बुढ़वा मंगल का रहस्य, हनुमान जी ने कैसे तोड़ा भीम का अभिमान
बुढ़वा मंगल से जुड़ी कहानी
Budhwa Mangal 2026: बुढ़वा मंगल से जुड़ी कथा में हनुमान जी ने वृद्ध वानर बनकर भीम का अभिमान तोड़ा था. जानें इस पौराणिक प्रसंग, पूजा महत्व और धार्मिक मान्यताओं के बारे में.
Budhwa Mangal 2026: हिंदू धर्म में ज्येष्ठ मास का विशेष महत्व माना गया है. इस माह में पड़ने वाले प्रत्येक मंगलवार को “बड़ा मंगल” या “बुढ़वा मंगल” कहा जाता है. यह पर्व विशेष रूप से उत्तर भारत, खासकर उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और मध्य क्षेत्रों में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. इस दिन हनुमान जी की पूजा, भंडारे और प्रसाद वितरण का विशेष महत्व होता है.
क्यों कहा जाता है बड़ा मंगल?
बड़ा मंगल नाम के पीछे कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं. पहली कथा के अनुसार, ज्येष्ठ मास के मंगलवार के दिन ही भगवान श्रीराम वन में माता सीता की खोज करते हुए पहली बार हनुमान जी से मिले थे. इसी ऐतिहासिक और धार्मिक घटना के कारण इस माह के सभी मंगलवार “बड़ा मंगल” कहलाए.
दूसरी मान्यता महाभारत काल से जुड़ी हुई है. कहा जाता है कि ज्येष्ठ मास के मंगलवार को हनुमान जी ने वृद्ध वानर का रूप धारण कर महाबली भीम के अहंकार को समाप्त किया था. इसी कारण इस पर्व को “बुढ़वा मंगल” भी कहा जाने लगा. इस दिन भक्त हनुमान जी के वृद्ध स्वरूप की पूजा करते हैं और उन्हें चोला चढ़ाते हैं. मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन की बाधाएं, भय और संकट दूर हो जाते हैं.
लखनऊ के बड़ा मंगल की प्रसिद्ध कथा
बड़ा मंगल से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह से भी संबंधित है. कहा जाता है कि उनके पुत्र की तबीयत बहुत खराब थी. कई उपचार कराने के बाद भी जब कोई लाभ नहीं हुआ, तब किसी ने उन्हें अलीगंज स्थित हनुमान मंदिर में प्रार्थना करने की सलाह दी. नवाब ने वहां जाकर श्रद्धा से प्रार्थना की और उनके पुत्र का स्वास्थ्य ठीक हो गया.
इस चमत्कार से प्रभावित होकर नवाब और उनकी बेगम ने मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया. यह कार्य ज्येष्ठ माह में पूरा हुआ. तभी से लखनऊ में बड़ा मंगल के अवसर पर विशाल भंडारे, शरबत वितरण और गुड़-चना प्रसाद बांटने की परंपरा शुरू हुई, जो आज भी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है.
ज्येष्ठ मास का धार्मिक और प्राकृतिक महत्व
जब सूर्य वृष राशि में प्रवेश करता है, तब ज्येष्ठ मास की शुरुआत होती है. “ज्येष्ठ” का अर्थ होता है “बड़ा”, क्योंकि इस माह में दिन सबसे बड़े होते हैं. इस महीने का स्वामी ग्रह मंगल माना गया है, जो अग्नि तत्व का कारक है. यही कारण है कि इस समय भीषण गर्मी पड़ती है.
इस माह में जल का विशेष महत्व बताया गया है. जल संरक्षण और जलदान दोनों ही पुण्यकारी माने जाते हैं. ज्येष्ठ मास में गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी जैसे महत्वपूर्ण पर्व आते हैं. इन अवसरों पर पानी से भरा घड़ा, पंखा, छाता, जूते-चप्पल और शीतल वस्तुओं का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है.
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नौतपा और पूजा का महत्व
ज्येष्ठ मास में “नौतपा” भी पड़ता है, जो नौ दिनों की अत्यधिक गर्म अवधि होती है. यह तब शुरू होता है जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है. मान्यता है कि नौतपा जितना अधिक तपता है, मानसून उतना ही अच्छा होता है.इस पूरे माह में भगवान विष्णु, गंगा माता, सूर्य देव, वरुण देव और हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व माना गया है. धार्मिक मान्यता के अनुसार ज्येष्ठ मास में परिवार के बड़े पुत्र या पुत्री का विवाह करना शुभ नहीं माना जाता.
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By Shaurya Punj
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