पैदा होने का उद्देश्य
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :29 Dec 2015 1:49 AM (IST)
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आज के समय में विषय बिल्कुल विपरीत हो गया है. राह चलते अथवा आते-जाते आपको हजारों-हजार ऐसे लोग मिल जायेंगे, जो केवल दूसरों के पास दौड़ते ही रह जाते हैं. राजनीति में भी देखें, इस दल के नेता उस दल वालों के सिर फोड़ने पर उतारू रहते हैं. ऐसे विषय में नेता लोग कुछ नहीं […]
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आज के समय में विषय बिल्कुल विपरीत हो गया है. राह चलते अथवा आते-जाते आपको हजारों-हजार ऐसे लोग मिल जायेंगे, जो केवल दूसरों के पास दौड़ते ही रह जाते हैं. राजनीति में भी देखें, इस दल के नेता उस दल वालों के सिर फोड़ने पर उतारू रहते हैं. ऐसे विषय में नेता लोग कुछ नहीं करते, उनके पीछे-पीछे दौड़नेवाले जो लोग हैं, बस वही सारा काम कर रहे हैं. उनका जीवन केवल पीछे-पीछे दौड़ने और दूसरे का सिर फोड़ने में ही व्यतीत हो रहा है.
वह व्यक्ति इस बात को कभी महसूस ही नहीं कर पा रहा है कि उसके अपने जीवन का कोई अर्थ भी है. इस ब्रह्मांड में उसके पैदा होने का कुछ उद्देश्य भी है. केवल यह काम करना कि कल उसके आगे और कल किसी और के पीछे दौड़ना नहीं. स्पष्ट है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने अंदर यह भाव पैदा करना चाहिए कि इस भूमंडल पर उसका आना एक उद्देश्यपूर्ण निर्माण है.
इस विचार को मानव में स्थापित करके उसे अपनी भूमिका की ओर पूर्ण निष्ठा से लग जाना चाहिए. कर्मों को करते समय निष्काम भाव रखना चाहिए, क्योंकि प्रत्येक कर्म का फल निश्चित ही प्राप्त होता है और ईश्वर की कृपा अथवा शक्तिपात उस पर अवश्य ही होता है.
– आचार्य सुदर्शन
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