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बढ़ती जीवन प्रत्याशा

Updated at : 17 Oct 2022 8:04 AM (IST)
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बढ़ती जीवन प्रत्याशा

वर्ष 2100 तक हमारे देश की जीवन प्रत्याशा 81.96 वर्ष हो जायेगी. यह अभी 70 वर्ष के आसपास है.

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संयुक्त राष्ट्र के आकलन के अनुसार, इस शताब्दी के अंत तक यानी 2100 तक हमारे देश की जीवन प्रत्याशा 81.96 वर्ष हो जायेगी. यह अभी 70 वर्ष के आसपास है. जीवन प्रत्याशा किसी समूह, क्षेत्र या देश में एक व्यक्ति के औसत आयु का अनुमान है. भारत के विकास के साथ यह आयु बढ़ती जा रही है. हमारे देश में 1950 में जीवन प्रत्याशा मात्र 35.21 वर्ष थी. इसका अर्थ यह है कि यदि आकलन सही होते हैं, तो 150 वर्षों में इसमें 57 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है.

निश्चित ही यह वृद्धि उत्साहजनक है, परंतु आज जो जीवन प्रत्याशा लगभग 70 वर्ष है, वह 72.6 वर्ष के वैश्विक औसत से अभी कम ही है. इसके कम होने का मुख्य कारण शिशुओं और बच्चों की मृत्यु दर है, पर इसमें निरंतर सुधार संतोषजनक है. नमूना पंजीकरण प्रणाली के आंकड़ों के अनुसार, 1970-75 की तुलना में 2015-19 में जन्म के समय जीवन प्रत्याशा में 20 वर्ष की वृद्धि हुई है.

बीते दशकों में हमारे देश में चिकित्सा सुविधाओं में बढ़ोतरी होने, अच्छा आहार उपलब्ध होने तथा जीवन स्तर में सुधार होने से जीवन प्रत्याशा में वृद्धि होती गयी है. अनाज उत्पादन में हम बहुत पहले आत्मनिर्भर हो चुके हैं. दवाओं और टीकों के निर्माण में भारत इतना आगे बढ़ चुका है कि आज हमारे देश को दुनिया का दवाखाना कहा जाता है. जब व्यापक स्तर पर टीकाकरण नहीं होता था, तब चेचक और पोलियो जैसी बीमारियों से हर वर्ष लाखों लोगों की मृत्यु हो जाती थी.

ऐसे रोगों के उन्मूलन से मृत्यु दर में बड़ी गिरावट हुई है. पिछले कुछ समय से स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने से भी रोगों की रोकथाम हो रही है. इस संबंध में हर घर तक नल के द्वारा पेयजल पहुंचाने की योजना चमत्कारिक परिणाम दे सकती है. हमारे देश में विभिन्न संक्रामक रोग गंदगी से पैदा होते हैं तथा लोगों, विशेषकर महिलाओं एवं बच्चों, के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डालते हैं.

देशभर में विद्यालयों में शिक्षा पा रहे बच्चों को दोपहर का भोजन देने की योजना न केवल उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित कर रही है, बल्कि इसके माध्यम से उन्हें पोषण भी मिल रहा है. हालांकि हम अनाज उत्पादन में आत्मनिर्भर देश हैं और सरकार खाद्य सुरक्षा के लिए कृतसंकल्प है, पर यह भी वास्तविकता है कि जनसंख्या के बड़े हिस्से को समुचित पोषणयुक्त भोजन नहीं मिल पाता है.

इस अभाव को समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार राष्ट्रीय पोषण अभियान चला रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर इस अभियान का आरंभ किया था. संतुलित आहार और स्वस्थ जीवन शैली से हम अपनी आयु में अनेक वर्ष जोड़ सकते हैं.

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