सूर्यास्त के बाद क्यों नहीं किया जाता अंतिम संस्कार? जानिए गरुड़ पुराण की मान्यता

Updated:
विज्ञापन
Garuda Purana and hindu last rights

गरुड़ पुराण में अंतिम संस्कार को लेकर कही गई ये बात

Garuda Purana: गरुड़ पुराण के अनुसार सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार करना अशुभ माना जाता है. यह परंपरा आत्मा की शांति, मोक्ष और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी हुई मानी जाती है.

विज्ञापन

Garuda Purana: गरुड़ पुराण के अनुसार हिंदू धर्म में जन्म से लेकर मृत्यु तक हर संस्कार का विशेष महत्व माना गया है. सनातन परंपरा में किसी भी कार्य को विधि-विधान और धार्मिक नियमों के अनुसार करना आवश्यक माना जाता है. यही कारण है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका अंतिम संस्कार भी पूरी श्रद्धा और परंपरा के साथ किया जाता है.

अंतिम संस्कार का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में मान्यता है कि मृत्यु केवल शरीर का अंत है, आत्मा अमर होती है. इसलिए अंतिम संस्कार को आत्मा की मुक्ति का माध्यम माना गया है. ऐसा कहा जाता है कि यदि किसी व्यक्ति का दाह संस्कार सही रीति-रिवाजों और मंत्रों के साथ न किया जाए, तो उसकी आत्मा को शांति नहीं मिलती और वह भटकती रहती है.

सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार क्यों नहीं?

गरुड़ पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि सूर्यास्त के बाद दाह संस्कार करना अशुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार सूर्य देव प्रकाश, ऊर्जा और सकारात्मकता के प्रतीक हैं. दिन के समय किए गए संस्कारों को देवताओं की उपस्थिति और शुभ ऊर्जा का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

वहीं रात का समय नकारात्मक शक्तियों और अशुभ प्रभावों से जुड़ा माना गया है. ऐसी मान्यता है कि सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार करने से मृत आत्मा को मोक्ष प्राप्त करने में कठिनाई हो सकती है. इसी कारण यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु रात में होती है, तो शव को अगले दिन सूर्योदय तक सुरक्षित रखा जाता है.

वैज्ञानिक और व्यावहारिक कारण

धार्मिक कारणों के साथ-साथ इसके पीछे व्यावहारिक वजहें भी मानी जाती हैं. प्राचीन समय में रात में पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था नहीं होती थी, जिससे अंतिम संस्कार की प्रक्रिया सही ढंग से संपन्न करना कठिन होता था. साथ ही सुरक्षा और सामाजिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए भी दिन के समय ही दाह संस्कार करने की परंपरा बनाई गई.

परंपरा और आस्था का संगम

सनातन धर्म में अंतिम संस्कार केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि आत्मा की शांति और मोक्ष से जुड़ा पवित्र संस्कार माना गया है. इसलिए आज भी अधिकांश लोग सूर्यास्त के बाद दाह संस्कार करने से बचते हैं और धार्मिक परंपराओं का पालन करते हैं.

विज्ञापन
Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola