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Murder Case : चर्चित विनय महतो हत्याकांड में दोबारा होगा ट्रायल, पोक्सो कोर्ट ने दिया आदेश

सफायर इंटरनेशनल स्कूल के छात्र विनय महतो की हत्या के मामले में जेजे कोर्ट के आदेश को खारिज करते हुए पोक्सो कोर्ट ने दोबारा ट्रायल शुरू करने का आदेश दिया है.

रांची : सफायर इंटरनेशनल स्कूल के छात्र विनय महतो की हत्या के मामले में जेजे कोर्ट के आदेश को खारिज करते हुए पोक्सो कोर्ट ने दोबारा ट्रायल शुरू करने का आदेश दिया है. पोक्सो कोर्ट के न्यायाधीश केएम प्रसाद की अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुनाते हुए बाल अदालत के फैसले को खारिज कर दिया. साथ ही मामले में बचे हुए साक्ष्य को फिर से लाने का पुलिस को आदेश दिया है.

गौरतलब है कि बाल अदालत (जेजे कोर्ट) ने हत्याकांड के मुख्य आरोपी स्कूल की शिक्षिका के नाबालिग पुत्र-पुत्री को आरोप से बरी कर दिया था. अदालत के इस फैसले को विनय के पिता मनबहाल महतो ने कोर्ट में चुनौती दी थी. इस मामले में छह जुलाई 2018 को जेजे कोर्ट के तत्कालीन प्रधान न्यायिक दंडाधिकारी राजीव त्रिपाठी की अदालत ने दोनों नाबालिग आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था.

विनय महतो की हत्या चार फरवरी 2016 की देर रात उसके स्कूल परिसर में की गयी थी. जांच के दौरान पुलिस ने स्कूल की शिक्षिका नाजिया हुसैन, उसके पति आरिफ अंसारी और नाबालिग बेटे और बेटी गिरफ्तार कर आरोपी बनाया था. न्याय की उम्मीद जगी है : विनय के पिता मनबहाल महतो ने कहा कि पोक्सो कोर्ट के इस फैसले से उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद जगी है, लेकिन ढंग से काम हो तो, वरना हम सीबीअाइ जांच के लिए अदालत गये ही हैं. हम हर हाल में न्याय चाहते हैं. जब दोनों आरोपी बरी हो गये थे, तो हमें लगने लगा था कि अब इस न्याय नहीं मिलेगा.

अपने बच्चे को न्याय दिलाने को लेकर सीबीआइ जांच के लिए मनबहाल अक्तूबर 2017 में सुप्रीम कोर्ट गये थे. वहां सुनवाई के बाद हाइकोर्ट में अपील करने का आदेश दिया गया था. उसके बाद आठ मार्च 2018 को झारखंड हाइकोर्ट में सीबीआइ जांच के लिए याचिका दाखिल की थी. वह अभी सुनवाई के लिए लंबित है. बता दें कि मनबहाल महतो का परिवार पैतृक घर छोड़कर फिलवक्त अरगोड़ा में रह रहे हैं. जेजे कोर्ट (बाल अदालत) के आदेश को पोक्सो कोर्ट ने किया खारिज सफायर इंटरनेशनल स्कूल के छात्र की चार फरवरी 2016 को हुई थी हत्या अदालत ने बचे हुए साक्ष्य को फिर से लाने का पुलिस को दिया आदेश साक्ष्य के अभाव में छह जुलाई 2018 को बरी हो गये थे आरोपी

क्या कहता है अभियोजन पक्ष : पोक्सो के विशेष लोक अभियोजक एके राय ने कहा कि जेजे कोर्ट के फैसले से असंतुष्ट होकर अभियोजन ने 29 सितंबर 2018 को क्रिमिनल अपील याचिका न्यायायुक्त की अदालत में दायर की थी. उसी पर सुनवाई चल रही थी. सोमवार को फैसला आया. अदालत को कुछ बिंदुआें को देख कर लगा होगा कि दोबारा ट्रायल होने पर नयी बातें सामने आ सकती हैं. लिहाजा, फिर से सुनवाई होगी और हम लोग उसमें सबूत पेश करेंगे.

बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने कहा : बचाव पक्ष के अधिवक्ता प्रदीप सरकार ने कहा कि दोबारा ट्रायल करने का फैसला न्यायसंगत नहीं है. यदि साक्ष्य और गवाह रहता, तो पहले ही सजा हो जाती. क्या दोबारा ट्रायल में गवाह और साक्ष्य आ जायेंगे? मामले में दोनों बच्चे एक साल की कस्टडी में भी रह चुके हैं. दोबारा से वे लोग ट्रायल फेस करेंगे.

इससे उनकी मानसिक स्थिति पर असर पड़ेगा. एक नाबालिग आइआइटी का टॉपर है. उस पर बुरा असर पड़ेगा. बच्चों के मामले में एक ही केस में बार-बार ट्रायल तथा जुवेनाइल जस्टिस में बच्चों को लाभ देने की बात तो बेमानी लग रही है. ऐसे बच्चों को अधिकतम तीन साल ही कस्टडी में रखा जा सकता है.

Post by : Pritish Sahay

Prabhat Khabar Digital Desk
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