चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन ऐसे करें मां कुष्मांडा की पूजा, जानें मंत्र, प्रिय भोग, फूल, रंग, स्वरूप और महत्व
Published by : Neha Kumari Updated At : 22 Mar 2026 8:10 AM
मां कुष्मांडा (एआई द्वारा निर्मित तस्वीर)
Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के कुष्मांडा स्वरूप की आराधना का विधान है. मान्यता है कि माता की विधि-पूर्वक पूजा करने से रोग और दुखों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है.
Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व चल रहा है और आज, यानी 22 मार्च 2026 को नवरात्रि का चौथा दिन है. यह दिन आदिशक्ति के चतुर्थ स्वरूप मां कुष्मांडा को समर्पित है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था और चारों ओर अंधकार व्याप्त था, तब देवी ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी.
मां कुष्मांडा का दिव्य स्वरूप
मां कुष्मांडा को अष्टभुजा देवी के नाम से भी जाना जाता है. उनकी आठ भुजाओं में कमंडल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृत से भरा कलश, चक्र, गदा और सभी सिद्धियों व निधियों को प्रदान करने वाली जपमाला सुशोभित है. मां सिंह पर सवार हैं, जो शौर्य का प्रतीक है. इनका निवास सूर्यमंडल के भीतर माना जाता है, इसलिए इनके शरीर की कांति और प्रभा सूर्य के समान ही दैदीप्यमान है.
पूजन विधि
पूजा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और नारंगी रंग के वस्त्र पहनें. इसके बाद सबसे पहले कलश और उसमें स्थापित देवताओं की पूजा करें. फिर मां कुष्मांडा का ध्यान करते हुए उन्हें धूप, दीप, भोग और फल अर्पित करें. इस दिन मां को साबुत कुष्मांड (सफेद कद्दू/पेठा) का भोग अर्पित करना विशेष फलदायी होता है. इसके बाद माता के मंत्रों का जाप करें, दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और फिर चालीसा का पाठ करें. अंत में मां की आरती गाएं और कपूर जलाकर आरती करें.
मां कुष्मांडा के मंत्र
1. मूल मंत्र:
ॐ देवी कुष्माण्डायै नमः
2. बीज मंत्र:
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कूष्माण्डायै नमः
3. स्तुति मंत्र:
सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च.
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥
4. ध्यान मंत्र:
वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्घकृतशेखराम्.
सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्मांडा यशस्विनीम्॥
शुभ रंग
आज के दिन नारंगी रंग के वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ माना जाता है. यह रंग ऊर्जा और नई उमंग का प्रतीक है.
प्रिय पुष्प
मां को पीले रंग के फूल या लाल गुलाब बहुत प्रिय हैं. मान्यता है कि पूजा में इन्हें अर्पित करने से मां प्रसन्न होती हैं.
भोग
देवी कुष्मांडा को मालपुआ का भोग लगाना सर्वोत्तम माना जाता है. इस दिन आप भोग में हरी इलायची या कद्दू (पेठा) की मिठाई भी शामिल कर सकते हैं.
पूजा का महत्व
मां कुष्मांडा की भक्ति से आयु, यश, बल और आरोग्य की वृद्धि होती है. मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से इस दिन साधना करते हैं, उनके समस्त रोग और शोक नष्ट हो जाते हैं. कुंडली में सूर्य ग्रह को मजबूत करने के लिए भी मां कुष्मांडा की पूजा अचूक मानी जाती है.
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By Neha Kumari
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