवर्तन तो चन्द्रमा को ढाई दिन में राशि परिवर्तन करता है. इसी के चलते लगभग तीन वर्षों में पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) की अवधि निर्धारित है.
ब्रह्मांडीय ग्रहण और मानव जीवन का प्रतीकात्मक अर्थ
इस प्रकार ब्रह्मांड की गतिविधियों की तरह मनुष्य की भी गतिविधियां हैं. अंतरिक्ष में दो तरह के ग्रहण लगते हैं. गतिमान ब्रह्मांड में चन्द्र ग्रहण उस वक्त लगता है जब चन्द्रमा और सूर्य के बीच पृथ्वी आ जाती है और सूर्यग्रहण के दौरान चन्द्रमा और पृथ्वी के बीच सूर्य आ जाता है.
अब से कुछ ही घंटों में लगेगा साल का अंतिम चंद्रग्रहण
आज 7 सितंबर 2025 की रात को यह खगोलीय घटना घटित होगी, जो लगभग साढ़े तीन घंटे तक जारी रहेगी.
Chandra Grahan 2025: गृहस्थों के लिए ग्रहण काल में उपवास का नियम
विवेक और प्रवृत्तियों का संतुलन : जीवन में ग्रहण से मुक्ति का मार्ग
इस दृष्टि से मानव के जीवन पर गहराई से दृष्टि डाली जाए तो मानव शरीर धरती की तरह है. इस शरीर में जल भी है तो थल और वन भी है. विविध श्लोकों में ‘जले-थले और वने-रणे निवासिनीं भजामि विन्ध्यवासिनीं’ के जरिए मातृशक्ति की आराधना की गई है. अंतरिक्ष के ग्रहों को मनुष्य के शरीर में देखा जाए तो मनुष्य का विवेक सूर्य है और उसकी प्रवृत्तियां चन्द्रमा हैं. विवेक ऐसा सूर्य है जिसके उदित रहने पर व्यक्ति का प्रकाश चतुर्दिक फैलता है. जबकि मन की प्रवृत्तियां उज्ज्वल स्वरुप की होती हैं तो चन्द्रमा के शुक्ल पक्ष और नकारात्मक होती हैं तो कृष्ण पक्ष की तरह अंधकारमय जीवन की ओर ले जाती है. शरीर को ही महत्व देने पर विवेक का सूर्य गौण होने लगता है.ऐसी स्थिति में जीवन में सूर्यग्रहण की नौबत आ जाती है. क्योंकि मन की प्रवृत्तियाँ भारी हो जाती हैं जिसके चलते विवेक का सूर्य महत्वहीन हो जाता है. इसी तरह विवेक जागृत होने पर मन की कामनाएं महत्वहीन होने लगती हैं. इसलिए मनुष्य को चाहिए कि वह जीवन में सन्तुलन बनाने के लिए विवेक के सूर्य और मन की प्रवृत्तियों में सन्तुलन बनाए रखे ताकि ग्रहण में पड़ने वाले दुष्प्रभावों से शरीर रूपी पृथ्वी पर विपरीत असर न पड़ने पाए.
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लेखक के बारे में
By Shaurya Punj
शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.
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