PGI 2.0 Report : लर्निंग और इक्विटी में बेहतर, मगर खराब इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण पिछड़ रहा बिहार

Updated:
विज्ञापन
बिहार PGI 2.0: इंफ्रा नहीं, फिर भी शिक्षा में सुधार

बिहार में शिक्षा: सुधार और चुनौतियों की पूरी तस्वीर (फोटो: AI जनरेटेड)

बिहार के स्कूलों में छत, शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, फिर भी PGI 2.0 रिपोर्ट में राज्य की शिक्षा व्यवस्था उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन कर रही है...

विज्ञापन

Bihar PGI 2.0 Report : कल्पना कीजिए, आप एक ऐसे स्कूल के सामने खड़े हैं जिसकी छत नहीं है...वहीं पास में एक और स्कूल है, जो जर्जर हो चुका है. उसकी दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें हैं...कुछ दूर पर वहां एक स्कूल ऐसा भी है जो सिर्फ एक कमरे में चल रहा है.. ऐसे में शौचालय और दूसरी जरूरी सुविधाओं की कल्पना करने के लिए मैं आपको कह भी नहीं सकता...इन तस्वीरों को देखकर आपका पहला निष्कर्ष यही होगा कि यहां शिक्षा का स्तर भी बेहद खराब होगा. आखिर बुनियादी सुविधाओं के बिना अच्छी पढ़ाई कैसे संभव है? बच्चे कितना सीख पाते होंगे? दृश्य देखकर किसी की भी यह राय हो सकती है. अगर यही आपकी धारणा है, तो बिहार आपको चौंका सकता है.

सीमित संसाधनों में ही बिहार कर रहा बेहतर प्रदर्शन

बिहार की पहचान अक्सर बदहाल स्कूलों और कमजोर शिक्षा व्यवस्था की तस्वीरों से बनाई जाती है. खबरों की सुर्खियों में रहने वाले इन दावों में सच्चाई तो है, लेकिन इन तस्वीरों के पीछे एक ऐसी हकीकत भी है, जो कम ही सामने आती है. क्योंकि सच्चाई ये है कि जिस राज्य के स्कूलों में छत, कमरे, शौचालय और दूसरी बुनियादी सुविधाओं का संकट बना हुआ है, वहीं के बच्चे सीखने की क्षमता के मामले में उम्मीद से कहीं बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं. यह विरोधाभास इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बिहार की शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा अक्सर जर्जर भवनों, शिक्षकों की कमी और आधारभूत ढांचे की खामियों तक ही सीमित रह जाती है. ऐसा हम नहीं, केंद्र सरकार की परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) 2.0 रिपोर्ट कह रही है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि बिहार की शिक्षा व्यवस्था में समस्याएं नहीं हैं. बुनियादी ढांचे की कमी आज भी एक बड़ी चुनौती है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

टपकती छतों से उम्मीद की नई इबारत

केंद्र सरकार की नई PGI 2.0 रिपोर्ट में बिहार की शिक्षा व्यवस्था को लेकर जो दावे हैं, वो पूरानी धारणाओं के बीच नई उम्मीद जगाती हैं. रिपोर्ट में राज्य के प्रदर्शन में सुधार दर्ज किया गया है, हालांकि कई गंभीर चुनौतियां अब भी कायम हैं. आइए समझते हैं कि रिपोर्ट बिहार के बारे में क्या कहती है. यह किन मानकों पर तैयार होती है और इसमें दर्ज आंकड़े भविष्य के लिए क्या संकेत देते हैं. अंत में यह भी समझेंगे कि यह रिपोर्ट सरकार के लिए क्यों चिंता का सबब है.

  • बिहार के बारे में क्या कहती है PGI 2.0 रिपोर्ट...

PGI 2.0 रिपोर्ट के अनुसार बिहार की स्कूली शिक्षा व्यवस्था धीरे-धीरे सही दिशा में बढ़ रही है. 2025-26 के लिए जारी इस रिपोर्ट में राज्य को 564.8 अंक मिले हैं और उसे Akanshi-1 ग्रेड दिया गया है. पिछले वर्ष की तुलना में यह 57.8 अंक बढ़ा है. 2024-25 में यह स्कोर 507 था. राज्य के मामले में सबसे अधिक राहत देने वाली तस्वीर इक्विटी (समानता) की है. यहां बिहार ने 260 में 221.5 अंक हासिल कर Uttam-1 ग्रेड प्राप्त किया. जिसका अर्थ हुआ कि लड़के-लड़कियों, ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों और अलग-अलग सामाजिक वर्गों के विद्यार्थियों के बीच प्रदर्शन का अंतर पहले की तुलना में कम हुआ है. शिक्षा तक पहुंच और शिक्षकों के प्रशिक्षण के मामले में भी राज्य ने बेहतर प्रदर्शन किया है. एक्सेस टू एजुकेशन में बिहार को 54.7/80 और टीचर एजुकेशन एंड ट्रेनिंग में 67/100 अंक मिले. दोनों श्रेणियों में राज्य को Uttam-3 ग्रेड दिया गया है.हालांकि तस्वीर का दूसरा पहलू भी है.

Image

लर्निंग आउटकम्स में बिहार को 240 में 81.9 अंक मिले हैं, इसके बावजूद इस श्रेणी में बिहार ने कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात और उत्तराखंड जैसे राज्यों से बेहतर प्रदर्शन किया है. रिपोर्ट बताती है कि कक्षा 3, 6 और 9 के बच्चों की भाषा और गणित की बुनियादी समझ अभी और मजबूत करने की जरूरत है. जिस जगह बिहार सबसे ज्यादा पिछड़ा है, वह है इंफ्रास्ट्रक्चर एंड फैसिलिटीज. इस श्रेणी में राज्य को 190 में सिर्फ 64.8 अंक मिले. रिपोर्ट में कहा गया है कि स्कूलों में आईसीटी लैब, स्मार्ट क्लासरूम और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) के लिए जरूरी सुविधाओं की कमी है.

प्रभात खबर की पड़ताल पर रिपोर्ट की मुहर

प्रभात खबर डिजिटल की इन जमीनी रिपोर्टों में आपने बिहार के सरकारी स्कूलों की तस्वीर देखी होगी..

(भवन बन गए, लेकिन रास्ता नहीं; खेतों की पगडंडियों से स्कूल पहुंचने को मजबूर बच्चे )

( मौत के साए में पढ़ रहे बच्चे, जर्जर स्कूल भवन से हर दिन हादसे का खतरा )

इन रिपोर्टों के जरिए हमने बिहार के सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत सामने रखी थी. लेकिन सवाल सिर्फ एक-दो स्कूलों का नहीं है. राज्य के कई सरकारी स्कूल आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं. अब केंद्र सरकार की PGI 2.0 रिपोर्ट भी इस ओर इशारा कर रही है कि कमजोर स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर का असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है. ऐसे में सवाल यह है कि जब जमीनी रिपोर्टें और सरकारी आकलन दोनों एक जैसी तस्वीर दिखा रहे हैं, तो बुनियादी समस्याओं का समाधान क्यों नहीं हो रहा ?

सरकार क्यों जारी करती परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स की रिपोर्ट

स्कूलों में सुबह-सुबह बजने वाली घंटियां, देश के करोड़ों बच्चों के भविष्य की शुरुआत करती हैं. भारत दुनिया की सबसे बड़ी स्कूली शिक्षा प्रणालियों में से एक है, जहां 14.67 लाख से अधिक स्कूल हैं, 1.03 करोड़ शिक्षक हैं और करीब 24.72 करोड़ छात्र हैं. इतनी बड़ी शिक्षा व्यवस्था होने के कारण यह जानना भी जरूरी है कि इसकी गुणवत्ता कैसी है ? किस राज्य के स्कूल बेहतर प्रदर्शन कर रहे और कहां सुधार की जरूरत है. इन्हीं सवालों का जवाब तलाशने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय हर साल परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) जारी करता है, जो देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर सामने लाती है.

हालांकि, यह किसी बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट नहीं है और न ही इसमें छात्रों को अंक दिए जाते हैं. यह दरअसल राज्यों और जिलों की पूरी स्कूल शिक्षा व्यवस्था का रिपोर्ट कार्ड है. यही वजह है कि इस में पारंपरिक रैंकिंग की बजाय राज्यों और जिलों को उनके प्रदर्शन के आधार पर अलग-अलग ग्रेड दिए जाते हैं. इसमें परखा जाता है कि क्या स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई का स्तर बेहतर हो रहा है, क्या हर बच्चे का स्कूल में नामांकन सुनिश्चित हो रहा है, क्या विद्यालयों में शौचालय, बिजली, पीने का स्वच्छ पानी और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं, क्या शिक्षकों को नियमित प्रशिक्षण मिल रहा है और क्या केंद्र व राज्य सरकारों की शिक्षा संबंधी योजनाएं जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू हो रही हैं ? इन्हीं और कई मानकों पर राज्यों और जिलों का विस्तृत मूल्यांकन किया जाता है. दूसरे शब्दों में कहें तो PGI यह बताता है कि किसी राज्य की शिक्षा व्यवस्था सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी है. इसे और आसानी से समझने के लिए नीचे दी गई तस्वीर देखिए...

Image
Image
AI generated image

स्कूलों की इमारतें बेहतर हुईं, लेकिन क्या बच्चे बेहतर हो रहे..

मान लीजिए किसी स्कूल में नई इमारत बन गई है.. हर कमरे में बिजली है....साफ शौचालय हैं.. कंप्यूटर लैब है... स्मार्ट क्लास है... शिक्षक भी समय पर स्कूल आ रहे हैं और सरकारी योजनाएं भी ठीक से चल रही हैं...लेकिन क्या बच्चे पहले से बेहतर पढ़ और सीख भी रहे हैं? यही इस रिपोर्ट का सार है और सरकार के लिए चिंता का सबब. शिक्षा मंत्रालय की परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) 2.0 रिपोर्ट, पहली नजर में सकारात्मक दिखाई देती है. कई राज्यों ने स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं, शिक्षक प्रशिक्षण, प्रशासनिक व्यवस्था और डिजिटल शिक्षा में सुधार किया है. कई जगह स्कूलों की इमारतें बेहतर हुई हैं, बिजली, पानी, शौचालय और अन्य सुविधाएं बढ़ी हैं. ड्रॉपआउट दर में भी कमी दर्ज की गई है. लेकिन रिपोर्ट का जो सबसे महत्वपूर्ण संदेश है वो इससे अलग है.

रिपोर्ट में लर्निंग आउटकम (सीखने के परिणाम) और इक्विटी (समानता) को सबसे महत्वपूर्ण डोमेन माना गया है. रिपोर्ट के आंकड़ों से पता चलता है कि कई राज्यों में बुनियादी सुविधाएं बेहतर होने के बावजूद बच्चों के सीखने के स्तर में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है. यानी स्कूल बेहतर दिख रहे हैं, लेकिन सीखने की गुणवत्ता अभी भी सबसे बड़ी चुनौती है. कोई भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश अभी तक Utkarsh, Uttam-1 या Uttam-2 जैसी सबसे ऊंची तीन श्रेणियों तक नहीं पहुंच पाया है. इससे पता चलता है कि पूरे देश में स्कूल शिक्षा में अभी भी काफी सुधार की जरूरत है. हालांकि चंडीगढ़ सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला केंद्रशासित प्रदेश रहा और उसने सबसे अधिक अंक हासिल किए.

ये भी पढ़ें : सतलुज विवाद :127 कट्स,तीन बार बदला नाम,30 साल पहले लापता बैंक कर्मचारी की कहानी 48 घंटे में गायब




विज्ञापन
Gautam Kumar

लेखक के बारे में

By Gautam Kumar

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन