प्रशासनिक विफलता से राज्य बेहाल

Published at :07 Feb 2014 5:10 AM (IST)
विज्ञापन
प्रशासनिक विफलता से राज्य बेहाल

बिहार से झारखंड विकास के नाम पर अलग हुआ था, ताकि उसका लाभ यहां के मूलवासियों को मिले. लेकिन आज झारखंड फिसड्डी राज्यों की कतार में खड़ा है. जबकि यहां की धरती रत्नगर्भा है. उद्योग घराने यहां निवेश करने को सहर्ष तैयार हैं, बशर्ते उन्हें राजनीतिक और सामाजिक संरक्षण मिले. यह संरक्षण उन्हें देगा कौन? […]

विज्ञापन

बिहार से झारखंड विकास के नाम पर अलग हुआ था, ताकि उसका लाभ यहां के मूलवासियों को मिले. लेकिन आज झारखंड फिसड्डी राज्यों की कतार में खड़ा है. जबकि यहां की धरती रत्नगर्भा है. उद्योग घराने यहां निवेश करने को सहर्ष तैयार हैं, बशर्ते उन्हें राजनीतिक और सामाजिक संरक्षण मिले. यह संरक्षण उन्हें देगा कौन? सरकार ही न! लेकिन यहां सरकार कहां है?

आये दिन छोटी-छोटी बातों पर झारखंड बंद होता है और सरकार मूकदर्शक बन कर तमाशा देखती है. जिस राज्य में सरकार की बागडोर तरह-तरह के माफियाओं के हाथ में हो, वह राज्य कैसे विकास कर सकता है? यहां बेरोजगारी और पलायन बढ़ता जा रहा है. आज भी झारखंड का शोषण अपने ही पोषकों द्वारा किया जा रहा है. जब तक यहां सुरक्षित वातावरण नहीं बनेगा, तब तक राज्य बीमार रहेगा और आम जनता बेहाल रहेगी.

सतीश कुमार सिंह, रांची

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola