भाद्रपद पूर्णिमा पर आज बन रहे हैं 5 दुर्लभ संयोग, जानें पूजा विधि-शुभ मुहूर्त और इस दिन का महत्व
Published by : Radheshyam Kushwaha Updated At : 29 Sep 2023 7:37 AM
Bhadrapada Purnima 2023: हिंदू धर्म में भाद्रपद मास की पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है. इसी दिन से पितृपक्ष की शुरुआत होती है. इसके साथ ही इस दिन स्नान-दान करना बहुत पुण्यदायी होता है. पूर्णिमा तिथि में भगवान सत्यनारायण की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति को शुभ फलों की प्राप्ति होती है.
Bhadrapada Purnima 2023: आज भाद्रपद मास की पूर्णिमा है. हिंदू धर्म में भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि का अधिक महत्व है. क्योंकि भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि से ही श्राद्ध पक्ष आरंभ हो जाता है. इसलिए भाद्रपद मास की पूर्णिमा और भी ज्यादा महत्वपूर्ण रहती है. आज 29 सितंबर दिन शुक्रवार को भाद्रपद यानि भादो पूर्णिमा है. इसके साथ ही इस दिन कई शुभ संयोग बन रहे हैं. इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना करने से सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है. आइए जानते है ज्योतिषाचार्य वेद प्रकाश शास्त्री से भाद्रपद पूर्णिमा से जुड़ी पूरी जानकारी…
पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा के साथ-साथ भगवान शिव की भी पूजा आराधना करनी चाहिए. धार्मिक मान्यता है कि पूर्णिमा के दिन भगवान शिव की पूजा करते है तो सभी कष्टों का निवारण हो जाता है. वहीं भगवान शिव को पूर्णिमा के दिन अगर आप जलाभिषेक कर एक धतूरा का फूल अर्पण करते हैं, तो घर में सुख समृद्धि बनी रहेगी. वहीं, अगर आप आर्थिक तंगी से परेशान है तो इस दिन माता लक्ष्मी को कमल का पुष्प अर्पण करने से धन की प्राप्ति होगी.
भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि 28 सितंबर शाम 06 बजकर 49 मिनट से शुरू होगी. वहीं इसका समापन 29 सितंबर दोपहर 03 बजकर 26 मिनट पर होगा. ऐसे में पूर्णिमा का व्रत 28 सितंबर 2023 दिन गुरुवार को रखा जाएगा. वहीं, दान आदि के लिए 29 सितंबर 2023 शुक्रवार का दिन शुभ रहेगा. इस बार शुक्रवार के दिन पूर्णिमा है, यह दिन देवी लक्ष्मी को बेहद प्रिय होता है. इसके अलावा सवार्थ सिद्धि योग, वृद्धि योग, ध्रुव योग और अमृत सीधी योग का निर्माण भी हो रहा है. पूर्णिमा तिथि पर सर्वार्थ सिद्धि और वृद्धि योग में लक्ष्मी पूजा करने से आर्थिक लाभ मिलता है, पूजा, मंत्र सिद्धि होते हैं और मां लक्ष्मी व्यक्ति पर मेहरबान रहती हैं.
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सर्वार्थ सिद्धि योग – अमृत सिद्धि योग – 29 सितंबर 2023 की रात 11 बजकर 18 मिनट से लेकर 30 सितंबर 2023 की सुबह 06 बजकर 13 मिनट तक
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वृद्धि योग – 28 सितंबर 2023 की रात 11 बजकर 55 मिनट से 29 सितंबर 2023 की रात 08 बजकर 03 मिनट पर
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ध्रुव योग – 29 सितंबर 2023 की रात 08 बजकर 03 मिनट से 30 सितंबर 2023 की शाम 04 बजकर 27 मिनट पर
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अमृत सिद्धि योग – 29 सितंबर 2023 की रात 11 बजकर 18 मिनट से 30 सितंबर 2023 की सुबह 06 बजकर 13 मिनट पर
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शुक्रवार – शुक्रवार और पूर्णिमा दोनों मां लक्ष्मी को प्रिय है, ऐसे में धन प्राप्ति के लिए इस दिन को पुण्यफलदायी माना जा रहा है.
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इस पावन दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें.
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नहाने के बाद घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें.
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अगर संभव हो तो इस दिन व्रत भी रखें.
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सभी देवी- देवताओं का गंगा जल से अभिषेक करें.
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पूर्णिमा के पावन दिन भगवान विष्णु की पूजा- अर्चना का विशेष महत्व होता है.
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इस दिन विष्णु भगवान के साथ माता लक्ष्मी की पूजा- अर्चना भी करें.
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भगवान सत्यनारायण की विधिविधान पूर्वक पूजा-अर्चना कर कथा सुनें.
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भगवान सत्यनारायण को पंजीरी, पंचामृत और चूरमें का भोग लगाएं.
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इसके बाद प्रसाद अपने आसपास के लोगों में वितरित करें.
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पूर्णिमा के दिन जरूरतमंदों को अपनी समर्थ अनुसार दान जरूर करें.
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पूर्णिमा के उपवास में 24 घंटे का उपवास होता है, जिसमें आप केवल पानी या जूस का सेवन करते हैं. यह उपवास या तो पूर्णिमा या अमावस्या के दौरान होता है. उपवास के दिन के दौरान आपका शरीर विषाक्त पदार्थों से साफ हो जाता है. आप एक दिन में 3 किलो तक पानी का वजन कम कर सकते हैं.
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– भाद्रपद पूर्णिमा के दिन कुछ उपाय करना बेहद शुभ माना जाता है. ऐसा करने से धन की देवी माता लक्ष्मी की कृपा होती है, जिससे धन प्राप्ति और सफलता के योग बनते हैं.
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– इस दिन स्नान-दान का खास महत्व होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद पूर्णिमा पर किए गए दान-पुण्य कभी खत्म नहीं होते. इसके साथ ही मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है.
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– पूजा के दौरान माता लक्ष्मी को लाल रंग कर फूल और इत्र अर्पित करें. ऐसा करने से धन-समृद्धि में वृद्धि होती है. धन की देवी माता लक्ष्मी की कृपा होती है
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– भाद्रपद पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की पूजा के बाद माथे पर सफेद चंदन का टीका लगाएं. ऐसा करने से मानसिक तनाव दूर होता है. घर-परिवार में शामिल आती है.
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– इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा करें, जल अर्पित करें. ऐसा करने से देवी लक्ष्मी के साथ-साथ पितर भी प्रसन्न होते हैं.
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By Radheshyam Kushwaha
राधेश्याम कुशवाहा ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से MJ (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म) की शिक्षा प्राप्त करने के बाद अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत भोपाल से प्रकाशित राज एक्सप्रेस समाचार पत्र से की. इसके बाद उन्होंने समय जगत, राजस्थान पत्रिका और हिंदुस्तान जैसे प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं. वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म, अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 13 वर्षों का अनुभव रखने वाले राधेश्याम कुशवाहा को ज्योतिष शास्त्र, पंचांग गणना, ग्रह गोचर, नक्षत्र परिवर्तन, व्रत-त्योहारों की तिथियों तथा शुभ मुहूर्तों का गहन ज्ञान है. अपनी विशेषज्ञता के आधार पर वे धर्म-अध्यात्म और राशिफल से जुड़ी सटीक, तथ्यपरक एवं विश्वसनीय खबरें लिखते हैं. धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन में उनकी विशेष रुचि है. इसके अलावा राजनीति, अपराध और प्रेरणादायक (पॉजिटिव) विषयों पर लेखन में भी उनकी गहरी रुचि है.
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