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Nabanna Abhiyan : सड़क पर छात्र समाज, महिलाओं में दहशत, जनता कह रही-हमने गलत सरकार को चुन लिया

Updated at : 27 Aug 2024 5:39 PM (IST)
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Nabanna Abhiyan

Nabanna Abhiyan

Nabanna Abhiyan : कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में जूनियर डाॅक्टर के साथ जिस तरह की हैवानियत की गई, उसके बाद से पूरा देश सकते में है और महिला सुरक्षा पर बात हो रही है. प्रधानमंत्री ने भी महिला सुरक्षा पर बात की और कहा है कि इसपर कोई समझौता नहीं किया जा सकता है. महिला सुरक्षा और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफे की मांग को लेकर छात्र समाज सड़क पर है, लोकल ट्रेन में चर्चा हो रही कि सरकार को क्या करना चाहिए. कोलकाता डाॅक्टर मर्डर केस का प्रदेश पर क्या है असर, जानने के लिए पढ़ें यह आलेख

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Nabanna Abhiyan : दृश्य 1 : कोलकाता का लोकल ट्रेन, जिसे यहां की लाइफ लाइन भी माना जाता है. शाम का वक्त और अपने काम से लौटते आम लोग. एक महिला कहती है-मैंने अपने ऑफिस में कह दिया है, मैं अब देर रात काम नहीं कर सकती. मुझे किसी भी तरह नौ बजे तक अपने घर पहुंचना है. बाकी का काम मैं घर से कर दूंगी. अगर आपको यह ठीक नहीं लगता है तो मैं काम छोड़ने के लिए तैयार हूं. 

दूसरी महिला -अब तो शाम को घर से बाहर जाने में डर लगता है. पता नहीं कौन किस नजर से देख रहा है और कब क्या कर दें, किसी पर भी विश्वास करना मुश्किल है. मैंने तो अपनी मेय (लड़की) को कह दिया है शाम होते ही घर लौटो, बाहर रहने की जरूरत नहीं.

तीसरी महिला -हमने गलत सरकार चुन ली, जो महिला को सुरक्षा नहीं दे पा रही है. इस बार चुनाव होगा तो हम लक्ष्मी भंडार योजना के झांसे में नहीं आएंगे. चाहे योजना की राशि दोगुनी ही क्यों ना कर दी जाए, हम ममता बनर्जी को वोट नहीं देंगे.

दृश्य 2 : कोलकाता का मेट्रो स्टेशन : ट्रेन के लिए आपाधापी के बीच आम जनता यह कह रही है, यह सरकार बेकार है. आम जनता सुरक्षित नहीं है. नबान्न अभियान करने वालों पर लाठीचार्ज हो रहा है और महिला की जान लेने वाले अबतक जेल से बाहर हैं. कोई कह रहा है इस बार के चुनाव में गलती नहीं होगी.

दृश्य 3 : बंगाल के वर्द्धमान जंक्शन पर एक महिला से उसकी बच्ची कुछ देर के लिए अलग हो जाती है, तो महिला चीख-पुकार शुरू कर देती है, क्योंकि वह कोलकाता की घटना से डरी हुई है और अपनी जवान होती बेटी की सुरक्षा का डर उसे सता रहा था. हालांकि उसे अपनी बच्ची सुरक्षित मिल जाती है, लेकिन आम जनता दहशत में है. यह तमाम बातचीत बांग्ला भाषा में की गई है, लेकिन समझाने के लिए इसे हमने हिंदी में अनुवाद करके लिखा है.

यह कुछ उदाहरण हैं जिनके जरिए यह समझा जा सकता है कि कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में जूनियर डाॅक्टर के साथ जिस तरह की दरिंदगी हुई उसके बाद वहां कैसा माहौल है और आम जनता इसपर क्या सोचती है और कैसे रिएक्ट कर रही है. जूनियर डाॅक्टर के साथ हुई हैवानियत का विरोध करने के लिए  कोलकाता में छात्रों का एक संगठन पश्चिम बंग छात्र समाज सड़क पर उतरा है और नबान्न अभियान की शुरुआत की है. छात्र समाज का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य आरजी कर अस्पताल में दरिंदगी का शिकार हुई जूनियर डाॅक्टर को न्याय दिलाना है. छात्र समाज यह मांग कर रहा है प्रदेश की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस्तीफा दें और दोषी को मृत्युदंड मिले. लेकिन कोलकाता पुलिस ने इस अभियान को गैरकानूनी बताते हुए छात्र समाज पर लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े. हावड़ा ब्रिज को बंद कर दिया गया, ताकि छात्र आगे ना बढ़ सकें. पुलिस और छात्र समाज के बीच झड़प हो रही है और बैरिकेडिंग तोड़े जा रहे हैं, हालांकि छात्र समाज की ओर से यह कहा गया था कि उनका प्रदर्शन शांतिपूर्ण होगा, लेकिन पुलिस पर पथराव की सूचना भी है. 

आखिर सड़क पर क्यों हैं छात्र?

हावड़ा ब्रिज पर प्रदर्शन करते पश्चिम बंग छात्र समाज के सदस्य

कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में ऑन ड्यूटी डाॅक्टर के साथ पहले दुष्कर्म और फिर उसकी हत्या के बाद आम जनता में गुस्सा है. आम लोगों के मन में यह सवाल है कि आखिर इतनी दरिंदगी करने के बाद भी दोषी पर अबतक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई है. घटना जब सामने आई तब भी दोषी संजय राॅय को बचाने की कोशिश की गई. अविलंब कार्रवाई नहीं हुई. अस्पताल में जहां डाॅक्टर की हत्या हुई वहां सबूतों से छेड़छाड़ हुई. प्रदेश की महिला मुख्यमंत्री ने भी इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया. वे विरोध प्रदर्शन में शामिल हुईं जबकि वहां उनकी सरकार थी और उन्हें कार्रवाई करनी चाहिए थी. मीडिया में आने के बाद जब मामला बहुत बड़ा हो गया और जांच सीबीआई को सौंपी गई और सुप्रीम कोर्ट ने भी स्वत: मामले का संज्ञान लिया तो लोगों का आक्रोश और बढ़ा. आम जनता यह चाहती है कि दोषी को सजा मिले, ताकि इस तरह की घटनाएं समाज का हिस्सा ना बने. 

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कोलकाता डाॅक्टर मर्डर केस की जांच में अबतक क्या हुआ

अबतक जो जांच हुई है उसमें दुष्कर्म का आरोपी संजय राॅय गिरफ्तार हुआ है. अस्पताल के प्रिंसिपल संदीप घोष से भी सीबीआई ने लगातार पूछताछ की, लेकिन उसके खिलाफ भी कोई ठोस बात सामने नहीं आई है कि उसकी कोई भूमिका जूनियर डाॅक्टर के साथ दुष्कर्म मामले में थी या नहीं? सीबीआई ने एफआईआर में वित्तीय अनियमितता की बात कही है. संजय राॅय सहित और संदीप घोष की पाॅलीग्राफी टेस्ट हो चुकी है, लेकिन इस टेस्ट में हुआ क्या यह अबतक पता नहीं चला है. जूनियर डाॅक्टर के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ या फिर वह किसी एक व्यक्ति की दरिंगदी का शिकार हुई, यह भी अबतक पता नहीं चल पाया है और महिला सुरक्षा का मुद्दा प्रदेश में गरमाया हुआ है, इसी वजह से छात्र सड़क पर हैं.

पश्चिम बंग छात्र समाज की भूमिका सवालों के घेरे में क्यों है?

पश्चिम बंग छात्र समाज छात्रों का एक नया संगठन है, जिसका कोई रिजस्ट्रेशन नहीं है, हालांकि संगठन का यह दावा है कि वह एक गैर राजनीतिक संगठन है और उसका किसी भी राजनीति दल से कोई संबंध नहीं है. छात्र संगठन द्वारा आयोजित प्रेस काॅन्फ्रेंस में यह स्पष्ट किया गया कि छात्र समाज में विभिन्न विश्वविद्यालय के जागरूक छात्र-छात्राएं शामिल हैं. छात्र समाज का बीजेपी और आरएसएस से कोई सरोकार नहीं है. जूनियर डाॅक्टर को न्याय दिलाने के लिए नबान्न अभियान आयोजित किया गया है, जो विभिन्न स्थानों से शुरू होकर नबान्न पहुंचेगा. वही पुलिस का दावा है कि यह संगठन रजिस्टर्ड नहीं है और इसके राजनीतिक उद्देश्य है. आज यूजीसी-नेट की परीक्षा भी है इसलिए पुलिस ने नबान्न अभियान को गैरकानूनी बताया है और इसे रोकने के लिए कोलकात में विभिन्न स्थानों पर छह हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं.

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FAQ : नबान्न अभियान क्यों आयोजित किया गया ?

कोलकाता में जूनियर डाॅक्टर की दुष्कर्म के बाद हत्या का विरोध करने और न्याय की मांग के लिए पश्चिम बंग छात्र समाज ने नबान्न अभियान आयोजित किया था.

नबान्न अभियान कब आयोजित किया गया?

नबान्न अभियान 27 अगस्त 2024 को कोलकाता में आयोजित किया गया.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

राजनीति,सामाजिक, इतिहास, खेल और महिला संबंधी विषयों पर गहन लेखन किया है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में रुचि. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक. IM4Change, झारखंड सरकार तथा सेव द चिल्ड्रन के फेलो के रूप में कार्य किया है. पत्रकारिता के प्रति जुनून है. प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव.

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