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Closed Eyes During Aarti: क्या ‘आंखें बंद कर आरती’ करना आपकी श्रद्धा को सीमित करता है

Updated at : 22 Jul 2025 10:17 AM (IST)
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Closed Eyes During Aarti right or wrong

Closed Eyes During Aarti

Closed Eyes During Aarti: आरती के समय आंखें बंद करना एक आम परंपरा है, लेकिन क्या यह भक्ति की अनुभूति को सीमित करता है? यह सवाल श्रद्धा, दर्शन और आध्यात्मिक अनुभव के संतुलन को लेकर उठता है. आइए जानें, क्या खुली आंखों से भगवान का दर्शन आरती को और अधिक सार्थक बनाता है?

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Closed Eyes During Aarti: आरती हिंदू धर्म की पूजा-पद्धति का एक अत्यंत भावपूर्ण और शक्तिशाली चरण है. इस समय भक्त अपने आराध्य को दीप, धूप, कपूर, पुष्प और भजन की माधुर्यपूर्ण लय में समर्पण भाव से पूजता है. आरती के दौरान कुछ लोग आंखें मूंदकर भीतर की भक्ति में डूब जाते हैं, तो कुछ भक्त भगवान के विग्रह को खुली आंखों से निहारते रहते हैं. सवाल यह उठता है कि क्या आरती करते समय आंखें बंद करना उचित है?

शास्त्रों की दृष्टि से

हिंदू धर्मग्रंथों में “प्रत्यक्षं किम् प्रमाणम्” का उल्लेख आता है, जिसका आशय है कि प्रत्यक्ष दर्शन भी प्रमाण है. स्कंद पुराण और पद्म पुराण में बताया गया है कि आरती के दौरान भगवान के विग्रह के दर्शन करने से कई गुना पुण्य प्राप्त होता है. इस समय विग्रह को देखना सिर्फ नेत्रों की प्रक्रिया नहीं, बल्कि आत्मा से जुड़ाव का क्षण भी होता है. इसलिए आंखें बंद करने से उस दिव्य अनुभूति का लाभ अधूरा रह सकता है.

आध्यात्मिक अनुभूति

कुछ भक्त आरती के समय भावविभोर होकर आंखें बंद कर लेते हैं. यह उनकी अंतर्यात्रा की अभिव्यक्ति होती है, जहां वे बाहरी छवि की बजाय अपने मन के आराध्य को अनुभव करना चाहते हैं. यह एक ऊंचे स्तर की भक्ति का संकेत हो सकता है, किंतु आरती जैसे दृश्यात्मक अनुष्ठान में दर्शन का त्याग करना कभी-कभी आत्मिक सम्पर्क को सीमित कर देता है.

वैज्ञानिक विश्लेषण

जब दीपक की ज्योति और घंटियों की ध्वनि हमारे इंद्रियों पर असर डालती है, तो वे मस्तिष्क में सकारात्मक न्यूरोलॉजिकल प्रतिक्रिया उत्पन्न करती हैं. यह प्रक्रिया मन को शांति, ऊर्जा और ध्यान की अवस्था में लाने का कार्य करती है. आंखें बंद करने पर हम इन सभी प्रभावों में से दृश्य का लाभ नहीं ले पाते.

आरती के समय आंखें खुली रखना शास्त्रों, विज्ञान और भक्ति – तीनों दृष्टिकोणों से अधिक प्रभावशाली माना गया है. यह दृष्टि और श्रद्धा का सुंदर समन्वय बनाता है. हालांकि, यदि कोई भक्त अंतर भाव से आंखें मूंद ले तो वह भी गलत नहीं है. लेकिन संपूर्ण आरती का लाभ लेने के लिए भगवान के दर्शन करते हुए आराधना करना श्रेष्ठ मार्ग है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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