चंद्रग्रहण आज, जानें ग्रहण के दौरान क्या करें, क्या न करें, किस राशि को होगा नुकसान
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :31 Jan 2018 6:51 AM (IST)
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माघ पूर्णिमा का दिन शास्त्रों में दान पुण्य और पूजन के लिए बहुत ही खास माना गया है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन किये गये दान पुण्य से मोक्ष का द्वार खुलता है, लेकिन इस साल माघ पूर्णिमा जो 31 जनवरी को है, उस दिन चंद्रग्रहण भी लग रहा है. संयोग ऐसा बना है […]
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माघ पूर्णिमा का दिन शास्त्रों में दान पुण्य और पूजन के लिए बहुत ही खास माना गया है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन किये गये दान पुण्य से मोक्ष का द्वार खुलता है, लेकिन इस साल माघ पूर्णिमा जो 31 जनवरी को है, उस दिन चंद्रग्रहण भी लग रहा है.
संयोग ऐसा बना है कि सूर्योदय के कुछ घंटों के बाद ही ग्रहण का सूतक लग जायेगा और मंदिरों के दरवाजे बंद हो जायेंगे. बुधवार को खग्रास चंद्रग्रहण है.
यह संपूर्ण भारत के अलावा एशिया, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया व उत्तरी अमेरिका में भी पूर्ण रूप से दिखायी देगा. राज्य व इसके आस-पास के इलाके में खग्रास चंद्र ग्रहण रहेगा, लेकिन इन स्थानों पर स्पर्श दिखायी नहीं देगा. मध्य और मोक्ष दिखायी देगा. इसकी कुल अवधि एक घंटे 16 मिनट है, जबकि पूर्ण चंद्र ग्रहण की अवधि तीन घंटे 23 मिनट की है.
राजधानी के कई मंदिरों में प्रात: पूजा-अर्चना के बाद मंदिरों के पट बंद कर दिये जायेंगे
ग्रहण काल में चंद्रमा अश्लेषा नक्षत्र और कर्क राशि में रहेगा. इसका सूतक प्रातः 08.19 बजे से लग जायेगा. रांची में चंद्रोदय संध्या 05.28 बजे है. राज्य में खग्रास चंद्र ग्रहण भारतीय समयानुसार शाम 06.22 से रात्रि 08.41 बजे तक रहेगा, जबकि खंड चंद्र ग्रहण देश में शाम 05.18 से 08.41 बजे तक रहेगा.
बुधवार को राजधानी के कई मंदिरों में प्रात: पूजा-अर्चना के बाद मंदिरों के पट बंद कर दिये जायेंगे, जो गुरुवार की सुबह खुलेंगे. ग्रहण के संबंध में विभिन्न मंदिरों में भी सूचना दे दी गयी है. पूर्णिमा के दिन प्रात: स्नान ध्यान कर भगवान विष्णु और शिव की पूजा अर्चना कर लें. इस अवसर पर चंद्र-राहु का जप करें अौर ऊं नमो वासुदेवाय नम: मंत्र का जाप करें.
एक नजर में चंद्रग्रहण का समय
ग्रहण का स्पर्श काल : शाम 5 बज कर 18 मिनट 27 सेकेंड
खग्रास आरंभ : शाम 6 बज कर 21 मिनट 47 सेकेंड
ग्रहण मध्य : शाम 6 बज कर 59 मिनट 50 सेकेंड
खग्रास समाप्त : शाम 7 बज कर 37 मिनट 51 सेकेंड
ग्रहण मोक्ष : रात 8 बज कर 41 मिनट 11 सेकेंड
किस राशि के अनुसार
क्या फल होगा
मेष रोग
वृषभ पारिवारिक चिंता
मिथुन सुख
कर्क मानसिक कष्ट
सिंह कष्ट
कन्या धन लाभ
तुला आर्थिक हानि
बृश्चिक स्वास्थ्य हानि
धनु शरीर में कष्ट
मकर धन लाभ
कुंभ धन सिद्धि
मीन यश की हानि
पंडितों के अनुसार ग्रहण के दौरान क्या करें, क्या न करें
मंत्र का जाप करें. यदि कोई गुरु मंत्र नहीं लिया है, तो भगवान के नाम का ही जाप करें.
ग्रहण के स्पर्श, मध्य व मोक्ष में संभव हो तो स्नान कर लें.
ग्रहण की अवधि में बातचीत आदि से बचें. ज्यादा से ज्यादा भगवान का नाम लें.
ग्रहण की अवधि शुरू होने से पूर्व ही भोजन आदि कर लें. बचे भोजन में तुलसी पत्र अथवा कुश डाल दें.
ग्रहण की समाप्ति के बाद स्नान ध्यान कर पूजा-पाठ कर लें और दान करने के बाद भोजन करें.
बीमार व वृद्ध ग्रहण से परे रहते हैं.
ग्रहण की अवधि में गर्भवती महिला किसी भी चीज को न काटें, सिलाई आदि से दूर रहें.
एक साथ चांद के तीन अलग-अलग रंग
रांची़ : 31 जनवरी को चंद्रग्रहण लग रहा है. यह चंद्रग्रहण अपने साथ कई ऐसी बातें ला रहा है, जो धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों के मतों से अद्भुत होने वाला है. वैज्ञानिक तर्क में आज (बुधवार) को लगने वाला चंद्र ग्रहण सुपर ब्लू ब्लड मून कहलायेगा. इस दिन चांद हर दिन के मुकाबले 14 फीसदी बड़ा और 30 फीसदी ज्यादा चमकदार दिखायी देगा. इस दिन चांद तीन रंगों में दिखायी देगा.
आज के चंद्रग्रहण में चांद अलग-अलग रंगों में दिखेगा. एक दिन में चांद ब्लू मून, पूर्ण चंद्र ग्रहण या ब्लड मून औरसुपरमून या सुपर ब्लू ब्लड मून के रूप में दिखेगा. सुपर ब्लू ब्लड मून या सुपर मून को जानने से पहले चांद की दो अन्य परिस्थितियों को समझें.
ब्लू मून : आमतौर पर पूर्णिमा एक महीने में एक बार ही आती है. कई बार ऐसा भी होता है, जब पूर्णिमा महीने की एक या दो तारीख को आती है, तो महीने के आखिर में भी पूर्णिमा आ जाती है. एक महीने के अंदर यह जो दूसरी पूर्णिमा आती है, इसे ही अंग्रेजी में ब्लू मून कहते हैं.
ब्लड मून : ब्लड मून को ऐसे समझा जा सकता है. धरती सूरज का चक्कर लगाती है. धरती का चक्कर चांद लगाता है. ऐसे में जब सूरज, धरती और चांद सीधी रेखा में आ जाएं, तो धरती की छाया चांद पर पड़ती है. इसे हम चंद्र ग्रहण कहते हैं. इसमें भी जब छाया की वजह से पूरा चांद छिप जाये, तो उसे पूर्ण चंद्र ग्रहण कहते हैं. अंग्रेजी में यह घटना ब्लड मून कहलाती है.
सुपरमून : चांद धरती के इर्द-गिर्द गोलाई में नहीं, बल्कि इलिप्टिकली यानी अंडाकार घूमता है. चांद का वह हिस्सा जो धरती के चारों ओर घूमता है, उसे एलिप्स कहते हैं. एलिप्स का छोटा हिस्सा पेरिजी कहलाता है.
वहीं बड़ा हिस्सा एपोजी कहलाता है. जब चंद्रमा पेरिजी पर होता है, तब वो धरती के सबसे पास होता है. वो आम रातों में दिखने वाले चांद से 14 फीसदी ज्यादा बड़ा और 30 फीसदी अधिक चमकता हुआ दिखता है. जिस दिन पूर्णिमा हो और चांद पेरिजी पर हो, उस दिन सुपरमून दिखता है.
ऐसे आया सुपर मून शब्द
‘सुपरमून’ शब्द का इस्तेमाल पहली बार 1979 में साइंटिस्ट रिचर्ड नोल ने किया था. आमतौर पर जब चंद्रमा का केंद्र, पृथ्वी के केंद्र से 360,000 किलोमीटर दूर होता है, तब उसे सुपर मून कहा जाता है. आज की रात जो चांद दिखने वाला है, वह तीनों स्थिति में होगा.
मिथक से बचें, वैज्ञानिक पक्ष को समझें
रांची विवि के पूर्व कुलपति सह फिजिक्स शिक्षक डॉ एए खान बताते हैं कि हमारे समाज में ग्रहण से जुड़े तमाम तरह के मिथक फैले हुए हैं. आमतौर पर ऐसा कहा जाता है कि ग्रहण का सबसे ज्यादा असर गर्भवती महिलाओं पर पड़ता है, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है.
अाज जो सुपर ब्लू ब्लड मून हाेने वाला है, इसका भी किसी तरह का कोई नकारात्मक प्रभाव ह्यूमन एक्टिविटी पर नहीं पड़ने वाला है. किसी भी वैज्ञानिक टर्म में इस बात को नहीं लिखा-पढ़ा गया है कि चंद्रग्रहण का किसी भी तरह का नकारात्मक असर मानव जीवन की क्रियाओं पर होता है.
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