चिंताजनक है स्त्रियों में हिंसा की बढ़ती प्रवृत्ति

Published at :21 Apr 2026 12:19 PM (IST)
विज्ञापन
crime news

महिलाओं में हिंसा की बढ़ती प्रवृत्ति

violence-in women : अच्छी जीवनशैली और पैसे के कारण पति को छोड़कर किसी और के साथ जा रही हैं. पति से भावनात्मक लगाव महसूस न होना, अपनी पसंद के लड़के के मुकाबले किसी और से विवाह और पारिवारिक झगड़े भी ऐसा करवा रहे हैं. हर रोज ऐसी ही खबरें आती हैं.

विज्ञापन

violence-in women : पिछले दिनों एक लड़की ने अपनी सहेली के ऊपर तेजाब फेंक दिया. क्योंकि उसका विवाह उस लड़के से हो रहा था, जिसे वह लड़की पसंद करती थी. तेजाब से लड़की का चेहरा बुरी तरह झुलस गया. एक आंख की रोशनी पूरी तरह चली गयी और दूसरी में बहुत कम बची है. वह लड़की गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती है. कहते हैं कि यह एकतरफा प्यार का मामला था. अक्सर अपने देश में लड़के, लड़कियों पर तेजाब फेंक देते हैं. आपको लक्ष्मी तो याद होगी. तेजाब फेंकने वालों के लिए मृत्युदंड की मांग भी की जाती रही है. इस समस्या पर ‘छपाक’ नाम से एक फिल्म भी बनी थी.

हाल ही में घटी एक दूसरी घटना में, एक महिला ने पुरुष मित्र के साथ मिलकर अपने पति को केवल इसलिए मार डाला, क्योंकि वह गोरी थी और उसका पति काला. उसने अपने पति से कहा भी था कि तुम मेरे लायक नहीं हो. कई वर्ष पहले पुलिस के एक सिपाही को भी उसकी पत्नी ने काला रंग होने के कारण मार डाला था.


सांवले होने के कारण अपने यहां न जाने कितनी लड़कियों को विवाह के बाजार से गायब कर दिया जाता है. शादी हो भी, तो जीवनभर ताने झेलने पड़ते हैं. कई बार लोग दूसरा विवाह भी कर लेते हैं. केवल यही नहीं, स्त्री मोटी है, पतली है, गरीब है, बड़े दांत हैं, ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं है, पति से ज्यादा होशियार है, खाना बनाना नहीं जानती, ठिगनी है, आदि बहुत-सी बातें हैं जिनके कारण स्त्रियां त्याग दी जाती रही हैं. पर अब जैसे हवा का रुख बदल गया है. स्त्रियों को पुरुषों की उन बातों की नकल करने की पड़ी है, जो बातें किसी के लिए भी अच्छी नहीं होतीं. स्त्रियां अपने पुरुष मित्रों के साथ मिलकर पतियों को मार रही हैं, या कि किसी और पुरुष मित्र के लिए पहले को मार रही हैं.

अच्छी जीवनशैली और पैसे के कारण पति को छोड़कर किसी और के साथ जा रही हैं. पति से भावनात्मक लगाव महसूस न होना, अपनी पसंद के लड़के के मुकाबले किसी और से विवाह और पारिवारिक झगड़े भी ऐसा करवा रहे हैं. हर रोज ऐसी ही खबरें आती हैं. कुछ दिनों पूर्व घटी घटनाओं को ही लें, तो आंध्र प्रदेश में एक महिला ने अपने पुरुष मित्र के साथ मिलकर पति को पहले बिरयानी में बीस नींद की गोलियां मिलाकर खिलायीं, फिर तकिये से उसका गला घोंट डाला.

बेंगलुरु में एक महिला अपने व्यापारी पति से आठ करोड़ रुपये मांग रही थी. पैसा न मिलने पर उसने भी अपने मित्र के साथ मिलकर पति को मार डाला. उत्तर प्रदेश में एक महिला के दो पुरुष मित्र थे. जब उसे लगा कि उसका पति संबंधों में बाधा बन रहा है, तो उसने दोनों मित्रों की मदद से पति को खत्म कर दिया. मध्य प्रदेश में पति को मरवाने के लिए महिला ने भाड़े के हत्यारों की मदद ली. मध्य प्रदेश का सोनम और राजा रघुवंशी केस तो याद ही होगा, जहां हनीमून पर ही राजा को मार डाला गया.


सिर्फ पति ही नहीं, अपने ससुराल और मायके पक्ष के रिश्तेदारों को भी स्त्रियां खत्म कर रही हैं. ऐसी हत्याओं और घटनाओं के लिए पहले से तैयारी की जाती है. जैसे, जहर या नींद की गोलियां खरीदना, पति के आने-जाने, पसंद के खाने, उसकी दिनचर्या, उसके पैसे और जमीन-जायदाद पर नजर रखना आदि. इस तरह के कृत्य से विवाह संस्था खतरे में पड़ती जा रही है, क्या इसे कोई महसूस कर रहा है. इस तरह की घटनाओं के घटने में बड़ी भूमिका लड़की और लड़के के घरवालों की भी होती है. वे अपने बच्चों की शादी उनकी नहीं, अपनी पसंद से करते हैं. इसमें जाति, धर्म, आर्थिक स्थिति समेत तमाम दीवारें खड़ी रहती हैं.

हालांकि, अब ऐसी घटनाएं भी सामने आ रही हैं जहां प्रेम विवाह होने के बावजूद पति को किसी दूसरे के लिए मार दिया जा रहा है. यदि इन बातों पर किसी सभा-सेमिनार में ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की जाये, तो कहा जाता है कि अरसे से स्त्रियां यह सब झेलती रही हैं. अब वे झेलने के लिए तैयार नहीं हैं, इसलिए बदला ले रही हैं. एक तरफ तो बताया जाता है कि बदले से बदला जन्मता है, इसलिए बदले की भावना नहीं होनी चाहिए, पर शायद ही कोई इस पर ध्यान देता है. फिर यह भी क्यों मान लिया गया है कि कोई भी अपराध करके हम बच निकलेंगे. जबकि अधिकांश मामलों में अपराधी पकड़े जाते हैं.

आखिर अपराध करने से पहले लोग यह क्यों नहीं सोचते कि जिसके प्रति हत्या या तेजाब फेंकने जैसा अपराध किया, उसका जीवन तो तबाह हुआ ही, बचा तो उनका जीवन भी नहीं. इसके अतिरिक्त, उनके इस तरह के कुकृत्य से उनके परिवार के लोग और अन्य कितने प्रभावित हुए. ऐसी भावनाओं को बहुत से विमर्शों ने भी हवा दी है. क्या यह सिर्फ कहने भर को है कि अतीत के गड़े मुर्दे उखाड़ने से कुछ नहीं होता. हमें भविष्य की ओर देखना चाहिए. मगर बदला लेने और किसी को खत्म करने की भावना ने इतना जोर पकड़ रखा है कि बदला लेने और उकसाने वाले कहते हैं कि अब हमारा वक्त है, हम ऐसा ही करेंगे. इन घटनाओं को देखकर लगता है कि आखिर समाज में आपसी विश्वास का इतना लोप कैसे हो गया कि किसी पर भरोसा करना भी मुश्किल हो रहा है.
(ये लेखिका के निजी विचार हैं.)

विज्ञापन
क्षमा शर्मा

लेखक के बारे में

By क्षमा शर्मा

वरिष्ठ टिप्पणीकार

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola