जरूरी श्रम सुधार

Updated at : 27 Feb 2017 6:11 AM (IST)
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जरूरी श्रम सुधार

श्रम कानूनों और संबंधित प्रशासनिक तंत्र में कई तरह के सुधारों की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है ताकि बदलती परिस्थितियों में कामगारों और नियोक्ताओं के लिए सकारात्मक वातावरण बनाया जा सके. केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने इस दिशा में दो बहुत महत्वपूर्ण पहलें की हैं. एक, मौजूदा 44 श्रम कानूनों को चार […]

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श्रम कानूनों और संबंधित प्रशासनिक तंत्र में कई तरह के सुधारों की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है ताकि बदलती परिस्थितियों में कामगारों और नियोक्ताओं के लिए सकारात्मक वातावरण बनाया जा सके. केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने इस दिशा में दो बहुत महत्वपूर्ण पहलें की हैं.
एक, मौजूदा 44 श्रम कानूनों को चार संहिताओं में संग्रहित किया जा रहा है, तथा दूसरा, कंपनियों द्वारा रखी जानेवाली श्रम पंजियों की संख्या को 56 से घटा कर मात्र पांच किया जा रहा है.
श्रम कानूनों की संहिताओं को वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा तथा संरक्षा, स्वास्थ्य और काम की स्थितियां शीर्षकों के तहत विभाजित किया गया है. इन्हें संसद की मंजूरी के लिए आगामी सत्रों में पेश किया जायेगा. कानूनों के बिखरे होने के कारण कामगारों और रोजगार-प्रदाताओं को उन्हें इस्तेमाल में लाने में असुविधा होती है. संहिता बन जाने से सुगम होने के साथ उनकी स्पष्टता भी बढ़ जायेगी. इससे कानूनी प्रक्रिया की पेचीदगी भी कम होने की उम्मीद है. इन संहिताओं को तैयार करने में सरकार विशेषज्ञों के साथ सभी संबद्ध पक्षों से राय-सलाह कर रही है. इससे यह भरोसा पैदा होता है कि कामगारों और कंपनियों के हितों को सुरक्षित रखते हुए इन्हें अंतिम रूप दिया जायेगा. देश की करीब 5.85 करोड़ कंपनियों को 56 श्रम रजिस्टर रखने होते हैं.
इनकी संख्या पांच तक लाने से न सिर्फ सूचनाओं के दुहराव से बचा जा सकेगा, बल्कि संसाधन और समय की बचत भी होगी. इन 56 पंजियों में 933 तरह की सूचनाएं भरनी होती है. अब मात्र 144 सूचनाएं रखनी होंगी. इन पंजियों के लिए सॉफ्टवेयर भी विकसित किया जा रहा है. अधिक और गैरजरूरी सूचनाओं के सीमित होने से श्रम कानूनों के बेहतर पालन की गुंजाइश भी बनेगी तथा पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलेगी.
समावर्ती सूची में श्रम के होने के कारण सरकार ने एक आदर्श कानून का प्रारूप राज्यों को दिया है. इन पहलों पर अमल के बाद श्रम कानूनों में अपेक्षित बदलाव की ठोस पृष्ठभूमि तैयार हो सकती है. उम्मीद है कि सरकार समुचित सोच-विचार कर त्वरित कदम उठायेगी और इस कोशिश में इस बात का पूरा ख्याल रखेगी कि कामगारों तथा कंपनियों के हितों पर नकारात्मक प्रभाव न हो.
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