खाप की पहल और लोकतांत्रिक संस्थाएं

Published at :10 Feb 2014 4:43 AM (IST)
विज्ञापन
खाप की पहल और लोकतांत्रिक संस्थाएं

खाप पंचायतें अक्सर अपने रूढ़िवादी फैसलों की सुर्खियों के साथ ही हमसे रू-ब-रू होती हैं. प्रेम-विवाह का कड़ा विरोध और कम उम्र में शादी की हिमायत जैसे फैसलों के कारण खाप पर पाबंदी की मांग भी उठती रही है. इसमें दो राय नहीं हो सकती कि खापों के अनेक निर्णय संविधान और कानून-व्यवस्था के विरुद्ध […]

विज्ञापन

खाप पंचायतें अक्सर अपने रूढ़िवादी फैसलों की सुर्खियों के साथ ही हमसे रू-ब-रू होती हैं. प्रेम-विवाह का कड़ा विरोध और कम उम्र में शादी की हिमायत जैसे फैसलों के कारण खाप पर पाबंदी की मांग भी उठती रही है. इसमें दो राय नहीं हो सकती कि खापों के अनेक निर्णय संविधान और कानून-व्यवस्था के विरुद्ध हुए हैं तथा इससे कई लोग हिंसक हमलों के शिकार या गांव छोड़ने पर मजबूर हो चुके हैं, जिसे रोकने की जरूरत है. लेकिन खाप पंचायतों की सामाजिक-सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के आधार पर उनके प्रति नरम रुख रखनेवाले भी कम नहीं हैं.

हाल में विभिन्न खाप पंचायतों ने कुछ ऐसे फैसले भी सुनाये हैं, जो अपने चरित्र में न केवल प्रगतिशील हैं, बल्कि सामाजिक सुधार की दृष्टि से बहस योग्य भी हैं. इसी कड़ी में हरियाणा के गांव बहीन में चल रही 108 खापों की विशाल ‘सर्व खाप पंचायत’ ने खर्चीली शादियों, नशाखोरी और मृत्यु या अन्य शोक समारोहों में भोज पर रोक की पहल की है. फैसले के अनुसार बारात में अधिकतम 51 लोग ही शामिल हो सकते हैं, दहेज में अधिकतम 25 ग्राम सोना, 200 ग्राम चांदी और आवश्यक कपड़े ही भेंट किये जा सकते हैं, कन्यादान में अधिकतम 51 रुपये का ही लेन-देन हो सकता है. पिछले साल पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हुई सर्वखाप पंचायत ने कन्या भ्रूण हत्या रोकने की पहल की थी.

कई खाप पंचायतों ने स्त्री-शिक्षा, पानी बचाने, खेती में रासायनिक पदार्थो का कम इस्तेमाल आदि को लेकर भी समय-समय पर फैसले सुनाये हैं. हालांकि ऐसी सकारात्मक पहल मीडिया में कम ही जगह पाती हैं. राजनेता वोट के लालच में जहां खापों के गलत फैसलों का विरोध करने से बचते हैं, वहीं उनकी अच्छी बातों को भी इसलिए नजरअंदाज कर देते हैं, ताकि उन्हें खापों का तरफदार न मान लिया जाये. हमें ध्यान रखना चाहिए कि देश के कई हिस्सों में पारंपरिक सामुदायिक व्यवस्था इसलिए भी मौजूद हैं, क्योंकि आधुनिक लोकतांत्रिक संस्थाएं उनकी जगह नहीं ले पायी हैं. इसलिए जरूरी है कि आधुनिक लोकतांत्रिक संस्थाएं संवेदनशीलता के साथ परंपरागत संस्थाओं-समाजों के साथ साझापन विकसित करें, ताकि विभिन्न समाजों व मान्यताओं वाला देश अधिक-से-अधिक लोकतांत्रिक बनने की और अग्रसर होता रहे.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola