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कोरोना से जंग में राज्यों के प्रयास

Updated at : 09 Apr 2020 1:01 PM (IST)
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कोरोना से जंग में राज्यों के प्रयास

झारखंड के अंदरूनी हिस्से में चलनेवाले स्पिरिट के एक कारखाने का योगदान बहुत छोटा, लेकिन वैश्विक महामारी कोविड-19 से निपटने के भारत के प्रयासों की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है. राज्य के महत्वाकांक्षी जिले बोकारो के बालीडीह औद्योगिक क्षेत्र में स्थित इस कारखाने ने लगभग दस लीटर सैनिटाइजर उत्पादित किया है.

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अमिताभ कांत, मुख्य कार्यकारी अधिकारी नीति आयोग

राजेश्वरी सहाय, युवा व्यवसायी

delhi@prabhatkhabar.in

झारखंड के अंदरूनी हिस्से में चलनेवाले स्पिरिट के एक कारखाने का योगदान बहुत छोटा, लेकिन वैश्विक महामारी कोविड-19 से निपटने के भारत के प्रयासों की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है. राज्य के महत्वाकांक्षी जिले बोकारो के बालीडीह औद्योगिक क्षेत्र में स्थित इस कारखाने ने लगभग दस लीटर सैनिटाइजर उत्पादित किया है. ‘स्माइलिंग बोकारो’ नामक यह सेनिटाइजर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मानदंडों का पूरी तरह अनुपालन करते हुए बनाया गया है और यह जिले के निवासियों के लिए 210 रुपये प्रति लीटर मूल्य पर उपलब्ध है.दुमका प्रशासन ऑनलाइन गेम और प्रतियोगिताओं का आयोजन कर लोगों का घरों में रहना सुनिश्चित कर रहा है. ‘डैजलिंग दुमका’ के ट्विटर अकाउंट और फेसबुक पेज पर निवासी विभिन्न कौशल-आधारित प्रतियोगिताओं के लिए अपनी प्रविष्टियां अपलोड कर सकते हैं. ‘कोरोना में कुछ करो न’ नामक पहल का उद्देश्य लॉकडाउन के दौरान निवासियों को अपने शौक जानने के लिए प्रेरित करना है.

दुमका की आयुक्त राजेश्वरी बी का कहना है, ‘हमने स्थानीय केबल नेटवर्क के साथ भी साझेदारी की है और फिल्में दिखाना शुरू कर दिया है, ताकि लोग सामाजिक समस्याओं के प्रति सजग रहें और साथ ही उस दौरान उनके पास करने को कुछ हो.’ सामाजिक दूरी सुगम बनाने के लिए राष्ट्रव्यापी कड़े लॉकडाउन के साथ कोविड-19 के खिलाफ अपनी जंग को आगे बढ़ाते ही देश के 112 महत्वाकांक्षी जिलों में से अनेक इसमें साझेदार बनने के लिए तथा देश के प्रयासों को मजबूत बनाने के लिए कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ रहे हैं. झारखंड की ओर से ऐसी अनेक प्रशंसनीय पहल की जा रही हैं. कोयल नदी के तट पर स्थित पलामू उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) प्रभावित जिला है, जिसके काफी बड़े हिस्से में घने वन हैं. भौगोलिक बाधाओं के बावजूद जिले ने सभी निवासियों के घरों तक आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के लिए सम्मिलित प्रयास किये हैं. प्रशासन ने ग्राहकों की ऑन-कॉल डिमांड्स पूरा करने के लिए सात विक्रेताओं को अधिकृत किया है. वस्तुओं की आपूर्ति में जुटे कार्मिक संपर्क रहित वितरण के निर्देशों का पालन कर रहे हैं. प्रशासन जरूरतमंदों को दो घंटे के भीतर नि:शुल्क राशन उपलब्ध करा रहा है. राज्य की राजधानी रांची ने प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से शाम पांच बजे तक नागरिकों को समझाने और सहायता प्रदान करने के लिए‘मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन’ शुरू की है.

जिलाधिकारी राय महिपत रे का कहना है, ‘यह सुनिश्चित करना हमारा लक्ष्य है कि इस लॉकडाउन के दौरान- कमजोर वर्गों के लिए पके हुए भोजन और सूखे राशन से लेकर वरिष्ठ नागरिकों के लिए समर्पित सहायता तक- समाज के किसी भी वर्ग की अनदेखी न हो. हमें सामाजिक संगठनों से भी उत्कृष्ट प्रतिक्रिया मिली है.’बिहार में नवादा के जिलाधिकारी द्वारा मोबाइल ऐप ‘गो कोरोना: सतर्कता ही बचाव’ लॉन्च किया गया है. जिला त्वरित ट्रैकिंग और तत्काल चिकित्सा उपलब्ध कराने को लक्षित कर रहा है. गया और औरंगाबाद में सामाजिक दूरी को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है.

बाजारों में प्रतीक्षा करते समय व्यक्तियों को कतारों में एक-दूसरे से कम से कम छह फुट की दूरी पर खड़ा किया जाना सुनिश्चित करने के लिए सभी स्‍थानों को रेखांकित किया गया है. छत्तीसगढ़ में दंतेवाड़ा मुख्य रूप से एक जनजातीय जिला है और इसे भारत में सबसे पुराने बसे स्थानों में से एक माना जाता है. प्रशासन ने सबसे अधिक जरूरतमंद निवासियों- खानाबदोशों, भिखारियों, कचरा बीननेवालों और अल्प सुविधा प्राप्त वरिष्ठ नागरिकों की पहचान की है और उन तक भोजन की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित किया है. दंतेवाड़ा में गंभीर तीव्र कुपोषण और मध्यम तीव्र कुपोषण से पीड़ित बच्चों के लिए ‘टेक होम राशन’ वितरित किया जा रहा है.

असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने नवंबर, 2019 में गोलपाड़ा जिले में ग्रामीण स्वोरोजगार प्रशिक्षण संस्‍थान में दिव्यांगों को प्रशिक्षण देने की एक योजना शुरू की थी. इस समूह को प्लास्टिक के विकल्प के रूप में कपड़े के शॉपिंग बैग बनाने के लिए प्रशिक्षित किया गया था. आज वही समूह अच्छी गुणवत्ता के मास्क बना रहा है और जिला प्रशासन इन मास्क की बिक्री सुनिश्चित कर रहा है. यह लॉकडाउन के दौरान इन श्रमिकों को आमदनी का जरिया भी बन रहा है. गोलपाड़ा की विभिन्न सरकारी और निजी स्वास्थ्य सुविधाओं में 85 से अधिक आइसोलेशन बेड की व्यवस्था की गयी है. आशा कार्यकर्ताओं की आवाजाही को रिकॉर्ड और ट्रैक करने के लिए बड़े पैमाने पर गूगल स्प्रेडशीट का उपयोग हो रहा है. अस्पताल के बिस्तर और अन्य चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ाने के लिए स्थानीय संसाधनों की कार्यात्मकता को बढ़ावा दिया जा रहा है.

वर्णाली डेका (आयुक्त, गोलपाड़ा) के अनुसार, ‘आपको जीवन में एक और मौका नहीं मिलेगा. घर पर रहें और सुरक्षित रहें.’कोविड-19 संकट ने भविष्य में इसी तरह की परिस्थितियों के लिए बेहतर स्तर की तैयारियों की आवश्यकता को उजागर किया है. यह महामारी भारत के लिए अपनी आपदा-प्रबंधन क्षमताओं का आकलन करने और उनमें सुधार लाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है. डिजिटल हस्तक्षेपों- ऑनलाइन जोखिम मूल्यांकन प्लेटफार्म, ट्रैकिंग एप्लिकेशन, सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का बेहतर प्रशिक्षण, पुलिस और अर्धसैनिक बलों को अधिक संवेदनशील बनाने तथा वंचितों की सुरक्षा और सहायता के लिए पहले से सामाजिक-आर्थिक उपाय करने को इस संकट का समाधान के बाद भी प्राथमिकता बनाये रखना चाहिए.

इस जंग में वास्तविक संघर्ष हमारे नागरिकों को सुरक्षित, प्रेरित और आशावादी बनाये रखने का है. जमीनी स्तर से जुड़ी मनोबल बढ़ानेवाली ये कहानियां इस वैश्विक महामारी के मद्देनजर भारतीयों के अटूट साहस का प्रमाण हैं. ये सर्वोत्तम पद्धतियां भारत के कुछ सबसे अविकसित राज्यों से सामने आ रही हैं और अन्य राज्यों द्वारा किये जा रहे प्रयासों में उनके लिए महत्वपूर्ण टच प्वाइंट्स की भूमिका निभा सकती हैं.(लेखकद्वय के विचार निजी हैं.)

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अमिताभ कांत

लेखक के बारे में

By अमिताभ कांत

अमिताभ कांत is a contributor at Prabhat Khabar.

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