आज मनाई जा रही है बैसाखी, खालसा पंथ की स्थापना का ऐतिहासिक दिन

बैसाखी की खुशियों के साथ इतिहास को याद करें
Baisakhi 2026: बैसाखी 2026 में 14 अप्रैल को मनाई जाएगी. यह पर्व किसानों की खुशहाली, खालसा पंथ की स्थापना और दान-पुण्य के महत्व से जुड़ा एक विशेष और पवित्र त्योहार है.
Baisakhi 2026: इस वर्ष बैसाखी 14 अप्रैल, मंगलवार के दिन मनाई जा रही है. यह पर्व हर साल 13 या 14 अप्रैल को आता है और पूरे भारत में बड़े उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया जाता है. खासकर किसानों के लिए यह दिन बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह नई फसल के आगमन और समृद्धि का प्रतीक है.
प्रकृति के प्रति आभार का पर्व
बैसाखी को “किसानों का पर्व” भी कहा जाता है. इस दिन लोग अपनी फसल के लिए प्रकृति और ईश्वर का धन्यवाद करते हैं. घर-घर में अनाज की पूजा की जाती है और यह कामना की जाती है कि सभी के घर धन-धान्य से भरे रहें. इस पर्व की खूबसूरती यह है कि इसमें सभी धर्मों के लोग मिलकर खुशियां मनाते हैं.
पौराणिक कथा से जुड़ा महत्व
बैसाखी का संबंध महाभारत काल से भी जोड़ा जाता है. मान्यता है कि वनवास के दौरान पांडव पंजाब के कटराज ताल के पास पहुंचे थे. वहां जल पीने के कारण चारों भाई मूर्छित हो गए थे. तब यक्ष ने युधिष्ठिर से प्रश्न पूछे और उनके उत्तरों से प्रसन्न होकर सभी भाइयों को जीवनदान दिया. इसी घटना को बैसाखी की उत्पत्ति से जोड़ा जाता है, जो धर्म, सत्य और बुद्धिमत्ता का संदेश देती है.
दान-पुण्य और स्नान का महत्व
ज्योतिष के अनुसार, बैसाखी पर दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है. इस बार दान का शुभ मुहूर्त 13 अप्रैल दोपहर 1:59 बजे से शुरू होकर 14 अप्रैल सूर्योदय तक रहेगा. यदि गंगा स्नान संभव न हो, तो घर में गंगाजल से स्नान करना भी पुण्यदायक माना जाता है.
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खालसा पंथ की स्थापना का ऐतिहासिक दिन
बैसाखी का महत्व सिख धर्म में भी बहुत खास है. इसी दिन 1699 में गुरु गोविंद सिंह जी ने आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना की थी. उन्होंने अपने पांच प्रिय शिष्यों को अमृत पान कराकर “पंज प्यारे” बनाया. सिख समुदाय इस दिन को अपने सामूहिक जन्मदिवस के रूप में भी मनाता है.
एकता, उत्सव और उमंग का संदेश
बैसाखी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि यह एकता, समृद्धि और कृतज्ञता का प्रतीक है. यह हमें सिखाता है कि प्रकृति, परंपरा और परिश्रम का सम्मान करना ही जीवन की असली खुशहाली है.
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By Shaurya Punj
मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.
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