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कान फिल्म समारोह में भारत पर निगाहें

सत्यजित रे का यह जन्म शताब्दी वर्ष है. उनकी कई फिल्में कान सहित विश्व के कई अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में पुरस्कृत होती रही हैं. उनकी ‘पाथेर पांचाली’ भी कान में सम्मानित हुई थी.

By प्रदीप सरदाना
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cannes film festival
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Photo: Instagram

कान फिल्म समारोह को विश्व का सर्वाधिक भव्य और प्रतिष्ठित फिल्म समारोह माना जाता है. इस बार यह समारोह कुछ अधिक चर्चा में इसलिए तो है ही कि इस बरस इसका 75वां आयोजन है, लेकिन यह चर्चा भारत को लेकर भी है. भारत 1946 के प्रथम कान फिल्म समारोह से ही इसमें हिस्सा ले रहा है. उस साल चेतन आनंद की पहली फिल्म ‘नीचा नगर’ ने समारोह में सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार जीत कर विश्व फिल्म समुदाय का ध्यान खींचा था.

इस वर्ष समारोह के 75वें आयोजन में एक बार फिर दुनिया की निगाहें भारत की ओर लगी हैं. यह आयोजन 17 मई को शुरू हुआ है और 28 मई तक चलेगा. तभी सर्वश्रेष्ठ फिल्म के ‘पाम डि ओर’ सहित अन्य पुरस्कारों की घोषणा होगी. इस बार समारोह के पहले दिन से भारत को जो सम्मान मिला है, उससे हर भारतीय को गर्व होना चाहिए. भारत अपनी आजादी के 75वें वर्ष का अमृत महोत्सव मना रहा है, वहीं कान फिल्म समारोह के 75 बरस होने के साथ-साथ भारत-फ्रांस के राजनीतिक संबंधों के भी 75 बरस हो चले हैं. हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी की फ्रांस यात्रा से इन रिश्तों को और मजबूती मिली है.

कान फिल्म समारोह के आरंभ में ही भारत को दो बड़े सम्मान मिल गये हैं. एक, इस बार वहां ‘मार्चे डू फिल्म’ (कान फिल्म बाजार) में भारत को ‘कंट्री ऑफ ऑनर’ का सम्मान मिला है. इस समारोह में यह सम्मान पाने वाला भारत पहला देश है. दूसरा, कान समारोह में भारत को बड़ी प्रतिष्ठा समारोह के पहले दिन तब मिली, जब पहली बार भारत के अब तक के सबसे बड़े प्रतिनिधिमंडल को वहां के ‘रेड कार्पेट’ पर चलने का अवसर मिला.

भारत के लिए 17 मई के वे पल सदा के लिए सुनहरे बन गये, जब सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर के नेतृत्व में आर माधवन, शेखर कपूर, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, वाणी त्रिपाठी और प्रसून जोशी जैसी फिल्मी हस्तियों ने ‘प्लाइस डेस फेस्टिवल’ की सीढ़ियों की ओर प्रस्थान किया. इस प्रतिनिधिमंडल में एआर रहमान, पूजा हेगड़े और रिकी केज भी थे. राजस्थान के लोक गायक मामे खान को भी रेड कार्पेट पर चलने का मौका मिला.

यूं ऐश्वर्या राय, प्रियंका चोपड़ा, सोनम कपूर आदि भारतीय कलाकार पहले भी रेड कार्पेट पर चलती रही हैं, लेकिन इस बार सूचना एवं प्रसारण मंत्री के साथ जिस प्रकार इतना बड़ा प्रतिनिधिमंडल रेड कार्पेट पर था, वह ऐतिहासिक है. भारत को कान में ‘सम्मानित देश’ का सम्मान मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी प्रसन्नता जाहिर की है. उन्होंने इस मौके पर कहा है कि भारत में कहानियों की कोई कमी नहीं है. इसलिए भारत में कंटेंट हब बनने की अपार संभावनाएं हैं.

यह कहते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने विश्व के फिल्मकारों को भारत की कहानियों पर फिल्म बनाने के लिए आमंत्रित किया है. सूचना एवं प्रसारण मंत्री भी फ्रांस के इस महा फिल्म समारोह के ‘भारतीय मंडप’ का फोकस इसी बात पर रख रहे हैं कि भारत की ब्रांडिंग विश्व के कंटेंट हब के रूप में हो. यह भारतीय मंडप हमारी भाषाई, सांस्कृतिक और क्षेत्रीय विविधताओं में भारतीय सिनेमा को दर्शायेगा.

इस बार कान समारोह की जूरी में जहां भारत से दीपिका पादुकोण हैं, वहीं कई भारतीय फिल्मों का प्रदर्शन भी होने जा रहा है, जिनमें छह नयी फिल्में प्रमुख हैं. इनमें सर्वाधिक चर्चा आर माधवन की फिल्म ‘रॉकेट्री- द नांबी इफेक्ट’ की है क्योंकि इस फिल्म का कान में विश्व प्रीमियर होने के कारण इसका प्रदर्शन पलाइस में होगा. हिंदी, अंग्रेजी और तमिल की इस फिल्म में नांबी नारायण के जीवन का चित्रण है.

इसके अलावा ओलंपिया थियेटर में पांच नयी भारतीय फिल्मों का प्रदर्शन होगा. इनमें शंकर श्रीकुमार की ‘अल्फा बीटा गामा’ हिंदी फिल्म है. निखिल महाजन की ‘गोदावरी’ मराठी की और जयराज की ‘ट्री फुल ऑफ पैरेट्स’ मलयालम फिल्म है. बिस्वजीत बोरा की मिशिंग भाषा की ‘बूम्बा राइड’ है, तो अचल मिश्रा की हिंदी-मैथिली फिल्म ‘धुईं’ भी समारोह का आकर्षण है. इन फिल्मों के साथ कुछ और भारतीय फिल्मों का प्रदर्शन समारोह के विभिन्न वर्गों में होगा.

यशस्वी भारतीय फिल्मकार सत्यजित रे की कालजयी बांग्ला फिल्म ‘प्रतिद्वंद्वी’ को क्लासिक सेक्शन ‘सिनेमा डे ला प्लेगे’ में प्रदर्शित किया जायेगा. हालांकि ‘प्रतिद्वंद्वी’ के कुछ मूल नेगेटिव नष्ट हो गये थे, लेकिन भारतीय फिल्म अभिलेखागार ने इस फिल्म को पुनर्स्थापित कर नया संस्करण तैयार किया है. सत्यजित रे का यह जन्म शताब्दी वर्ष है. उनकी कई फिल्में कान सहित विश्व के कई अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में पुरस्कृत होती रही हैं.

उनकी ‘पाथेर पांचाली’ भी कान में सम्मानित हुई थी. क्लासिक वर्ग में जी अरविंदम की फिल्म ‘थम्प’ (द सर्कस टेंट) का प्रदर्शन भी होगा. ‘गोज टू कान’ वर्ग में भी भारत की पांच फिल्में हैं- ‘एक जगह अपनी’, ‘बैलादीला’, ‘बागजान’, ‘फालोवर’ और ‘शिवम्मा’. यूं कान फिल्म समारोह में भारत तब भी चर्चित होता रहा, जब हमारी 'बूट पालिश', 'दो बीघा जमीन', 'सलाम बॉम्बे', 'द लंच बॉक्स', 'मसान' और 'खारिज' जैसी फिल्में विभिन्न पुरस्कारों से पुरस्कृत होती रहीं, लेकिन इस बार भारत को जो चर्चा और जो सम्मान कान समारोह में मिल रहा है, वह अद्भुत है. इससे निश्चय ही वैश्विक सिनेमा में भारतीय सिनेमा को नया शिखर मिलेगा.

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