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Astro Tips For Home: घर के इन स्थानों पर होता है स्वयं ईश्वर का वास, कभी न करें खंडित

Updated at : 09 Jun 2025 11:54 PM (IST)
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Vastu Tips For Home

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Astro Tips For Home: यहां हम बता रहे है कि वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के कुछ विशेष स्थानों पर स्वयं ईश्वर का वास माना जाता है.

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Astro Tips For Home : वास्तु शास्त्र केवल दिशाओं का विज्ञान नहीं, अपितु यह एक दिव्य ज्ञान है जो हमारे जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करता है..शास्त्रों में कहा गया है कि कुछ विशेष स्थानों पर ईश्वर स्वयं वास करते हैं. यदि इन स्थानों की पवित्रता भंग हो जाए, तो जीवन में क्लेश, दरिद्रता और बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं. अतः इन स्थानों का आदर और संरक्षण आवश्यक है:-

– पूजा स्थल – ईश्वर का प्रत्यक्ष वास स्थान

घर में पूजाघर सबसे पवित्र स्थान माना गया है..यह स्थान केवल भगवान की मूर्तियों या तस्वीरों के लिए नहीं, बल्कि दिव्यता और शांति के ऊर्जा केंद्र के रूप में होता है.उत्तर-पूर्व दिशा में बना पूजा स्थल शुभ होता है. यहां कभी भी जूते-चप्पल, गंदे वस्त्र या टूटे हुए धार्मिक चित्र नहीं रखने चाहिए. खंडित मूर्तियों को पूजा स्थान से तुरंत हटा देना चाहिए..

– रसोईघर – अन्नपूर्णा देवी का स्थान

वास्तु में रसोईघर को माता अन्नपूर्णा का स्थान माना गया है. यहाँ की स्वच्छता और सात्विकता अत्यंत आवश्यक है. रसोई में मांस, मदिरा या अपवित्र चीजों का प्रयोग करने से देवी का अपमान होता है..अग्निकोण (दक्षिण-पूर्व दिशा) रसोई के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है, जिससे घर में धन और स्वास्थ्य बना रहता है.

– मुख्य द्वार – लक्ष्मी जी का प्रवेश द्वार

घर का मुख्य द्वार न केवल आगंतुकों के लिए मार्ग है, बल्कि यहीं से देवी लक्ष्मी और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है. इस स्थान को सदा स्वच्छ रखें और सुंदर तोरण, स्वस्तिक व शुभ चिन्ह लगाएं. मुख्य द्वार पर कभी भी झाड़ू, कूड़ेदान या टूटी वस्तुएं न रखें। यह दुर्भाग्य को आमंत्रित करता है.

– तुलसी स्थान – विष्णु प्रिय का वास

जहां तुलसी का पौधा होता है, वहां स्वयं भगवान विष्णु का निवास होता है. तुलसी को कभी भी अपवित्र हाथों से न छुएं और न ही उसके पत्ते बिना स्नान के तोड़ें. तुलसी स्थान को प्रतिदिन दीपक जलाकर पवित्र किया जाना चाहिए. यह स्थान उत्तर-पूर्व दिशा में हो तो अत्यंत शुभ होता है.

– शयन कक्ष – विश्राम का नहीं, ऊर्जा संतुलन का स्थान

शयनकक्ष में ईश्वर का प्रत्यक्ष वास तो नहीं होता, लेकिन यह मन और शरीर को विश्राम देने का स्थान होता है. यहां अश्लील चित्र, नकारात्मक प्रतीक, टूटे हुए शीशे या खंडित मूर्तियां रखना वर्जित है. शयनकक्ष में शिव-पार्वती या राधा-कृष्ण जैसे शांत भाव वाले चित्र लगाना शुभ माना जाता है.

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घर के कुछ स्थान केवल वास्तु के अनुसार नहीं, बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी अत्यंत पवित्र होते हैं. यदि हम इन स्थानों की शुद्धता बनाए रखें और उन्हें सम्मान दें, तो न केवल ईश्वर की कृपा बनी रहती है, बल्कि जीवन में सुख-शांति और उन्नति का मार्ग भी खुलता है.

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Ashi Goyal

लेखक के बारे में

By Ashi Goyal

Ashi Goyal is a contributor at Prabhat Khabar.

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