अमेरिका में भी संविधान बचाने के लिए प्रदर्शन, जानिए क्यों लगे ‘नो किंग्स डे’ के नारे; ट्रंप को बताया तानाशाह

Edited by Rajneesh Anand
Updated:
विज्ञापन

अमेरिका में संविधान बचाने के लिए प्रदर्शन

Presidents Day : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव जीतने के बाद से कई ऐसे फैसले लिए हैं, जिनकी वजह से पूरे देश में उनके खिलाफ माहौल बन रहा था और लोगों का गुस्सा प्रेसिडेंट डे के दिन फूट गया, जब लोग सड़कों पर उतरे और ट्रंप–मस्क के खिलाफ प्रदर्शन किया. अमेरिकियों ने ट्रंप को तानाशाह तक करार दिया.

विज्ञापन

Presidents Day : अमेरिका में प्रेसिडेंट डे पर छुट्टी रहती है और देशवासी अपने राष्ट्रपतियों को याद करके उनके कार्यों के लिए एक तरह से उनका शुक्रिया अदा करते हैं.  प्रेसिडेंट डे अमेरिका के राष्ट्रपतियों को समर्पित दिवस है, ऐसे में इस दिन अगर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को आम जनता के विरोध का सामना करना पड़ रहा है, तो यह आश्चर्यजनक बात है. अमेरिका के इतिहास में प्रेसिडेंट डे के दिन इस तरह का विरोध प्रदर्शन कभी नहीं हुआ था.    

 प्रेसिडेंट डे पर डोनाल्ड ट्रंप का विरोध

अमेरिका में इस बार प्रेसिडेंट डे पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का जोरदार विरोध हुआ. अमेरिकियों ने प्रसिडेंट ट्रंप के खिलाफ किए गए विरोध को ‘नो किंग्स डे’ का नाम दिया. इस प्रदर्शन को 50501 मूवमेंट का नाम दिया गया है. इस मूवमेंट का अर्थ है 50 प्रदर्शन, 50 राज्य, 1 मूवमेंट. पीएनआर में छपी खबर के अनुसार अमेरिकी अपने राष्ट्रपति के असंवैधानिक कार्यों से नाराज हैं और वे अपने राष्ट्रपति को यह बताना चाहते हैं कि अमेरिका में लोकतंत्र की जगह राजतंत्र कायम नहीं किया जा सकता है. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि डोनाल्ड ट्रंप और उनके सहयोगी एलन मस्क ने सत्ता को हथिया लिया है और वे देश में संघीय व्यवस्था और सरकार को खत्म करने में लगे हैं. प्रदर्शन के लिए आम लोगों ने राज्य की राजधानियों को चुना और वे वहां मस्क की कंपनी द्वारा निर्मित कार टेस्ला पर सवार होकर पहुंचे. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि ट्रंप और मस्क के नेतृत्व में अब अमेरिका एक गंभीर देश नहीं रहा. प्रदर्शनकारियों ने ट्रंप को हटाओ, मस्क को हटाओ जैसे नारे भी लगाए. प्रद़र्शनकारियों ने ट्रंप को तानाशाह बताया और कहा कि वे देशभक्त हैं, कायरों की तरह ट्रंप के आगे नहीं झुकेंगे.

अमेरिकियों में ट्रंप और मस्क को लेकर क्यों है नाराजगी

Protest against Trump and Musk
ट्रंप और मस्क से नाराज लोग सड़क पर उतरे

डोनाल्ड ट्रंप जबसे राष्ट्रपति बने हैं, उनकी नीतियां विवादों में आ गई हैं. उन्होंने अमेरिका फर्स्ट का नारा दिया और इसके लिए उन्होंने अमेरिका में जन्म आधारित नागरिकता को समाप्त करने की बात की. उन्होंने अप्रवासियों को वापस उनके देश भेजना शुरू किया. नौकरशाही पर लगाम कसने के लिए उन्होंने DOGE (Department of Government Efficiency ) की कमान अमेरिका के प्रमुख पूंजीपति एलन मस्क को सौंप दी है. एलन मस्क ने नौकरशाही पर लगाम कसने के लिए अबतक संघीय व्यवस्था के नौ हजार से अधिक लोगों की छुट्टी कर दी है. थर्ड जेंडर की पहचान खत्म करने और इस लिंग को मान्यता नहीं देने के फैसले से भी अमेरिकियों में नाराजगी है और वे इसे डोनाल्ड ट्रंप की तानाशाही मान रहे हैं. डोनाल्ड ट्रंप और एलन मस्क ने मिलकर कई एजेंसियों को भी बंद कर दिया, जिसकी वजह से उसमें काम करने वाले कई हजार लोग बेरोजगार हो गए हैं और उनका परिवार भी इस निर्णय से प्रभावित हुआ है. प्रदर्शनकारियों ने इस मामले में कांग्रेस से दखल देने की मांग की है. यही वजह है कि अमेरिकियों ने प्रेसिडेंट डे के दिन डोनाल्ड ट्रंप और उनके करीबी एलन मस्क का विरोध किया.

इसे भी पढ़ें : Mughal Harem Stories : मुगल हरम की दीवारों से कितनी ही रानियों की चीत्कार टकरा कर खो गई, कई चाहतें हुईं दफन

2050 : दुनिया में सबसे अधिक मुसलमान भारत में होंगे, इतनी होगी अलग-अलग धर्मों के मानने वालों की आबादी

विभिन्न विषयों पर एक्सप्लेनर पढ़ने के लिए क्लिक करें

क्या है DOGE?

सरकारी दक्षता विभाग यानी Department of Government Efficiency का गठन डोनाल्ड ट्रंप ने किया है. यह विभाग एक आयोग की तरह काम कर रहा है और इसका अध्यक्ष एलन मस्क को बनाया गया है. इस सलाहकार संस्था का काम अमेरिका को नौकरशाही से मुक्ति दिलाना और खर्चों में कटौती करना है. डोगे का गठन कांग्रेस द्वारा नहीं हुआ है, यह राष्ट्रपति ट्रंप का एक कार्यकारी आदेश है.

अमेरिका में क्या है प्रेसिडेंट डे?

अमेरिका में प्रेसिडेंट डे एक उत्सव है. यह दिवस अमेरिका के दो महान राष्ट्रपतियों को समर्पित है. प्रेसिडेंट डे फरवरी माह के तीसरे सोमवार को प्रतिवर्ष मनाया जाता है. अमेरिका के पहले राष्ट्रपति जाॅर्ज वाशिंगटन का जन्मदिन 22 फरवरी को मनाया जाता है, जबकि वहां के महान राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन का जन्मदिन 12 फरवरी को मनाया जाता है. इन दोनों राष्ट्रपतियों को समर्पित यह दिवस अमेरिकियों के लिए गौरव दिवस है, जिस दिन वे अपने दो महान व्यक्तित्व को याद करते हैं, जिन्होंने देश के निर्माण में अहम योगदान दिया.

इसे भी पढ़ें :  सवसार से सरना धर्म कोड तक, जानें क्या है मुंडा समाज में धर्म के मायने

विज्ञापन
Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola