बिहार में नयी शिक्षक नियमावली का विरोध, शिक्षक संगठनों ने सरकार को दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम

नयी नियमावली से नाराज 28 शिक्षक संगठनों की बैठक गुरुवार को हुई. इसमें जाति गणना का बहिष्कार करने की बात कही गयी. सभी संघों ने चेतावनी दी है कि अगर नयी नियमावली में 24 घंटे में सुधार नहीं हुआ, तो जाति गणना का शिक्षक बहिष्कार करेंगे.
बिहार में शिक्षकों के लिए जारी नयी नियमावली पर शिक्षक संगठन नाराज हैं. सभी शिक्षक संगठनों ने आंदोलन की चेतावनी सरकार को दी है. इसी को लेकर पटना में विभिन्न 28 शिक्षक संगठनों की बैठक गुरुवार को हुई. बैठक में शिक्षकों ने जाति गणना का बहिष्कार करने की बात कही है. सभी संघों ने संयुक्त शिक्षक संघर्ष मोर्चा से आंदोलन चलाने की योजना बनायी है. सरकार को नयी नियमावली में सुधार के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम भी दिया है. अन्यथा 15 अप्रैल से शुरू हो रहे जाति गणना का बहिष्कार करने की घोषणा की है.
प्रदेश इकाई राज्य शिक्षक महासंघ के आह्वान पर सभी शिक्षकों द्वारा शैक्षणिक कार्यों से खुद को अलग करते हुए जाति गणना कार्य का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है. इसके आलोक में प्रगणक, पर्यवेक्षक व ट्रेनर के तौर पर प्रतिनियुक्त शिक्षक बिहार जाति गणना का बहिष्कार कर रहे हैं. इस आशय का पत्र शिक्षक संघ द्वारा संबंधित पदाधिकारियों को भी दिया गया है. इस मामले में शिक्षक संघ और सरकार के बीच जारी गतिरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है. सरकार के शिक्षक नियमावली 2023 को लेकर शिक्षकों में काफी आक्रोश है. शिक्षकों द्वारा शिक्षण कार्य के साथ जाति जनगणना का भी विरोध करते हुए सरकार के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है.
इधर, संघ के मोहनिया प्रखंड अध्यक्ष एसके सिंह ने कहा कि सरकार हम लोगों के साथ वादाखिलाफी कर रही है. सरकार बनाने से पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने हम शिक्षकों से वादा किया था कि हमारी सरकार बनेगी, तो हम समान कार्य के लिए समान वेतन लागू करेंगे. लेकिन यहां तो सरकार पूरी तरह से वादाखिलाफी कर रही है. जब तक हम शिक्षकों का समायोजन नहीं किया जाता है व समान कार्य के लिए समान वेतन लागू नहीं किया जाता है और शिक्षक नियमावली 2023 में संशोधन नहीं किया जाता है, हम सभी शिक्षक जाति गणना का बहिष्कार करते रहेंगे. फिर भी यदि सरकार हमारी मांगों को नहीं सुनती है, तो हम आने वाले समय में विद्यालय में तालाबंदी कर शिक्षण कार्य का भी पूरी ताकत के साथ विरोध करेंगे.
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एसके सिंह ने कहा कि सरकार एक तरफ कहती है कि शिक्षा और रोजगार को बढ़ावा देकर बेरोजगारी मिटाना है. लेकिन जब शिक्षा देने वाले शिक्षकों के साथ ही सरकार सौतेला व्यवहार कर रही है. ऐसी स्थिति में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कल्पना करना भी बेइमानी है. सरकार हम शिक्षकों को तरह-तरह के कार्यों में लगाकर शिक्षण कार्य को खुद प्रभावित करती है. सरकार पूर्ण रूप से शिक्षकों का दोहन करने पर लगी हुई है. हम सब सरकार की शिक्षक नियमावली 2023 का घोर विरोध करते हैं. साथ ही मांग करते हैं कि सरकार द्वारा जारी इस नियमावली में संशोधन कर हम शिक्षकों का मानदेय लागू किया जाये.
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By Prabhat Khabar News Desk
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