स्वीकार नहीं करेगी माँ

By Prabhat Khabar Digital Desk
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स्वीकार नहीं करेगी माँ


-विनय सौरभ-

स्वीकार नहीं करेगी माँ कभी कि

मंदिर की सीढ़ियाँ चढ़ते हुए भी
उसने ईश्वर से ज्यादा मेरे बारे में सोचा
नहीं स्वीकार करेगी कभी
कि मेरे शहर से लौटने तक प्रार्थना में क्यों जुटी रहती थी वह
हर आहट में मेरे मौजूद होने का अहसास क्यों बना रहता था उसके मन में
माँ कभी नहीं मानेगी कि उसने मुझे सागर सा स्नेह. दिया
और आँखों की कोरों में काजल डालकर दुनिया के सारे अपशकुनों से मुक्त रखने की कोशिश में जुटी रही
एक ताबीज़ में बंद रखा सारी बाधाओं को मेरे लिए.!
वह हँस देगी और ना में सिर हिलाएगी
जब मैं कहूँगा-
कि मेरी सारी कविताएँ
तुमसे ही जन्म लेती हैं !
माँ धरती की ओर इशारा करेगी ऐसे में
और अपने अनपढ़ होने का पूरा प्रमाण देगी।
परिचय- विनय सौरभ झारखंड के युवा साहित्यकार हैं. इनका जन्म 22 जुलाई 1972 को संथाल परगना के एक गाँव ‘नोनीहाट’ में हुआ है. वर्तमान में वे दुमका में कार्यरत हैं. इन्होंने टी एन बी कालेज, भागलपुर से बीए और IIMC नयी दिल्ली से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा‌ किया है. इनकी कविताएं देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं. ‘मदर्स डे’ के मौके पर इन्होंने अपने फेसबुक वॉल पर हंस में प्रकाशित अपनी कविताएं शेयर की हैं-
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