चैत्र नवरात्रि 2026: गलती से बुझ जाए अखंड ज्योति तो क्या करें?

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Chaitra Navratri 2026: अगर आपके घर में प्रज्वलित नवरात्रि की अखंड ज्योति किसी भी कारण से बुझ गई है और आप इसे अशुभ संकेत समझ रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए है. आइए जानते हैं ज्योतिषिक दृष्टि से ऐसी स्थिति में भक्त को क्या करना चाहिए.

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Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि में माता आदि शक्ति के नौ स्वरूपों का ध्यान करते हुए अखंड ज्योति जलाने का विधान है. भक्त अटूट आस्था के साथ लगातार नौ दिनों तक इस दीपक को जलाकर रखते हैं. मान्यता है कि इससे नवदुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है, घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और वातावरण शुद्ध होता है. हालांकि, कई बार हवा के झोंके, घी की कमी या बाती की खराबी के कारण ज्योति बुझ जाती है. ऐसे में मन में भय और अशुभ शंका उत्पन्न होने लगती है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, दीपक का गलती से बुझ जाना डरने की बात नहीं है. यह एक सामान्य भौतिक घटना है और इससे आपकी भक्ति या पूजा पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता. लेकिन यदि आपके मन में शंका हो, तो ऐसी स्थिति में आप ये उपाय कर सकते हैं:

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मन से डर निकालें और क्षमा मांगें

ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा जी के अनुसार, सबसे पहले अपने मन को शांत रखें. माता रानी भाव देखती हैं, न कि केवल कर्मकांड. यदि ज्योति अनजाने में बुझ गई है, तो मां दुर्गा के समक्ष हाथ जोड़कर अपनी भूल के लिए क्षमा मांगें. आप ‘ॐ दुं दुर्गायै नमः’ या क्षमा प्रार्थना मंत्र का जाप कर सकते हैं.

दीप पात्र की सफाई

बुझी हुई ज्योति के दीप पात्र को सावधानी से साफ करें. यदि बाती पूरी जल चुकी है, तो उसे हटा दें. पात्र में नया घी या तिल का तेल डालें और नई लंबी बाती लगाएं.

‘साक्षी दीपक’ की मदद लें

अखंड ज्योति के साथ अक्सर एक छोटा ‘साक्षी दीपक’ भी जलाया जाता है. यदि वह जल रहा है, तो उसी की लौ से अखंड ज्योति को पुनः प्रज्वलित करें. यदि वह भी बुझ गया है, तो नया दीपक जलाकर संकल्प दोहराएं.

गंगाजल का छिड़काव

ज्योति को पुनः जलाने के बाद पूरे पूजा स्थल और दीपक के चारों ओर थोड़ा गंगाजल छिड़कें. यह शुद्धिकरण का प्रतीक है. माना जाता है कि इससे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा फैलती है.

अखंड ज्योति दोबारा प्रज्वलित करने का मंत्र

दीपक जलाते समय इस मंत्र का उच्चारण करना शुभ माना जाता है:
“दीपज्योतिः परब्रह्मः दीपज्योति जनार्दनः.
दीपो हरतु मे पापं संध्यादीपं नमोऽस्तुते॥”

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