सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा की लैंड डील कैंसिल करने वाले IAS अशोक खेमका हुए रिटायर, एक्स पर मांगी माफी

Published by : Rajneesh Anand Updated At : 01 May 2025 2:43 PM

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अशोक खेमका हुए रिटायर

IAS Officer Ashok Khemka : 34 साल की नौकरी में 57 ट्रांसफर. यह एक ईमानदार आईएएस अशोक खेमका की पूरी सेवा का लेखा-जोखा है. ईमानदारी का अपमान, सीधे पेड़ को पहले काटा जाता है, जैसे शब्दों से अपनी निराश व्यक्त करने वाले 1991 बैच के आईएएस अधिकारी अशोख खेमका बुधवार को रिटायर हो गए. उनके रिटायरमेंट के साथ ही उस युग का भी अंत हुआ, जिसकी शुरुआत अशोक खेमका ने भ्रष्टाचार को रोकने के लिए की थी. वे भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सशक्त आवाज थे. उन्होंने अपमान और सजा की परवाह किए बिना भ्रष्टाचार के खिलाफ एक्शन लिया और कांग्रेस नेत्री सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा को कठघरे में खड़ा कर दिया था. उनके सेवाकाल से और भी कई विवाद जुड़े रहे हैं.

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IAS Officer Ashok Khemka : आज मेरा IAS करियर पूरा हुआ. अपने परिवार, सहकर्मियों और सभी शुभचिंतकों का शुक्रिया, जिनके अटूट समर्थन के बिना यह सफर संभव नहीं हो पाता. अगर इस सफर के दौरान मेरी वजह से किसी को ठेस पहुंची हो, तो मैं माफी चाहता हूं. यह शब्द हैं भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी रहे अशोक खेमका का, जो बुधवार को रिटायर हो गए हैं. किसी अधिकारी का रिटायर होना इतनी बड़ी बात नहीं हैं कि हर किसी का ध्यान उसपर जाए, लेकिन अशोक खेमका एक ऐसी शख्सियत हैं, जिनपर देश के जागरूक नागरिकों का ध्यान रहता है.

कौन हैं अशोक खेमका और किस वजह से रहे चर्चा में?

अशोक खेमका 1991 बैच के आईएएस अधिकारी थे.उनका कैडर हरियाणा था. उनकी छवि ने उन्होंने चर्चाओं के केंद्र में रखा. वे एक साफ छवि के भ्रष्टाचार विरोधी अधिकारी थे, जिसकी वजह से उन्हे अपने 34 साल के करियर में 57 ट्रांसफर झेलने पड़े. उनकी अंतिम पोस्टिंग हरियाणा के परिवहन विभाग में थी, जहां वे एडिशनल चीफ सेक्रेटरी थे और उसी पद पर रहते वे रिटायर हुए हैं. प्रभावशाली व्यक्तित्व के मालिक अशोक खेमका का जन्म कोलकाता में 30 अप्रैल 1965 को हुआ था. उन्होंने आईआईटी खड़गपुर से कंप्यूटर साइंस में बीटेक की पढ़ाई की थी और टीआईएफआर (Tata Institute of Fundamental Research) से पीएचडी किया था. उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से अपनी एलएलबी कंप्लीट की है. अशोक खेमका तब सबसे ज्यादा चर्चा में आए, जब उन्होंने कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा के जमीन का म्यूटेशन कैंसिल कर दिया था.

रॉबर्ट वाड्रा की जमीन का म्यूटेशन किया था कैंसिल

2012 में अशोक खेमका सबसे ज्यादा लाइम लाइट में आए, जब उन्होंने हरियाणा के लैंड रिकॉर्ड डिपार्टमेंट के डायरेक्टर के पद पर रहते हुए गुरुग्राम के शिकोहपुर गांव में रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी और रियल एस्टेट कंपनी DLF के बीच हुई 3.5 एकड़ लैंड डील के म्यूटेशन को रद्द कर दिया था. उनका यह कहना था यह म्यूटेशन गलत तरीके से हुआ है. म्यूटेशन को रद्द करने के पीछे कारण यह बताया गया था कि जिस व्यक्ति ने म्यूटेशन की स्वीकृति दी वह अधिकारी उस कार्य के लिए अधिकृत नहीं था. इसके अलावा वह भूमि चकबंदी अधिनियम (Consolidation Act) के तहत आती थी, जिसकी बिक्री और हस्तांतरण पर रोक था.चकबंदी अधिनियम हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में लागू एक भूमि सुधार कानून है, जिसका उद्देश्य कृषि योग्य भूमि के टुकड़े होने से बचाना है, ताकि कृषि को नुकसान ना हो.

म्यूटेशन कैंसिल होने के बाद कांग्रेस ने कर दिया था अशोक खेमका का ट्रांसफर

2012 में देश में कांग्रेस की सरकार थी और रॉबर्ट वाड्रा प्रियंका गांधी के पति और सोनिया गांधी के दामाद हैं. इस वजह से यह म्यूटेशन कैंसिल किए जाने का मसला खूब चर्चा में रहा. कांग्रेस ने जब खेमका का ट्रांसफर कर दिया, तो मामला और बड़ा हो गया और बीजेपी ने कांग्रेस सरकार के इस कदम की खूब आलोचना की. बीजेपी ने इसे वंशवाद की राजनीति से जोड़ा और 2014 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव में इसे मुद्दा बनाया, जिससे कांग्रेस को नुकसान हुआ. कांग्रेस का कहना था कि खेमका ने अपने अधिकारक्षेत्र से बाहर जाकर म्यूटेशन को रद्द किया और सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया. 2014 में जब बीजेपी की सरकार केंद्र में आई, तो इस मामले की जांच ढींगरा आयोग ने की और अगस्त 2016 में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी. इस रिपोर्ट में यह मांग की गई थी कि पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जांच की सिफारिश की थी, हालांकि यह रिपोर्ट हाईकोर्ट के आदेश की वजह से सार्वजनिक नहीं हो पाया था.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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