मनुष्य के सपनों की नयी उड़ान है आर्टेमिस 2

Updated at : 10 Apr 2026 1:15 PM (IST)
विज्ञापन
Artemis 2

आर्टेमिस 2

Artemis 2 : आर्टेमिस 2 उस लंबे सफर का अगला पड़ाव है, जिसकी शुरुआत लगभग 50 वर्ष पहले हुई थी. वर्ष 1960-70 के दशक में अपोलो प्रोग्राम ने दुनिया को चौंका दिया था. खासकर अपोलो 11 ने, जब पहली बार मनुष्य ने चांद पर कदम रखा था.

विज्ञापन

Artemis 2 : एक अप्रैल, 2026 को मानवता ने एक बार फिर इतिहास रचने की दिशा में तब महत्वपूर्ण कदम उठाया, जब आर्टेमिस 2 का अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित जॉन एफ केनेडी स्पेस सेंटर से सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में प्रक्षेपण हुआ. यह सिर्फ एक अंतरिक्ष मिशन नहीं है, बल्कि मानव सभ्यता के सपनों, हिम्मत और भविष्य की नयी उम्मीदों का प्रतीक है. नासा द्वारा संचालित यह मिशन इस बात का प्रमाण है कि मानवीय जिज्ञासा कभी समाप्त नहीं होती. यह मिशन वर्तमान पीढ़ी के लिए एक संदेश है कि हम सिर्फ धरती तक सीमित नहीं हैं, हमारा भविष्य अंतरिक्ष की समझ के साथ आगे बढ़ रहा है.


आर्टेमिस 2 उस लंबे सफर का अगला पड़ाव है, जिसकी शुरुआत लगभग 50 वर्ष पहले हुई थी. वर्ष 1960-70 के दशक में अपोलो प्रोग्राम ने दुनिया को चौंका दिया था. खासकर अपोलो 11 ने, जब पहली बार मनुष्य ने चांद पर कदम रखा था. वर्ष 1972 में अपोलो 17 के बाद मनुष्य का चांद पर जाना स्थगित रहा. इसके बाद कई वर्षों तक अंतरिक्ष मिशन सिर्फ पृथ्वी की नजदीकी कक्षा तक सीमित रहे. लेकिन मनुष्य जिज्ञासु होता है. इसी मानवीय जिज्ञासा के कारण आर्टेमिस प्रोग्राम की शुरुआत हुई. इस प्रोग्राम का उद्देश्य सिर्फ चांद पर जाना नहीं, वहां लंबे समय तक रहना, रिसर्च करना और आगे मंगल ग्रह तक पहुंचने का रास्ता तैयार करना था. इस सफर की पहली सफलता थी आर्टेमिस 1, जो 2022 में मानवरहित चांद पर गया और सुरक्षित वापस लौटा.

इस मिशन ने साबित किया कि रॉकेट सिस्टम तकनीकी रूप से मनुष्य को चांद पर ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार है. अब आर्टेमिस 2 उसी सफलता को आगे बढ़ाते हुए चार अंतरिक्ष यात्रियों के साथ ‘इंटीग्रिटी’ नामक मिशन पर करीब 10 दिनों की यात्रा पर निकला है. यह मिशन चांद की कक्षा में जाकर वापस पृथ्वी पर लौटेगा. पिछले 50 वर्षों में यह पहली बार है, जब मनुष्य पृथ्वी की नजदीकी कक्षा से बाहर गया है. इस मिशन में इस्तेमाल की गयी अंतरिक्ष प्रक्षेपण प्रणाली (एसएलएस) को दुनिया का सबसे शक्तिशाली रॉकेट माना जाता है. एक अनुमान के अनुसार, यह रॉकेट एक बार में लगभग 27 लाख किलोग्राम तक का यांत्रिक बल उत्पन्न कर सकता है.


आर्टेमिस 2 में इस्तेमाल होने वाला ओरियन अंतरिक्ष यान आधुनिक तकनीक का शानदार उदाहरण है. इसमें एडवांस लाइफ सपोर्ट सिस्टम है, जो अंतरिक्ष यात्रियों को ऑक्सीजन, पानी देता है और तापमान नियंत्रण में मदद करता है. यह यान लगभग 40,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से यात्रा कर सकता है. यदि सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो यह मिशन अपोलो 13 मिशन का रिकॉर्ड भी तोड़ सकता है, जिसमें मनुष्य ने पृथ्वी से सबसे अधिक दूरी तय की थी. आर्टेमिस 2 की सबसे बड़ी सफलता यह नहीं है कि यह चांद पर पहुंच रहा है, बल्कि यह है कि यह मनुष्य को सुरक्षित रूप से गहरे अंतरिक्ष में ले जाकर वापस ला रहा है. यह मिशन भविष्य के बड़े मिशनों के लिए एक परीक्षण है. इसके जरिये यह देखा जाना है कि मनुष्य लंबे समय तक अंतरिक्ष में कैसे रह सकता है, वहां के रेडिएशन का शरीर पर क्या असर होता है, और तकनीक कितनी भरोसेमंद है.

इसका मकसद है चांद को और अच्छे से समझना, विज्ञान और आर्थिकी के लिए नये मौके बनाना तथा मंगल पर मनुष्य को भेजने की तैयारी करना. आगे की योजनाएं और भी रोमांचक हैं. अगला मिशन आर्टेमिस 3 होगा, जिसमें मनुष्य दोबारा चांद की सतह पर कदम रखेगा. इसके बाद नासा चांद पर एक स्थायी बेस (लूनर बेस) बनाने की योजना बना रहा है. इस बेस का इस्तेमाल वैज्ञानिक शोध और नये संसाधनों की खोज के लिए किया जायेगा. वैज्ञानिकों का मानना है कि चांद पर मौजूद बर्फ को पानी, ऑक्सीजन और रॉकेट फ्यूल में बदला जा सकता है. इससे भविष्य के मिशन और भी आसान हो जायेंगे. आर्टेमिस 2 केवल एक अंतरिक्ष मिशन नहीं है, यह मानवता के भविष्य की नींव है. इससे नयी तकनीकों का विकास होगा, जो धरती पर भी काम आयेंगी. जैसे, बेहतर मेडिकल उपकरण, संचार तकनीक और ऊर्जा के नये स्रोत.


भारत के लिए भी यह मिशन बहुत महत्व रखता है. इसरो ने बीते कुछ वर्षों में अंतरिक्ष के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं. चंद्रयान-3 की सफलता ने भारत को दुनिया के चुनिंदा देशों में शामिल कर दिया, जिन्होंने चांद पर सफल लैंडिंग की है, वह भी चांद के दक्षिणी ध्रुव पर, जो अब तक सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र माना जाता था. इसके अतिरिक्त, मंगलयान ने साबित किया कि भारत कम लागत में भी बड़े अंतरिक्ष मिशन कर सकता है. आर्टेमिस प्रोग्राम भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नये अवसर खोलता है. आने वाले समय में भारत भी इन मिशनों का हिस्सा बन सकता है, जिससे देश की तकनीकी क्षमता और बढ़ेगी. भारत का अपना मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. आज जब आर्टेमिस 2 चांद के पास अपनी यात्रा कर रहा है, तो यह केवल चार अंतरिक्ष यात्रियों को नहीं ले जा रहा, बल्कि पूरी मानवता के सपनों को नयी उड़ान के लिए तैयार कर रहा है. अंत में, आर्टेमिस 2 हमें याद दिलाता है कि हम सिर्फ पृथ्वी के निवासी नहीं हैं, हम अन्वेषक हैं. (ये लेखक के निजी विचार हैं.)

विज्ञापन
पीके जोशी

लेखक के बारे में

By पीके जोशी

सेंटर फॉर स्पेस साइंस एंड टेक्नोलोजी एजूकेशन इन एशिया एंड पैसिफिक से संबद्ध रहे हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola