कैदियों के इंतजार का दर्द समझें

झारखंड के विभिन्न जेलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 65 कैदी रिहाई की राह देख रहे हैं. इन कैदियों की रिहाई का फैसला राज्य सरकार की पुनरीक्षण पर्षद की बैठक पर टिकी है. पर्षद में मुख्यमंत्री, गृह सचिव, जेल आइजी, विधि सचिव, प्रधान प्रोबेशन पदाधिकारी और पुलिस विभाग से एक आइजी होते हैं. […]
झारखंड के विभिन्न जेलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 65 कैदी रिहाई की राह देख रहे हैं. इन कैदियों की रिहाई का फैसला राज्य सरकार की पुनरीक्षण पर्षद की बैठक पर टिकी है. पर्षद में मुख्यमंत्री, गृह सचिव, जेल आइजी, विधि सचिव, प्रधान प्रोबेशन पदाधिकारी और पुलिस विभाग से एक आइजी होते हैं. अब जरा इस हालात को समझने की कोशिश कीजिए.
कानून की किताबों में लिखी यह मशहूर पंक्ति सब जानते हैं- एक भी निदरेष को सजा न हो, भले सौ दोषी छूट जाएं. और, जेल में थोड़े समय के लिए भी किसी को बेवजह नहीं रखा जाना चाहिए. पर यहां तो मामला अजब-गजब है. हर विभाग की तरह ही सरकार की यह पर्षद भी सुस्त चाल चल रही है. इन्हें इससे क्या मतलब कि जेल में कट रहा एक-एक पल किसी की जिंदगी का कितना महत्वपूर्ण हो सकता है. उम्रकैद की सजा काट रहे इन कैदियों के सामने नयी जिंदगी शुरू करने का एक अवसर है. इन कैदियों के घरवाले मुद्दत से इनका इंतजार कर रहे होंगे.
किसी के पत्नी-बच्चे तो किसी के मां-बाप. पर यह तो सरकारी महकमा है बाबू! यहां तो बस ऐसे ही चलता है..! सरकारी नौकरी पाने की ख्वाहिश इसीलिए तो लोगों की पहली पसंद होती है. ताकि सबकुछ अपने मनमाफिक कर सकें. जिम्मेवारियों का बोझ तो कतई बरदाश्त नहीं होता. स्वच्छंदता चाहिए. स्वच्छंदता काम न करने की, स्वच्छंदता मनमानी करने की, स्वच्छंदता काम को टालते रहने की. ऐसे में जनता की भारी-भरकम उम्मीदें पहाड़ बनती जाती हैं. और फिर शुरू हो जाता है नाउम्मीदी का सिलसिला. नाउम्मीदी से नाराजगी पनपती है और नाराजगी से विद्रोह.
बताने की जरूरत नहीं कि झारखंड में पुनरीक्षण पर्षद की बैठक पिछले एक वर्ष से नहीं हुई है. इसी असंतोष की उपज है राज्य के पांच जेलों में चल रही कैदियों की हड़ताल. इसी बहाने एक और बात जेहन में आ रही है जिस पर गौर फरमाने की जरूरत है. मामला है जेल के भीतर के हालात. बहुतायत बार यह बात उजागर हो चुकी है कि जेलों के अंदर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा. कैदियों को न्यूनतम सुविधाओं के लिए भी जद्दोजहद करना पड़ता है. बहरहाल, उम्मीद की जानी चाहिए कि पुनरीक्षण पर्षद नींद से जागेगा और इन कैदियों का भला हो सकेगा.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










