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मुंबई हाइकोर्ट में जमानत पर हो रही थी सुनवाई, कोरोना संक्रमित फादर स्टेन स्वामी का हार्ट अटैक से निधन

Updated at : 06 Jul 2021 7:18 AM (IST)
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मुंबई हाइकोर्ट में जमानत पर हो रही थी सुनवाई, कोरोना संक्रमित फादर स्टेन स्वामी का हार्ट अटैक से निधन

Jharkhand News, रांची न्यूज : सामाजिक कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी (84 वर्ष) नहीं रहे. सोमवार को मुंबई हाइकोर्ट में उनकी जमानत पर सुनवाई चल रही थी. वहीं दूसरी ओर मुंबई के होली फैमिली अस्पताल में भर्ती कोरोना संक्रमित स्टेन स्वामी का दोपहर डेढ़ बजे हार्ट अटैक से निधन हो गया. सांस लेने में ज्यादा तकलीफ की शिकायत के बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था. वह 30 मई से अस्पताल में भर्ती थे. सीएम हेमंत सोरेन ने इनके निधन पर शोक जताया है.

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Jharkhand News, रांची न्यूज : सामाजिक कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी (84 वर्ष) नहीं रहे. सोमवार को मुंबई हाइकोर्ट में उनकी जमानत पर सुनवाई चल रही थी. वहीं दूसरी ओर मुंबई के होली फैमिली अस्पताल में भर्ती कोरोना संक्रमित स्टेन स्वामी का दोपहर डेढ़ बजे हार्ट अटैक से निधन हो गया. सांस लेने में ज्यादा तकलीफ की शिकायत के बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था. वह 30 मई से अस्पताल में भर्ती थे. सीएम हेमंत सोरेन ने इनके निधन पर शोक जताया है.

एक जनवरी 2018 को पुणे के भीमा-कोरेगांव में एक पार्टी के दौरान दलित और मराठा समुदाय के बीच हुई हिंसा के मामले में एनआइए ने स्टेन स्वामी को आठ अक्तूबर 2020 को रांची के नामकुम थाना क्षेत्र के बगईचा स्थित घर से गिरफ्तार किया था. गिरफ्तारी के बाद से ही सामाजिक संगठन गोलबंद होकर उनकी रिहाई की मांग कर रहे थे. सोशल मीडिया पर भी कैंपेन चलाया जा रहा था. गिरफ्तारी के बाद स्टेन स्वामी को मुंबई की तलोजा जेल में न्यायिक हिरासत में रखा गया था.

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जिस वक्त उन्हें गिरफ्तार किया गया था, वे पार्किंसन्स नामक बीमारी से ग्रसित थे. इस बीमारी की वजह से उन्हें सुनने में परेशानी होती थी. इसके अलावा अधिक उम्र होने के कारण वे कई अन्य प्रकार के रोगों से घिरे थे. बता दें कि भीमा कोरेगांव मामले में 28 अगस्त, 2019 को पुणे पुलिस ने देश के अलग-अलग हिस्सों में छापा मारकर कई लोगों को पकड़ा था.

उस वक्त कहा गया था कि प्रधानमंत्री की हत्या की साजिश रची जा रही थी. लेकिन इस आरोप का प्राथमिकी में उल्लेख नहीं किया गया है. 24 जनवरी, 2020 को केंद्रीय जांच एजेंसी एनआइए ने केस अपने हाथों में ले लिया. एनआइए ने प्राथमिकी में 23 में से 11 आरोपियों को नामजद किया था, जिनमें सामाजिक कार्यकर्ता सुधीर धावले, शोमा सेन, महेश राउत, रोना विल्सन, सुरेंद्र गाडलिंग, वरवरा राव, सुधा भारद्वाज, अरुण फरेरा, वर्नोन गोंसाल्विस, आनंद तेलतुम्बड़े और गौतम नवलखा आदि शामिल थे.

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कब क्या हुआ

-12 जून 2019 : महाराष्ट्र एटीएस की टीम ने रांची के नामकुम बगईचा स्थित स्वामी के घर पर छापेमारी कर इनके घर से कंप्यूटर सहित अन्य सामान जब्त किया था.

-24 जनवरी, 2020 : एनआइए ने केस टेकओवर कर मामले की जांच शुरू की थी.

-आठ अक्तूबर 2020 : एनआइए दिल्ली की टीम ने नामकुम स्थित स्वामी के घर पहुंचकर उनसे पूछताछ की थी. इसके बाद गिरफ्तार कर उन्हें मुंबई के तलोजा जेल में रखा गया था.

-21 मई 2021 : जेल में रहने के दौरान उनकी सेहत खराब हुई थी

-30 मई 2021 : जेल से मुंबई के फैमिली अस्पताल में भर्ती कराये गये.

-तीन जुलाई 2021 : वकील मिहिर देसाई ने कोर्ट को अवगत कराया था कि स्वामी की स्थिति ठीक नहीं है और उन्हें आइसीयू में रखा गया है.

स्टेन स्वामी का जन्म 26 अप्रैल 1937 को तमिलनाडु के त्रिची में हुआ था. वे 30 मई 1957 को जेसुइट बने थे. इसके बाद से वंचितों और गरीबों के लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया. वे 1965 में झारखंड के चाईबासा आये. इसके बाद वे झारखंड के ही होकर रह गये. स्वामी आदिवासी, दलित और वंचितों के अधिकारों के लिए लगातार काम करते रहे. गिरफ्तारी के बाद 21 मई को 2021 जेल में रहने के दौरान उनकी सेहत खराब हुई थी. उस वक्त उन्होंने अस्पताल जाने से इनकार कर दिया था. स्वामी ने हाइकोर्ट से कहा था कि वो अस्पताल में शिफ्ट होने की बजाय जेल में मरना पसंद करेंगे. उन्होंने कोर्ट से अंतरिम जमानत पर रिहाई की अपील की थी.

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मुंबई के होली फैमिली अस्पताल के निदेशक डॉ इयान डिसूजा ने कोर्ट को बताया कि हार्ट अटैक से स्वामी की मौत हो गयी. यह सुन जस्टिस एसएस शिंदे और एनजे जमादार की पीठ ने कहा कि उन्हें कहने के लिए शब्द नहीं मिल रहे.

सीएम हेमंत सोरेन ने स्टेन स्वामी के निधन पर शोक जताया है. कहा कि स्वामी ने अपना जीवन आदिवासी अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया. भगवान दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे व शोक संतप्त परिवार को दु:ख सहन करने की शक्ति दे.

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि स्वामी न्याय व मानवीयता के हकदार थे. प्रियंका गांधी ने कहा कि एक व्यक्ति जो जीवन भर मानव अधिकारों की आवाज बना, वह अंत समय में भी मानव अधिकारों से वंचित रखा गया.

Posted By : Guru Swarup Mishra

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