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अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीद

By डॉ. जयंतीलाल भंडारी
Updated Date
अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीद
अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीद
Prabhat khabar

डॉ जयंतीलाल भंडारी, अर्थशास्त्री

delhi@prabhatkhabar.in

हाल ही में प्रकाशित गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का बाजार नये निवेश चक्र के पहले चरण में है. रिपोर्ट के मुताबिक भारत में लॉकडाउन के शुरुआती हिस्से में वित्तीय स्थिति सख्त रही थी, जो धीरे-धीरे नरम हुई. सरकार ने जिस तरह असाधारण राजकोषीय समर्थन पैकेज और आर्थिक सुधार लागू किये हैं, उससे वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की तुलना में बाद वाली तिमाहियों में जीडीपी में सुधार की पूरी संभावनाएं हैं.

भारतीय रिजर्व बैंक की विशेषज्ञ समिति के चेयरमैन केवी कामत ने कहा कि जीडीपी की वृद्धि दर में वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में गिरावट के बाद आगामी तिमाहियों में जीडीपी की स्थिति में तेजी से बेहतर सुधार की उम्मीद है. कई देशों की तरह भारत में भी कोविड-19 के कारण जीडीपी में भारी गिरावट का परिदृश्य दिखायी दे रहा है. लॉकडाउन ने आर्थिक गतिविधियों को बुरी तरह प्रभावित किया है.

परिणामस्वरूप, 31 अगस्त को राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल-जून 2020 की तिमाही में देश के जीडीपी में -23.9 फीसदी की बड़ी गिरावट आयी है. यह गिरावट कंस्ट्रक्शन सेक्टर ट्रेड, ट्रांसपोर्ट, होटल सेक्टर, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में, फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर और उपयोगी सेवाओं के सेक्टर दिखायी दी है. कृषि ही एकमात्र ऐसा सेक्टर है, जिसमें 3.4 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गयी है. दुनिया के आर्थिक एवं वित्तीय संगठनों ने का मानना है कि वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में जीडीपी में भारी गिरावट आयी है. लेकिन संपूर्ण वर्ष की जीडीपी में इतनी बड़ी गिरावट नहीं होगी.

इंडिया रेटिंग्स का मानना है कि आगामी वित्त वर्ष 2021-22 में अर्थव्यवस्था पटरी पर आ जायेगी और वास्तविक जीडीपी की वृद्धि दर 9.9 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है. विश्व बैंक द्वारा जारी रिपोर्ट ‘इंडिया डेवलपमेंट अपडेट’ में कहा गया है कि आगामी वित्तीय वर्ष में भारत सात फीसदी की विकास दर हासिल कर सकता है. जून, 2020 के बाद अर्थव्यवस्था को धीरे-धीरे खोलने की रणनीति का अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ा है. लॉकडाउन की तुलना में अब प्रमुख क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ रहा है.

अगस्त, 2020 में कार कंपनियों की बिक्री ने पिछले साल 2019 में इसी महीने में हुई बिक्री को पीछे छोड़ दिया है. बढ़ती हुई रेलवे माल ढुलाई आर्थिक गतिविधियों की बेहतर संकेतक है. साथ ही बिजली की खपत में भी अच्छा सुधार हुआ है. आइएचएम मार्केट इंडिया के मैन्युफैक्चरिंग पचेंजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) अगस्त 2020 में 52 दर्ज हुआ है. पीएमआइ इंडेक्स जुलाई में 46 दर्ज हुआ था, जबकि अप्रैल में लॉकडाउन के दौरान यह 27.4 तक नीचे आ गया था.

मार्च 2020 के बाद पहली बार अगस्त 2020 में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की गतिविधियों में वृद्धि हुई है. वर्ष 2020-21 की दूसरी तिमाही में भी सालाना आधार पर गिरावट आ सकती है, लेकिन यह गिरावट उतनी नहीं होगी जितनी कि लॉकडाउन के दौरान रही है. अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए चार बातों पर ध्यान देना जरूरी है. एक, उद्योग-कारोबार को प्रोत्साहन देना. दो, रोजगार वापस लाने के लिए तात्कालिक प्रयास, तीन भारत को कारोबार का वैश्विक केंद्र बनाना तथा चार देश में बड़ी संख्या में डिजिटल मौकों सहित नई नौकरियां पैदा करना होंगी.

लॉकडाउन के बीच अप्रैल और मई, 2020 में कारोबार लगभग पूरी तरह बंद रहा, इससे दो महीनों में बेरोजगारी की दर ऊंची रही. लेकिन जून और जुलाई 2020 से बेरोजगारी की दर में लगातार कमी आनीी शुरू हुई. साथ ही वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए रोजगार परिदृश्य अधिक मुश्किल भरा हुआ रहा. शहरी भारत में निर्मित हुए रोजगार के चिंताजनक परिदृश्य को बदलने के लिए सरकार के द्वारा अतिरिक्त रोजगार प्रयासों की आवश्यकता अनुभव की जा रही है.

यह जरूरी है कि रोजगार में तेज वृद्धि के लिए भारत को कारोबार, उत्पादन और निर्यात के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित किया जाये. कोविड-19 के बीच चीन के प्रति दुनिया की बढ़ती नाराजगी के मद्देनजर भारत के वैश्विक कारोबार के नया केंद्र बिंदु बनने की संभावनाएं दिखायी दे रही हैं. भारतीय बाजार दुनिया का चौथा सबसे बड़ा बाजार है. देश में प्रतिभाशाली नयी पीढ़ी के द्वारा बढ़ते हुए नवाचार, स्टार्टअप, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, आउटसोर्सिंग और कारोबार संबंधी अनुकूलताओं के कारण कोविड-19 के बीच दुनिया की शीर्ष फाइनेंस और कॉमर्स कंपनियां भारत की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही हैं.

सरकार के द्वारा उद्योग-कारोबार और निर्यात संबंधी और अधिक सुधारों से भारतीय बाजार में रोजगार के नये मौके निर्मित किये जाने होंगे. हम उम्मीद करें कि सरकार अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए नयी सुविधाएं एवं रियायतें देगी. रोजगार के खोए हुए मौके वापस लाये जायेंगे. नयी पीढ़ी को अच्छी ऑनलाइन एजुकेशन की डगर पर आगे बढ़ाया जायेगा. बड़ी संख्या में युवाओं को कुशल बनाने के फ्यूचर स्किल्स कार्यक्रम को कारगर तरीके से आगे बढ़ाया जायेगा. साथ ही डिजिटलीकरण के लिए आवश्यक बुनियादी जरूरतों संबंधी कमियों को दूर किया जायेगा.

(ये लेखक के निजी विचार हैं.)

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