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यूरिया उत्पादन में वृद्धि

Updated at : 08 Apr 2024 8:22 AM (IST)
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यूरिया उत्पादन में वृद्धि

घरेलू उत्पादन से मांग और आपूर्ति की खाई पाटने में मदद मिली है, इसलिए 2025 के अंत तक यूरिया का आयात बंद कर दिया जायेगा.

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देश में यूरिया उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी को देखते हुए अगले वर्ष से इसके आयात की आवश्यकता नहीं होगी. केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा है कि घरेलू उत्पादन से मांग और आपूर्ति की खाई पाटने में मदद मिली है, इसलिए 2025 के अंत तक यूरिया का आयात बंद कर दिया जायेगा. वर्ष 2021 के बाद से यूरिया, जो हमारे देश में प्रमुख उर्वरक के रूप में खेती में इस्तेमाल किया जाता है, का आयात में कमी के रुझान रहे हैं. वित्त वर्ष 2021-22 में 91.36 लाख टन यूरिया का आयात हुआ था, जो 2022-23 में घटकर 75.8 लाख टन हो गया. पिछले वित्त वर्ष में अप्रैल से नवंबर 2023 की अवधि में 47.65 लाख टन यूरिया दूसरे देशों से खरीदा गया था. हमें घरेलू मांग की पूर्ति के लिए हर साल लगभग 350 लाख टन यूरिया की आवश्यकता होती है.

पांचवें संयंत्र के चालू हो जाने के बाद भारत की यूरिया उत्पादन क्षमता 325 लाख टन हो जायेगी. जो शेष आवश्यकता है, उसे वैकल्पिक उर्वरक नैनो लिक्विड यूरिया के उपयोग से पूरा किया जायेगा. सरकार का आकलन है कि नैनो लिक्विड यूरिया के इस्तेमाल से भारत 15-20 हजार करोड़ रुपये की बचत कर सकता है. सरकार की कोशिश है कि वैकल्पिक उर्वरकों का उपयोग बढ़े ताकि रासायनिक उर्वरकों पर हमारी निर्भरता कम हो सके. बीते कई दशकों से ऐसे उर्वरकों के इस्तेमाल से कृषि उत्पादन में बहुत अधिक बढ़ोतरी हुई है, लेकिन रसायनों का नकारात्मक असर भी मिट्टी और फसलों पर पड़ा है. इस असर को कम करने में वैकल्पिक उर्वरक मददगार साबित हो सकते हैं.

नैनो लिक्विड यूरिया के अलावा सरकार नैनो लिक्विड डीएपी को भी बढ़ावा दे रही है. इसके अलावा, खेती करने के तौर-तरीकों और फसल चक्र में बदलाव की कोशिशें भी हो रही हैं. फसलों को भी बदलने की प्रक्रिया चल रही है. लेकिन लंबे समय तक रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता बनी रहेगी. इसीलिए सरकार ने बंद पड़े यूरिया के चार संयंत्रों को फिर से चालू किया है तथा एक संयंत्र में जल्दी ही उत्पादन शुरू हो जायेगा. आयात पर निर्भरता कम होने से विदेशी मुद्रा की बचत भी होगी और यूरिया की कीमतों को स्थिर रखने में भी मदद मिलेगी. उल्लेखनीय है कि यूरिया का आयात पूरी तरह से सरकार द्वारा नियंत्रित है. बजट में उर्वरकों पर अनुदान देने की व्यवस्था की जाती है ताकि किसानों पर आर्थिक बोझ न बढ़े, फिर भी उर्वरकों और उनके निर्माण से संबंधित वस्तुओं के आयात करने से कीमतों पर पूरा नियंत्रण संभव नहीं होता. उल्लेखनीय है कि बीते दिसंबर में भारत ने उर्वरकों के वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं को चेतावनी दी थी कि वे अनाप-शनाप मुनाफा बनाने की कोशिश न करें. यूरिया आयात बंद होना एक बड़ी उपलब्धि होगी.

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