विश्वास का संकट

Updated at : 02 Mar 2017 6:33 AM (IST)
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विश्वास का संकट

नफरत के इरादे से दो भारतीय इंजीनियरों पर किया गया जानलेवा हमला अमेरिका में बदलते माहौल का स्पष्ट संकेत है. अमेरिकी शहर कंसास मेें हुए हमले में श्रीनिवास कुचिभोतला की मौत हो गयी, जबकि अलोक मदासानी घायल हो गये थे. हमले के बाद भारतीय समुदाय में अविश्वास और असुरक्षा की भावना का घर कर जाना […]

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नफरत के इरादे से दो भारतीय इंजीनियरों पर किया गया जानलेवा हमला अमेरिका में बदलते माहौल का स्पष्ट संकेत है. अमेरिकी शहर कंसास मेें हुए हमले में श्रीनिवास कुचिभोतला की मौत हो गयी, जबकि अलोक मदासानी घायल हो गये थे. हमले के बाद भारतीय समुदाय में अविश्वास और असुरक्षा की भावना का घर कर जाना स्वाभाविक ही है.
दरअसल, अप्रवासियों और मुसलिमों के विरोध की पृष्ठभूमि ट्रंप ने अपने चुनाव अभियान के दौरान ही तैयार कर दी थी. ट्रंप के सत्ता में आने के बाद तमाम अंदेशों से घिरे ऐसे सवालों का उठना लाजिमी ही है. हालांकि, लगभग हफ्ते भर बाद ट्रंप ने कांग्रेस के संयुक्त सत्र में हमले की निंदा की और नफरत भरी हिंसा पर विरोध भी जताया. लेकिन, शुरुआत में व्हाॅइट-हाउस ने हिंसा के दोषी एडम पुरिंटन के ट्रंप की बयानबाजी से प्रभावित होने की बात नकार दी थी. बढ़ते दबावों के बीच पांच दिनों के बाद आधिकारिक रूप से बयान जारी किया गया. होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, 2013-14 में जारी किये गये कुल एच1बी वीजा 3,15,857 में से 2,20,287 वीजा भारतीयों के लिए जारी किये गये. लगभग 1,66,000 भारतीय छात्र अमेरिका में पढ़ाई करते हैं.
ऐसे में बड़ी संख्या में अमेरिका में रहनेवाले भारतीय समुदाय के लिए सुरक्षा और विश्वास को कायम रखने की चुनौती न केवल अमेरिकी प्रशासन की है, बल्कि भारत सरकार के लिए भी बड़ा मुद्दा है. अमेरिका में हाल के महीनों में जातीय और नस्लीय नफरत से जुड़े हिंसक मामले बढ़े हैं, जिसका सीधे तौर पर खामियाजा भारतीयों और अन्य अप्रवासियों को उठाना पड़ा है. साउदर्न पावर्टी लॉ सेंटर की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के सत्ता में आने के बाद नफरत से जुड़े अपराधों का आंकड़ा इक्का-दुक्का से बढ़ कर 200 रोजाना हो गया है.
न्यूयार्क पुलिस विभाग के प्रमुख रॉबर्ट बॉयस का यह कहना है कि पिछले कुछ महीनों में पक्षपाती अपराधों में 115 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, निश्चित ही यह अमेरिका में बढ़ती असहिष्णुता के खतरे के संकेत हैं. अस्पष्ट नीतियों के साथ अप्रत्याशित फैसले ले रहे ट्रंप प्रशासन के साथ तालमेल बिठाने में भारत को तमाम चुनौतियाें का सामना करना है.
अमेरिकी दौरे पर गये भारतीय विदेश सचिव एस जयशंकर द्वारा भारतीयों की सुरक्षा से जुड़े मामलों के उठाये जाने की पूरी उम्मीद है. साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित दौरे से पहले दोनों देशों को भारतीय समुदाय के सुरक्षा, एच1बी और भारतीय पेशेवरों से जुड़े मामलों के हल के लिए सकारात्मक पृष्ठिभूमि तैयार करना होगा.
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