दिल्ली की सुल्तान रजिया को गुलाम याकूत से था इश्क, इसी वजह से छिन गई थी गद्दी

Published by : Rajneesh Anand Updated At : 02 Feb 2025 6:53 PM

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रजिया सुल्तान, एआई से बनाई गई तस्वीर

Delhi Elections : देश की राजधानी दिल्ली की सत्ता पर महिलाओं का दबदबा काफी पुराने समय से रहा है और यहां की दो सबसे शक्तिशाली मुख्यमंत्रियों में शीला दीक्षित और सुषमा स्वराज का नाम शुमार है. दिल्ली पर अभी भी एक महिला मुख्यमंत्री ही राज कर रही हैं. इतिहास में जाएं तो दिल्ली पर शासन करने वाली पहली शासक रजिया सुल्तान थीं जो गुलाम वंश की तीसरी शासक थीं.

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Delhi Elections : दिल्ली को देश का दिल कहा जाता है क्योंकि यह राष्ट्रीय राजधानी है. दिल्ली में 5 फरवरी को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है. अभी दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार है यहां की मुख्यमंत्री आतिशी हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि दिल्ली की स्थापना किसने की और पहली बार इसे राजधानी किसने बनाया था?

महाभारत काल से जुड़ा है दिल्ली का इतिहास

कौरवों ने जब हस्तिनापुर का शासन पांडवों को देने से मना कर दिया था, तो युद्ध को टालने के लिए बंटवारा हुआ और पांडवों को खांडवप्रस्थ दे दिया गया था, जो उस समय घना जंगल और उजाड़ इलाका हुआ करता था. उसी खांडवप्रस्थ को पांडवों ने भगवान कृष्ण और विश्वकर्मा की मदद से इंद्रप्रस्थ बनाया था, जो उनकी राजधानी था. इंद्रप्रस्थ को बहुत ही खूबसूरती के साथ बसाया था. इंद्रप्रस्थ को ही आज की दिल्ली माना जाता है.

तोमर वंश के राजपूत राजा अनंगपाल ने पहली बार दिल्ली को बनाया राजधानी

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तोमर वंश के राजपूत राजा अनंगपाल. एआई से बनाई गई तस्वीर

ऐतिहासिक साक्ष्यों की बात करें तो कुछ इतिहासकार यह मानते हैं कि दिल्ली को 50ईपू मौर्य शासन काल में बसाया गया था और कुछ इतिहासकार यह मानते हैं कि दिल्ली को तोमर वंश के राजपूत राजा अनंगपाल ने बसाया था और उसी ने पहली बार दिल्ली को अपनी राजधानी बनाया. दिल्ली के शासक पृथ्वीराज चौहान के दरबारी कवि चंदबरदाई ने ‘पृथ्वीराज रासो’ में तोमर राजा अनंगपाल को दिल्ली का संस्थापक बताया है. उसने 11वीं शताब्दी में दिल्ली की स्थापना की थी. 12वीं शताब्दी में दिल्ली पर चौहान वंश का शासन था और पृथ्वीराज चौहान यहां के शासक थे. 13वीं शताब्दी में दिल्ली सल्तनत की स्थापना हुई और उसी काल में दिल्ली पर पहली बार किसी महिला का शासन स्थापित हुआ.

कुतुबुद्दीन ऐबक थे दिल्ली सल्तनत के पहले शासक

मोहम्मद गोरी के गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक ने दिल्ली सल्तनत की स्थापना की थी. उनके वंश को इतिहास में गुलाम वंश के रूप में जाना जाता है. कुतुबुद्दीन ऐबक को दिल्ली का शासन मोहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज चौहान को बंदी बनाने के लिए इनाम स्वरूप दिया था. कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु के बाद उसके दामाद शम्सुद्दीन इल्तुतमिश को दिल्ली सल्तनत की बागडोर मिली और उसने 1210 से 1236 तक शासन किया. जबकि कुतुबुद्दीन ऐबक ने 1206 से 1210 तक शासन किया था. इल्तुतमिश की मौत के बाद दिल्ली सल्तनत की बागडोर पहली बार किसी महिला रजिया को सौंपी गई थी. वह अपने भाइयों से बहुत काबिल भी थी और उसके पिता इल्तुतमिश उसपर बहुत भरोसा भी करते थे.

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1236 ईसवी में रजिया बनी थी दिल्ली की सुल्तान

गुलाम वंश के तीसरे शासक के रूप में रजिया सुल्तान दिल्ली की गद्दी पर बैठी थी. रजिया सुल्तान ने 1236 से 1240 तक शासन किया था. उसके बाद उसे पद से हटा दिया गया था. दरअसल रजिया सुल्तान एक अच्छी शासक थी और शम्सुद्दीन इल्तुतमिश के बेटों से काफी योग्य भी थी, लेकिन उस काल में महिलाओं का सुल्तान बनना समाज में अच्छा नहीं माना जाता था और इसे धर्म के खिलाफ भी माना जाता था. रजिया सुल्तान ने अपनी आवाम के हक में फैसले किए थे और उसके शासनकाल में महिलाओं को सुरक्षा भी मिली थी. रजिया ने अपनी पहचान नहीं छुपाई और वह बिना पर्दे के दरबार में आती थी. वह एक कुशल योद्धा भी थी. कहा जाता है कि उसका एक गुलाम याकूत से करीबी रिश्ता था, जिसे उसके दरबारी पसंद नहीं करते थे इसलिए उन्होंने इसका विरोध किया और उनके विरोध की वजह से रजिया को पद से हटना पड़ा. ऐतिहासिक साक्ष्यों से यह स्पष्ट नहीं है कि पद से हटने के बाद रजिया का क्या हुआ. कुछ कहते हैं कि उसके दरबारी अल्तुनिया ने विद्रोह किया था, जिसमें याकूत मारा गया था, जिसके बाद रजिया ने अल्तुनिया से शादी कर ली, कुछ दावे यह भी कहते हैं कि युद्ध में घायल याकूत रजिया को लेकर किसी सुरक्षित स्थान पर चला गया. लेकिन रजिया दिल्ली की पहली महिला शासक थी, जिसमें क्षमता होने के बावजूद उसे ज्यादा दिनों तक सत्ता पर काबिज नहीं रहने दिया गया.

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गुलाम वंश की स्थापना किसने की थी?

गुलाम वंश की स्थापना कुतुबुद्दीन ऐबक ने की थी.

दिल्ली की स्थापना किसने की थी?

दिल्ली की स्थापना तोमर वंश के राजा अनंगपाल ने की थी.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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