ePaper

कुड़मी मांग रहे ST का दर्जा, गीताश्री उरांव ने किया विरोध, कहा- हमारे क्षेत्र में अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं

Updated at : 27 Sep 2022 4:14 PM (IST)
विज्ञापन
कुड़मी मांग रहे ST का दर्जा, गीताश्री उरांव ने किया विरोध, कहा- हमारे क्षेत्र में अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं

इतिहास का हवाला देते हुए गीताश्री ने कहा कि द्रविड़ और आर्य दो समूह हैं. आर्य विदेशों से आयी नस्ल है. कुड़मी उन्हीं के वंशज हैं. इनका मुख्य काम खेती-बाड़ी रहा है. खेती-बाड़ी करके ये काफी मजबूत रहे. कई जगहों पर अपना साम्राज्य भी स्थापित किया.

विज्ञापन

आदिवासी अधिकार रक्षा मंच ने कुड़मियों की ओर से आदिवासी का दर्जा देने की मांग का सख्त विरोध किया है. आदिवासी अधिकार रक्षा मंच (Adivasi Adhikar Raksha Manch) की ओर से झारखंड की पूर्व शिक्षा मंत्री गीताश्री उरांव (Geetashri Oraon) ने राजधानी रांची के मोरहाबादी में बापू वाटिका (Bapu Vatika) के समक्ष सोमवार को आयोजित एक दिन के उपवास के दौरान कहा कि अगर हमारे क्षेत्र में कुड़मी अतिक्रमण करेंगे, तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. उन्होंने कहा कि कुड़मियों के साथ हम मूलवासी और भाईचारा का रिश्ता रखना चाहते हैं.

कुड़मी आंदोलन की आग झारखंड में

आदिवासी संगठनों के एक दिवसीय उपवास के दौरान गीताश्री उरांव ने प्रभात खबर (prabhatkhabar.com) से कहा कि कुड़मी समाज के लोग खुद को आदिवासियों की सूची (ST Status to Kurmi in Jharkhand) में शामिल करने की मांग कर रहे हैं. इसके लिए उन्होंने बड़ा आंदोलन भी किया है. खासकर पश्चिम बंगाल में. झारखंड में भी इसकी आग लग रही है. गीताश्री उरांव ने कहा कि कुड़मियों का आदिवासियों से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है.

Also Read: Indian Railways News: कुड़मी आंदोलन का रेल परिचालन पर दिख रहा असर, आज भी कई ट्रेनें रद्द, देखें लिस्ट
आर्य के वंशज हैं कुड़मी

इतिहास का हवाला देते हुए गीताश्री ने कहा कि द्रविड़ और आर्य दो समूह हैं. आर्य विदेशों से आयी नस्ल है. कुड़मी उन्हीं के वंशज हैं. इनका मुख्य काम खेती-बाड़ी रहा है. खेती-बाड़ी करके ये काफी मजबूत रहे. कई जगहों पर अपना साम्राज्य भी स्थापित किया. कई जगह ये लोग क्षत्रिय/राजपूत से भी अपना कनेक्शन स्थापित करते हैं.

पिछड़ा वर्ग में डाले जाने का नहीं किया विरोध

गीताश्री ने कहा कि रांची के तत्कालीन सांसद रामटहल चौधरी ने बूटी मोड़ में शिवाजी महाराज की मूर्ति बड़े धूमधाम से स्थापित की थी. हालांकि, शिवाजी महाराज का इस भू-भाग से कभी कोई नाता नहीं रहा. उन्होंने कहा कि कुड़मियों के संबंध राजपरिवारों से भी रहे हैं. आजादी के बाद 1950 में उन्हें पिछड़ा वर्ग में डाला गया. तब इन्होंने विरोध नहीं किया.

पिछड़ों को 27 फीसदी आरक्षण का कुड़मियों ने किया स्वागत

पूर्व मंत्री ने कहा कि अब इनके दिमाग में आ गया है कि ये लोग पिछड़ा वर्ग से अलग हैं और आदिवासी हैं. उन्होंने कहा कि झारखंड में पेसा कानून लागू होने की बात हुई, तो इन्हीं लोगों ने इस बात का विरोध किया कि आदिवासी ही मुखिया बनेगा. 1932 के खतियान के आधार पर स्थानीय नीति और पिछड़ों को 27 फीसदी आरक्षण की घोषणा हुई, तो इन लोगों ने मिठाई बांटी थी. ये लोग दो नाव पर सवार हैं. इसे हम कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे.

Also Read: Kurmi Protest: झारखंड में कुड़मी आंदोलन से कई ट्रेनें रद्द, व्यापार प्रभावित, मांगों पर अड़े आंदोलनकारी
आदिवासियों से बिल्कुल अलग हैं कुड़मी

गीताश्री उरांव ने कहा कि जनजातीय शोध संस्थान (टीआरआई) ने वर्ष 2004 की अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि इनके गोत्र भी बिल्कुल अलग हैं. हमारा (आदिवासियों का) गोत्र प्रकृति से जुड़ा है, जबकि उनके गोत्र ऋषि-मुनियों और चांद-सितारों से जुड़े हैं. हम आदिवासियों के जो रीति-रिवाज हैं, उनके रीति-रिवाजों से बहुत भिन्न हैं. उनका जुड़ाव सनातनी हिंदुओं से बहुत ज्यादा है.

कुड़मियों का राजनीतिक षडयंत्र

गीताश्री उरांव ने कहा कि यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि कुड़मी कोई अलग जाति है, जो आदिवासियों से मिलती-जुलती है. वास्तविकता यह है कि कुड़मी ही कुरमी है. उन्होंने कहा कि झारखंड की कुरमी जाति झारखंड में खुद को डॉमिनेंट कास्ट के रूप में स्थापित करना चाहती है, जिसकी वजह से आदिवासी समुदाय एक बार फिर से शोषण और अत्याचार के भंवर जाल में फंसने वाला है. इस बार का अत्याचारी और शोषक बाहरी नहीं, बल्कि आपका पड़ोसी होगा और इसका दायरा शहर से निकलकर दूर-दराज के गांवों तक फैल जायेगा.

क्या होता है डॉमिनेंट कास्ट?

उन्होंने कहा कि यह जानना जरूरी है कि डॉमिनेंट कास्ट होता क्या है? कोई भी जाति जब अपने आर्थिक संसाधन और संख्या बल के दम पर पहले राजनीतिक दबदबा कायम करती है और उसके बाद सामाजिक व्यवस्था में अपना इको सिस्टम इस तरह तैयार करती है कि समाज के हर क्षेत्र में उसका प्रभुत्व कायम हो जाता है. बिहार-उत्तर प्रदेश में यादव और कुड़ीमी, महाराष्ट्र में मराठा (पाटील), गुजरात के पटवारी (पटेल), राजस्थान में गुर्जर और पंजाब-हरियाणा में जाट ने अपना प्रभुत्व कायम कर रखा है. झारखंड की कुड़मी जाति की महत्वकांक्षा वैसी ही है.

…तो आदिवासियों और सरना ईसाई की बर्बादी तय

गीताश्री उरांव ने कहा कि कुड़मी जाति कुड़मी के नाम से आदिवासी समुदाय में शामिल हो जाती है, तो झारखंड के तमाम आदिवासी वर्ग, चाहे वह उरांव, संथाल, हो, मुंडा खेरवार, चेरो या फिर सरना ईसाई हों, सभी की बर्बादी तय है. समस्त शौक्षणिक संस्थाओं, सरकारी नौकरियों और सरकार की सभी कल्याणकारी योजनाओं का बड़ा हिस्सा ये लोग हथिया लेंगे.

हाशिये पर चले जायेंगे आदिवासी

इतना ही नहीं, आदिवासियों के लिए आरक्षित मुखिया, विधायक और सांसद की सीटें भी धन, छल-प्रपंच, वोट कटवा डमी कैंडिडेट खड़ा करके और अपनी जातीय राजनीति के सहारे छीन लेंगे. इस तरह आदिवासी समुदाय पूरी तरह से हाशिये पर चल जायेगा. यही नहीं, गांवों में आदिवासियों को अपनी जमीन बचाना मुश्किल हो जायेगा. उन्होंने कहा कि दिलचस्प बात तो यह है कि इनका कुड़मी नाम से ओबीसी( OBC) का स्टेटस भी जारी रहेगा और आरक्षण समेत तमाम कल्याणकारी योजनाओं का लाभ वे लेते रहेंगे.

आरक्षण और कल्याणकारी योजनाएं हथिया लेंगे कुड़मी

गीताश्री उरांव ने कहा कि इसका मतलब यह हुआ कि एक ही जाति कुड़मी (आदिवासी) और कुरमी (पिछड़ी जाति) के नाम से आरक्षण और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं को हथिया लेंगे. यह आदिवासियों ही नहीं, अन्य पिछड़ी जातियों (अहिर, वैश्य, कोईरी, तेली) के लिए भी घातक है.

22 विधानसभा क्षेत्र में निर्णायक वोटर हैं कुड़मी

उन्होंने कहा कि झारखंड की 22 विधानसभा सीटों पर कुड़मी निर्णायक वोटर हैं. कल्पना करें, अगर कुड़मी के नाम से आदिवासियों के लिए आरक्षित सीटों से विधायक बनते हैं, तो झारखंड विधानसभा में एक ही जाति का बोलबाला हो जायेगा. झारखंड में कुड़ीमी ही एकमात्र जाति है, जो जातीय राजनीति करती है. जातीय हित के मुद्दे पर सभी दलों के कुड़मी नेता अपनी-अपनी पार्टी के एजेंडा को दरकिनार कर सब एक हो जाते हैं. ऐसे में मुख्यमंत्री भी इन्हीं का बन जायेगा, जो स्वस्थ्य लोकतंत्र के लिए घातक है. कहा कि आदिवासियों के इस संघर्ष में सभी गैर-कुड़मी जातियों को उसका साथ देना चाहिए. नहीं, तो झारखंड राज्य की बर्बादी निश्चित है.

रिपोर्ट- राहुल गुरु

विज्ञापन
Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola