कौन हैं सिबी जॉर्ज, जिन्होंने नॉर्वे में भारत का पक्ष जोरदार तरीके से रखा

Published by : Rajneesh Anand Updated At : 19 May 2026 5:26 PM

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सिबी जॉर्ज

Sibi George: हम दुनिया की कुल आबादी का छठा हिस्सा हैं, लेकिन दुनिया की समस्याओं का छठा हिस्सा नहीं हैं. हमारे पास एक संविधान है जो लोगों को उनके बुनियादी अधिकारों की गारंटी देता है. हमने महिलाओं को बराबरी का हक दिया है. हमने उन्हें उस वक्त वोटिंग राइट्‌स दिया, जिस वक्त कई विकसित देशों ने नहीं दिया था. इसकी वजह यह है कि हम ह्यूमन राइट्‌स में विश्वास करते हैं. हमारे देश में सरकारें चुनकर आती हैं, हम समानता में विश्वास करते हैं और जिन्हें यह लगता है कि उनके अधिकारों का हनन हो रहा है, वे कोर्ट जा सकते हैं. भारत के बारे में यह जोरदार टिप्पणी वरिष्ठ भारतीय राजनयिक सिबी जॉर्ज ने तब की, जब नॉर्वे में प्रेस ब्रीफिंग के दौरान उनकी तीखी बहस एक पत्रकार से हुई.

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Sibi George: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय यूरोप के डिप्लोमैटिक दौरे पर हैं. नॉर्वे की यात्रा से पहले पीएम मोदी यूनाइटेड अरब अमीरात, नीदरलैंड्स और स्वीडन का दौरा कर चुके हैं.पीएम की नॉर्वे यात्रा ने लोगों का ध्यान तब खिंचा जब भारत और नॉर्वे की ज्वाइंट प्रेस ब्रीफिंग के बाद पीएम मोदी वहां से निकलने लगे तो एक पत्रकार ने उनसे सवाल लेने को कहा, लेकिन पीएम मोदी वहां से चले गए. नॉर्वे की उस महिला पत्रकार ने एक्स पर एक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का वीडियो शेयर किया, जिसमें वे ज्वाइंट ब्रीफिंग के बाद जाते हुए दिख रहे हैं.

इस वीडियो पर महिला पत्रकार ने लिखा- नॉर्वे वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में पहले नंबर पर है जबकि भारत बहुत नीचे है. इस घटना के बाद सीनियर भारतीय डिप्लोमैट सिबी जॉर्ज खासा चर्चा में है. इसकी वजह यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नॉर्वे दौरे पर विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग के दौरान नॉर्वे के एक पत्रकार के साथ उनकी तीखी बहस हो गई. इस बहस के दौरान सिबी जॉर्ज ने भारतीय डेमोक्रेसी, ह्यूमन राइट्स और प्रेस फ्रीडम पर भारत की जोरदार वकालत की.

कौन हैं सिबी जॉर्ज?

सिबी जॉर्ज वर्तमान समय में विदेश मंत्रालय में सेक्रेटरी (वेस्ट) के तौर पर काम कर रहे हैं. साथ ही वे यूरोप, पश्चिम एशिया और मल्टीलेटरल फोरम के देशों के साथ भारत के रिश्तों को देख रहे हैं. वे 1993 बैच के IFS ऑफिसर हैं. वे जापान, स्विट्जरलैंड, द होली सी, लिचेंस्टीन और कुवैत में पहले राजदूत रहे हैं. उन्होंने रियाद, तेहरान, इस्लामाबाद, वाशिंगटन, दोहा और काहिरा में भी सेवा दी है. जॉर्ज ने अपना डिप्लोमैटिक करियर काहिरा में शुरू किया और बाद में दोहा, इस्लामाबाद और वाशिंगटन डीसी में कार्यरत रहे. मूलत: केरल के कोट्टायम जिले के रहने वाले सिबी जॉर्ज ग्रेजुएशन और पोस्ट-ग्रेजुएशन दोनों में गोल्ड मेडलिस्ट हैं. उन्होंने IIM अहमदाबाद और इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस जैसे इंस्टीट्यूशन से ट्रेनिंग ली है. 2014 में, उन्हें इंडियन फॉरेन सर्विस में एक्सीलेंस के लिए विदेश मंत्रालय ने पुरस्कार भी दिया है.

प्रेस ब्रीफिंग में क्यों हुआ तनाव

नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में प्रेस ब्रीफिंग के दौरान, नॉर्वे की पत्रकार ने पूछा कि दुनिया को भारत पर भरोसा क्यों करना चाहिए? साथ ही यह भी पूछा गया कि भारत में ह्यूमन राइट्स से जुड़ी जो चिंताएं हैं, उन्हें भारत सरकार कब दूर करेगी. यह सवाल भी किया कि पीएम मोदी मीडिया से जरूरी सवाल लेना कब शुरू करेंगे. इन सवालों का सिबी जॉर्ज ने मजबूती से जवाब दिया और कहा कि भारत कि सभ्यता 5,000 साल पुरानी है और हमने हमेशा मानवाधिकारों का सम्मान किया है. सिबी जॉर्ज ने कहा कि हमारे देश में एक मजबूत लोकतंत्र है और हमारे देश में एक मजबूत संविधान है. हम समानता में विश्वास करते हैं. हमने वैश्विक संकट के दौरान विश्व का साथ दिया है.जब उनके जवाब के दौरान उन्हें टोका गया तो जॉर्ज ने एक बार कहा, आप सवाल पूछें, मुझसे किसी खास तरीके से जवाब देने के लिए न कहें.

आलोचना और तारीफ का दौर जारी

नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में ज्वाइंट ब्रीफिंग के बाद पत्रकारों के सवालों का जवाब ना लेने पर उनकी आलोचना और तारीफ दोनों हो रही है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पत्रकार हेले लिंग के पोस्ट को शेयर करते हुए यह लिखा है कि जब कुछ छिपाने को नहीं होता है, तो डरने की जरूरत नहीं होती है. भारत की इमेज का क्या होता है जब दुनिया देखती है कि एक कॉम्प्रोमाइज़्ड पीएम कुछ सवालों से घबरा जाता है और भाग जाता है? सोशल मीडिया में जारी बहस में भी यह कहा जा रहा है कि पीएम मोदी को सवाल ले लेना चाहिए, वहीं कुछ लोग पीएम मोदी के स्टैंड के साथ हैं.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

राजनीति,सामाजिक, इतिहास, खेल और महिला संबंधी विषयों पर गहन लेखन किया है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में रुचि. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक. IM4Change, झारखंड सरकार तथा सेव द चिल्ड्रन के फेलो के रूप में कार्य किया है. पत्रकारिता के प्रति जुनून है. प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव.

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