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बढ़ती रक्षा क्षमता

Updated at : 12 Mar 2024 11:14 PM (IST)
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बढ़ती रक्षा क्षमता

एक साथ कई हथियार ढोने की क्षमता वाले अग्नि-5 मिसाइल में छह हजार किलोमीटर तक मार करने की क्षमता है.

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मिशन दिव्यास्त्र का सफल परीक्षण भारत की सामरिक क्षमता के विस्तार में एक महत्वपूर्ण कदम है. देश में ही विकसित अग्नि-5 मिसाइल मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हिकल तकनीक से लैस है. इस तकनीक से एक ही मिसाइल में अनेक बम जोड़े जा सकते हैं, जिन्हें अलग-अलग जगहों पर या एक ही जगह पर अलग-अलग समय दागा जा सकता है. मिसाइल रोधी हमले से बचाव के लिए नकली बम भी इस मिसाइल के साथ भेजे जा सकते हैं, जो शत्रु को चकमा दे सकते हैं. इस मिसाइल में छह हजार किलोमीटर तक मार करने की क्षमता है तथा इससे परमाणु बम भी दागे जा सकते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यभार संभालने के साथ ही रक्षा क्षमता को अत्याधुनिक तकनीक एवं हथियारों से युक्त करने का काम प्रारंभ कर दिया था. साथ ही, सरकार रक्षा आवश्यकताओं की पूर्ति करने तथा आयात पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से देश में ही निर्माण और उत्पादन को बढ़ावा दे रही है. अग्नि-5 की पहली उड़ान ऐसे प्रयास की सफलता का महत्वपूर्ण उदाहरण है. उल्लेखनीय है कि एक साथ कई हथियार ढोने की मिसाइल तकनीक साठ के दशक में ही खोज ली गयी थी और सभी ताकतवर देशों के पास ऐसी मिसाइलें हैं. अमेरिका में सत्तर के दशक के प्रारंभ में ऐसी मिसाइल का परीक्षण हुआ था, जबकि सोवियत संघ ने कुछ साल बाद ऐसी मिसाइल बनाने में कामयाबी पायी. भारत ने पहली बार सार्वजनिक तौर पर इस तकनीक के इस्तेमाल की घोषणा की है. यह घोषणा स्वयं प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया के पोस्ट द्वारा की है. यह भारत के बढ़ते आत्मविश्वास और स्वाभिमान को भी इंगित करता है. अब भारत ऐसी क्षमता वाले देशों- अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन- की कतार में आ गया है. हमारे दो आक्रामक पड़ोसियों- चीन और पाकिस्तान- लगातार अपनी रक्षा शक्ति को बढ़ाने में लगे हुए हैं. ऐसे में हमें भी अपनी सामरिक तैयारी को बेहतर करते जाना है. कई बम ढोने की मिसाइल तकनीक चीन के पास पहले से ही है और पाकिस्तान भी ऐसी मिसाइलों को विकसित कर रहा है. पिछले वर्ष अक्टूबर में पाकिस्तान ने मध्य दूरी के एक बैलेस्टिक मिसाइल का दूसरा परीक्षण किया था, जिसे कई हथियारों को ढोने के लिहाज से डिजाइन किया गया है. अग्नि-5 का पहला परीक्षण 2012 में किया गया था. उसी समय से इस उत्कृष्ट तकनीक को उससे जोड़ने के प्रयास हो रहे थे. इस मिसाइल में देश में ही विकसित तंत्र, सेंसर आदि लगे हुए हैं. हालिया परीक्षण हमारी सामरिक शक्ति बढ़ाने की दृष्टि से तो महत्वपूर्ण है ही, अत्याधुनिक तकनीक के क्षेत्र में हमारी प्रगति का भी उदाहरण है

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