ओसामा बिन लादेन को अमेरिका ने ऐसे मारा था, पानी भी नहीं मांग सका; ऑपरेशन नेप्च्यून स्पीयर की पूरी कहानी
ओसामा बिन लादेन
Osama bin Laden : अलकायदा का खूंखार आतंकी ओसामा बिन लादेन, जिहाद के कट्टर विचारों का समर्थक था और अमेरिका को अपना दुश्मन मानता था. उसका मानना था कि अमेरिका इस्लाम का दुश्मन है और वह इस्लाम को मिटाना चाहता है, उसने अमेरिका पर 9/11 का हमला भी इसी सोच के साथ किया था. 9/11 के हमले के मास्टर माइंड ओसामा बिन लादेन को अमेरिका ने किस तरह ऑपरेशन नेप्च्यून स्पीयर के जरिए मारा, इसपर एक वेबसीरीज American Manhunt: Osama bin Laden आई है. यह वेबसीरीज ऑपरेशन की पूरी कहानी कहती है. ऑपरेशन नेप्च्यून स्पीयर एक सीक्रेट मिशन था, जिसे अमेरिका ने इतनी सफाई से कंप्लीट किया कि पूरी दुनिया चौंक गई.
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Osama bin Laden : नेटफ्लिक्स पर एक वेबसीरीज आई है जिसका नाम है American Manhunt: Osama bin Laden. यह वेबसीरीज अमेरिकी सेना के ऑपरेशन नेप्च्यून स्पीयर पर आधारित है. इस ऑपरेशन के जरिए अमेरिकी सेना ने 9/11 हमले के दोषी आतंकवादी ओसामा बिन लादेन की हत्या की थी. जिस वक्त ओसामा बिन लादेन को मारा गया था, उस वक्त वह पाकिस्तान के एबटाबाद में रह रहा था. बताया जाता है कि अमेरिकी सरकार ने पाकिस्तानी सरकार को भी सूचना नहीं दी थी कि वह उनके देश में घुसकर एक आतंकी जो अलकायदा का संस्थापक और 3000 से अधिक अमेरिकियों की हत्या का दोषी था, उसके खिलाफ कार्रवाई करने का रहे हैं. American Manhunt: Osama bin Laden में अमेरिकी सेना ने किस तरह ओसामा बिन लादेन को मारा इसकी पूरी जानकारी दी गई है.
क्या था ऑपरेशन नेप्च्यून स्पीयर (Operation Neptune Spear)
ऑपरेशन नेप्च्यून स्पीयर अमेरिकी सरकार का एक सीक्रेट सैन्य अभियान था. इसके बारे में बहुत ही सीमित लोगों को जानकारी दी. इस गुप्त सैन्य अभियान के जरियए अमेरिका ने अलकायदा के आतंकी ओसामा बिन लादेन को 2 मई 2011 को पाकिस्तान के एबटाबाद शहर में मारा था. इस अभियान को अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) और अमेरिकी नेवी सील्स( US Navy SEALs) ने संयुक्त रूप से संपन्न किया था. यह ऑपरेशन बहुत ही खास था. इस ऑपरेशन का लक्ष्य ओसामा बिन लादेन को मारना था. यह ऑपरेशन 1-2 मई की रात को चलाया गया था और पूरे ऑपरेशन को अमेरिकी राष्ट्रपति और उनकी टीम ने लाइव देखा था. यह ऑपरेशन आधुनिक तकनीकों से लैस था, जिसकी वजह से इसकी भनक आतंकियों और पाकिस्तान सरकार को भी नहीं लगी.
ऑपरेशन नेप्च्यून स्पीयर की शुरुआत अफगानिस्तान के सीक्रेट अमेरिकी बेस से हुई

अलकायदा के संस्थापक ओसामा बिन लादेन को मारने के लिए अमेरिका ने अफगानिस्तान के सीक्रेट अमेरिकी बेस से ऑपरेशन की शुरुआत की. इस बेस से MH-60 Black Hawk – स्टील्थ वर्जन के दो हेलीकॉप्टर को पाकिस्तान के एबटाबाद के लिए उड़ाया गया था. इन हेलीकॉप्टर का काम था ओसामा को मारने के लिए कमांडोज को एबटाबाद के उस कंपाउंड में उतारना जहां ओसामा बिन लादेन रह रहा था. साथ ही ऑपरेशन की समाप्ति तक निगरानी भी रख सकें और आतंकी के शव को सुरक्षित ला सकें. MH-60 Black Hawk – स्टील्थ वर्जन हेलीकॉप्टर की खासियत यह थी कि यह रडार की पकड़ में नहीं आता था और इसकी आवाज भी बहुत कम थी.
ऑपरेशन नेप्च्यून स्पीयर को कैसे दिया गया अंजाम
ऑपरेशन नेप्च्यून स्पीयर को अंजाम देना बहुत ही कठिक टास्क था. जिस घर में ओसामा छुपा था, उसका परिसर काफी छोटा और तंग था. बावजूद इसके एक हेलीकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई. दूसरा हेलीकॉप्टर आकाश में काफी कम ऊंचाई पर मंडरा रहा था, ताकि किसी भी तरह के सपोर्ट की जरूरत हो तो उसे मुहैया करा जा सके. आतंकवाद के खिलाफ अमेरिकी लड़ाई का यह बड़ा ऑपरेशन था. पायलट ने काफी सूझबूझ के साथ हेलीकॉप्टर को लैंड कराया वह भी बिना धमाके के. पाकिस्तान के समयानुसार रात का वक्त था. सभी लोग सो रहे थे. कंमाडोज रस्सी के सहारे एबटाबाद के कंपाउंड में उतरे. उन्हें काफी अभ्यास के बाद वहां लाया गया था, उन्हें कंपाउंड के कमरों की पूरी जानकारी थी. इसलिए वे एक के बाद फ्लोर पर अपना काम करते जा रहे थे.सबसे ऊपरी मंजिल पर ओसामा बिन लादेन अपने बीवी-बच्चों के साथ रहता था. वहां पहुंचकर कंमाडोज ने उसके सिर और छाती पर गोली मारी. इन कंमाडोज को निर्देश था कि ओसामा को मार देना है. उसके बाद उसके कंप्यूटर हार्ड ड्राइव्स, पेन ड्राइव्स सहित कई दस्तावेज वहां से निकाल लिए गए. शव को अमेरिकी कंमाडोज ने उठा लिया ताकि डीएनए टेस्ट के जरिए ओसामा की मौत को कंफर्म किया जा सके. अमेरिकी सेना के कंमाडोज ने क्षतिग्रस्त हेलीकॉप्टर को वहीं उड़ा दिया, ताकि उसकी खुफिया तकनीक के बारे में किसी को जानकारी ना मिल सके और वे ओसोमा का शव लेकर वहां से सुरक्षित निकल आए.
ओसामा को जहां मारा गया वहां से पाकिस्तानी सैन्य स्टेशन की दूरी महज 1.5 किलोमीटर थी
ओसामा को मारने के लिए पाकिस्तान ने इतना खुफिया ऑपरेशन चलाया, लेकिन पाकिस्तान यह कहता है कि उसे इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी. यह दावा संदेहास्पद लगता है, क्योंकि एबटाबाद के उस परिसर से पाकिस्तानी सैन्य स्टेशन की दूरी महज 1.5 किलीमीटर थी. वेबसीरीज American Manhunt: Osama bin Laden में इस बात की जानकारी भी दी गई है. ओसामा के शव को समुद्र में दफन करने पर भी कुछ इस्लामिक राष्ट्रों ने सवाल उठाया कि यह इस्लाम विरुद्ध है. इन तमाम सवालों के जवाब इस बहुप्रतीक्षित वेबसीरीज में दे दिए गए हैं. आतंकवाद के खिलाफ अमेरिकी जंग को यह वेबसीरीज पुख्ता करती है.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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