आप ही छलकने लगे हैं पैमाने

Published at :05 Feb 2014 3:56 AM (IST)
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आप ही छलकने लगे हैं पैमाने

।। मिथिलेश झा।।(प्रभात खबर, रांची) कांग्रेस की अगुवाई में यूपीए सरकार ने 10 साल में ऐसे-ऐसे काम किये, जो 65 साल में कोई सरकार नहीं कर पायी. कसम से, सरकार की ईमानदारी पर कुरबान जाऊं. गरीबी तो इतनी घटी कि अब कुछ ही दिनों की बात है. देश से गरीबी मिटने ही वाला है. यह […]

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।। मिथिलेश झा।।
(प्रभात खबर, रांची)

कांग्रेस की अगुवाई में यूपीए सरकार ने 10 साल में ऐसे-ऐसे काम किये, जो 65 साल में कोई सरकार नहीं कर पायी. कसम से, सरकार की ईमानदारी पर कुरबान जाऊं. गरीबी तो इतनी घटी कि अब कुछ ही दिनों की बात है. देश से गरीबी मिटने ही वाला है. यह सब कर दिखाया है मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी की जोड़ी ने. राहुल बाबा भी फॉर्म में आ रहे हैं. जब ‘मौन’मोहन ने इतने काम कर दिये, तो राहुल कमाल ही कर देंगे. हमको तो भरोसा था कि इस बार जो चुनाव होंगे, तो राहुल बाबा के नेतृत्व में कांग्रेस देश का कायाकल्प कर देगी. गरीबी तो रहेगी नहीं. लेकिन, ई क्या? ‘फेंकू’ की सरकार ने तो राहुल बाबा की पतंग बीच में ही काट दी. ई तो ‘अनर्थशास्त्री’ से भी आगे निकल गये. राहुल को पीएम बनने से रोकने के लिए इसने ऐसी चाल चली कि कांग्रेस चारो खाने चित्त. भैया, इसने तो कांग्रेस से भी तेजी से गरीबी कम कर दी. अभी नहीं पता चला है कि गुजरात में गरीबी कितनी घटी है, लेकिन इतना तो पक्का है कि गरीबों का नाम-ओ-निशान ही मिटनेवाला है.

सच कहता हूं, पहले मनमोहन और अब मोदी के कारनामे के बाद पूरा भरोसा हो गया है कि देश की गली-गली में गरीब घूमेंगे, लेकिन कागज पर गरीबी कहीं नहीं दिखेगी. इनके कारनामों ने बचपन की याद दिला दी. आठवीं में पढ़ता था, जब शास्त्री सर हमें इतिहास पढ़ाते थे. ऐसा पढ़ाते थे कि वही पढ़ाते थे. हम तो किताब के पन्ने ही पलटते रहते थे. मैं अकेला बुड़बक नहीं था भाई, सारे के सारे ऐसे ही थे. कोर्स पूरा नहीं होता, तो मास्टरजी किताब पढ़ाना शुरू कर देते थे. औरंगजेब के जन्म की कहानी शुरू करते और एक पन्ने के बाद शाहजहां की मौत के बाद का पाठ पढ़ाना शुरू कर देते. हम सब अवाक! ई कौन-सा पैरा पढ़ रहे हैं मास्टरजी? पहले डांटते, जैसे सिब्बल सवाल पूछने पर डांटते हैं. यदि 20 नंबर पन्ने से पढ़ना शुरू किया, तो कहते कि 28 नंबर पेज का तीसरा पैरा देखो. यानी, सात पन्ना फर्लाग गये, वहां भी दो पैरा पार.

यही हाल देश का भी है. गरीबी नहीं मिटा पाये, तो ऐसा फॉमरूला लाये कि कोई गरीब रह नहीं जाये. गरीबी मिटाने का मिलेनियम डेवलपमेंट गोल पूरा करने के लिए यूपीए सरकार ने गांव में 26 और शहर में 32 रुपये रोज कमानेवाले को गरीबी रेखा से बाहर कर दिया. इससे 50 फीसदी से अधिक गरीबी कम हो गयी. कांग्रेस ने उपलब्धियां गिनानी शुरू की और कहा कि गुजरात में बहुत गरीबी है, तो मोदी तैस में आ गये. उन्होंने ऐसा फॉमरूला बनाया कि कांग्रेस ने दांतों तले अंगुली दबा ली. मोदी सरकार ने गांव में 11 और शहर में 17 रुपये कमानेवाले को गरीबी रेखा से बाहर निकालने का एलान कर दिया. मोदी, जिसे कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ‘फेंकू’ कहते हैं, ने ऐसी फेंकी कि कांग्रेस अब लपेटने की जुगत में लगी है. गुजरात ने गरीबी का जो पैमाना पेश किया है, उसके बाद तो कांग्रेस के सारे पैमाने छलक गये हैं.

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