बाबा बैद्यनाथधाम ज्योतिर्लिंग की महिमा, कथा और रोग निवारण की मान्यता

Updated at : 06 Feb 2026 8:45 AM (IST)
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Baidyanath Dham Jyotirlinga

बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग

Baidyanath Dham Jyotirlinga: बाबा बैद्यनाथधाम ज्योतिर्लिंग में स्पर्श पूजन और जलाभिषेक से रोग निवारण की मान्यता है. सावन में लाखों श्रद्धालु कांवड़ यात्रा कर यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

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Baidyanath Dham Jyotirlinga: भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक बाबा बैद्यनाथधाम ज्योतिर्लिंग झारखंड के देवघर में स्थित है. यह ज्योतिर्लिंग अन्य सभी ज्योतिर्लिंगों से कुछ अलग और विशेष माना जाता है. इसे रावणेश्वर ज्योतिर्लिंग भी कहा जाता है, क्योंकि धार्मिक मान्यता के अनुसार इसकी स्थापना रावण ने की थी. ज्योतिषाचार्य डॉ एन के बेरा ने बताया कि इस ज्योतिर्लिंग की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां भक्त स्पर्श पूजन भी कर सकते हैं, जो बहुत कम ज्योतिर्लिंगों में संभव है.

भक्ति से मिलती है रोगों से मुक्ति

बाबा बैद्यनाथ को रोगों के नाशक के रूप में पूजा जाता है. मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ यहां भगवान शिव का जलाभिषेक करता है, वह शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक कष्टों से मुक्त हो जाता है. इसी विश्वास के कारण सावन माह में लाखों श्रद्धालु सुल्तानगंज से लगभग 105 किलोमीटर पैदल यात्रा कर ‘बोल बम’ के जयकारों के साथ गंगाजल लाते हैं और बाबा पर अर्पित करते हैं.

यह भी कहा जाता है कि यहां की नित्य आरती और नियमित दर्शन से असाध्य रोग भी ठीक हो जाते हैं. यही कारण है कि बाबा बैद्यनाथ को “वैद्य” यानी रोगों का उपचार करने वाले भगवान कहा जाता है.

शिवगंगा और उपचार की मान्यता

एक प्राचीन कथा के अनुसार, जब देवताओं के वैद्य अश्विनी कुमार गंभीर रूप से बीमार हो गए थे, तब उन्होंने देवघर स्थित शिवगंगा में स्नान किया और उसी जल से भगवान शिव का अभिषेक किया. इसके बाद वे पूरी तरह स्वस्थ हो गए. तभी से मान्यता है कि शिवगंगा में स्नान कर बाबा बैद्यनाथ पर जल चढ़ाने से सभी शारीरिक रोग और कष्ट दूर होते हैं.

वैद्यनाथ धाम की पौराणिक कथा

शिवपुराण के अनुसार, रावण भगवान शिव को लंका ले जाना चाहता था. उसने कठोर तपस्या कर अपने एक-एक सिर को शिवलिंग के चरणों में अर्पित किया. प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे एक दिव्य शिवलिंग दिया और शर्त रखी कि इसे रास्ते में भूमि पर नहीं रखा जाएगा. भगवान विष्णु की लीला से रावण को विवश होकर शिवलिंग एक ग्वाले को देना पड़ा, जिसने उसे धरती पर रख दिया. उसी स्थान पर यह वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग स्थापित हो गया.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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