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रिकार्ड स्तर पर पहुंचा आइटी उद्योग

By डॉ. जयंतीलाल भंडारी
Updated Date
रिकार्ड स्तर पर पहुंचा आइटी उद्योग
रिकार्ड स्तर पर पहुंचा आइटी उद्योग
प्रतीकात्मक तस्वीर

डॉ जयंतीलाल भंडारी, अर्थशास्त्री

jlbhndari@gmail.com

यकीनन कोविड-19 की चुनौतियों के बीच एक ओर जहां भारत का आइटी उद्योग तेजी से आगे बढ़ा है, वहीं आउटसोर्सिंग से हमारी विदेशी मुद्रा भी बढ़ी है़ शानदार ऑर्डर प्रवाह के कारण देश के आइटी उद्योग का लाभ एक दशक के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है़ इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन(आइबीइएफ) की अगस्त 2020 की रिपोर्ट के मुताबिक, इस वर्ष भारतीय आइटी सेक्टर की आय के 7.7 प्रतिशत बढ़कर करीब 191 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है़, जो 2025 तक 350 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है़ गौरतलब है कि भारत दुनिया में आइटी सेवाओं का सबसे बड़ा निर्यातक देश है़ भारत की 200 से अधिक आइटी फर्म दुनिया के 80 से ज्यादा देशों में काम कर रही हैं जिसके कर्मचारियों की संख्या लगभग 43.6 लाख है़

वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के समय भारत से आउटसोर्सिंग, खासतौर से तकनीकी कार्यों के लिए, में तेजी आयी थी़ भारत में प्रौद्योगिकी डेवलपरों का पारिश्रमिक विकसित देशों की तुलना में कम होने से भी आउटसोर्सिंग को बढ़ावा मिला था़ कोविड-19 की चुनौतियों के बीच एक बार फिर भारत का आइटी उद्योग देश और दुनिया के उद्योग-कारोबार और स्वास्थ्य सेवाओं को गतिशील बनाने में प्रभावी भूमिका निभा रहा है़ वस्तुतः कोविड-19 ने आइटी कंपनियों के लिए नये डिजिटल अवसर पैदा किये हैं, क्योंकि देश और दुनिया की ज्यादातर कारोबारी गतिविधियां अब ऑनलाइन हो गयी है़ं वर्क फ्राॅम होम की व्यापक स्वीकार्यता से आउटसोर्सिंग को बढ़ावा मिला है़ नैसकॉम के अनुसार, आइटी कंपनियों के अधिकांश कर्मचारियों द्वारा लॉकडाउन के दौरान घर से काम किया गया है़ आपदा के बीच समय पर सेवा की आपूर्ति से कई वैश्विक उद्योग-कारोबार इकाइयों का भारत की आइटी कंपनियों पर भरोसा भी बढ़ा है़

कोरोना महामारी ने आइटी उद्योग की रोजगार संबंधी तस्वीर बदल दी है़ डिजिटल और क्लाउड जैसे क्षेत्रों में ग्राहकों की मांग बढ़ी है़ कोरोना के शुरुआती दौर में जिन आइटी कंपनियों ने बड़ी संख्या‍ में कर्मचारियों की छंटनी की थी, कामकाज में तेजी आने से उनमें से कई कंपनियां अब अपने कर्मचारियों को नौकरी पर वापस बुला रही है़ं महामारी में वर्क फ्रॉम होम और स्थानीय नियुक्तियों पर जोर दिये जाने से भारत की प्रमुख आइटी कंपनियों का कार्बन उत्सर्जन घटा है़ कोविड-19 के पूर्व तक भारतीय आइटी कंपनियों द्वारा व्यावसायिक यात्राओं और आवाजाही के तहत बड़ी मात्रा में कार्बन उत्सर्जन किया जाता रहा है़ लेकिन कोविड-19 ने आइटी कंपनियों को डब्ल्यूएफएच मॉडल अपनाने के लिए बाध्य किया है़ साथ ही अमेरिका जैसे बाजारों में बढ़ती वीजा सख्ती के कारण भी आइटी कंपनियों को स्थानीय कर्मचारियों को नियुक्त करना पड़ रहा है़

इसी सात अक्तूबर को अमेरिका के श्रम मंत्रालय ने एच-1बी, एच-1बी1, इ-3 और आइ-140 वीजा के लिए न्यूनतम वेतन में इजाफा कर दिया है़ इस कारण विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए अमेरिकी कंपनियों को अब ज्यादा धनराशि खर्च करनी पड़ेगी़ इतना ही नहीं, अमेरिका ने वीजा आवेदकों के लिए भी दायरा सीमित किया है़ गौरतलब हो कि एच-1बी वीजा प्रणाली में बदलाव करने और घरेलू कामगारों को नौकरी से निकालने से रोकने के लिए अमेरिकी संसद के निचले सदन में हाल ही में एक विधेयक पेश हुआ है़

अमेरिकी नागरिक को पहले नौकरी संबंधी इस विधेयक में प्रावधान है कि यदि नियोक्ता अमेरिकी कर्मियों को छुट्टी पर भेजता है, तो वह एच-1बी वीजा धारक की नियुक्ति कर सकेगा, लेकिन वीजा धारक को अमेरिकी कामगार से अधिक वेतन का भुगतान करना होगा़ यह प्रावधान इसलिए रखा गया है, ताकि बहुत जरूरी होने पर ही विदेशी कामगारों की नियुक्ति हो और अमेरिकी कामगारों को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे़ ऐसे में अमेरिका में कार्यरत भारतीय आइटी सेवा कंपनियां, अमेरिका में स्थानीय नियुक्तियां बढ़ाने और अधिक से अधिक काम भारत भेजने पर ध्यान केंद्रित करने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है़ं

देश के आइटी उद्योग को ऊंचाई देने और आउटसोर्सिंग की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए कई बातों पर ध्यान देना होगा़ नयी पीढ़ी को आइटी शिक्षा देने के लिए समुचित निवेश की व्यवस्था करनी होगी. नये दौर की तकनीकी जरूरतों और इंडस्ट्री की अपेक्षाओं के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण देना होगा़ शोध, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के मापदंडों पर आगे बढ़ना होगा़ एआइ, वीआर, रोबोटिक प्रोसेस, ऑटोमेशन, आइओटी, बिग डाटा एनालिसिस, क्लाउड कंप्यूटिंग, ब्लॉक चेन और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में युवाओं को कुशल बनाना होगा़

सॉफ्टवेयर निर्यात के लिए अमेरिकी बाजार पर निर्भरता कम करके आउटसोर्सिंग की संभावनाओं वाले अन्य देशों जैसे उत्तरी यूरोप, पूर्वी एवं मध्य यूरोप के देशों, कनाडा, जापान, दक्षिण कोरिया और पूर्वी एशियाई देशों, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका में भी कदम बढ़ाना होगा़ भारत की आइटी सेवा कंपनियों को गैर-अंग्रेजी भाषी देशों में कारोबार बढ़ाने के लिए कार्मियों को उन देशों की भाषाओं में प्रशिक्षण देने पर भी व्यय करना होगा़

(ये लेखक के निजी विचार हैं.)

Posted by : Pritish Sahay

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