हर इनसान की जिंदगी है जरूरी

गोल्डन आवर सिस्टम की शुरुआत कर झारखंड सरकार ने यह जताने की कोशिश की है कि उसे हर किसी की जान की परवाह है. इस सिस्टम का मतलब है, हादसे की स्थिति में पहले एक घंटे का महत्वपूर्ण होना. किसी भी दुर्घटना में पहला घंटा इतना महत्वपूर्ण होता है कि अगर उस दौरान इलाज शुरू […]
गोल्डन आवर सिस्टम की शुरुआत कर झारखंड सरकार ने यह जताने की कोशिश की है कि उसे हर किसी की जान की परवाह है. इस सिस्टम का मतलब है, हादसे की स्थिति में पहले एक घंटे का महत्वपूर्ण होना. किसी भी दुर्घटना में पहला घंटा इतना महत्वपूर्ण होता है कि अगर उस दौरान इलाज शुरू हो जाये तो जान बचायी जा सकती है. अक्सर देखा जाता है कि दुर्घटना में मौत अधिक खून बहने से हो जाती है.
अब प्रदेश में हादसों में मरनेवालों की संख्या कम होने की उम्मीद है. इस सिस्टम के तहत दुर्घटना होते ही ट्रैफिक पुलिस नजदीकी अस्पताल को फोन कर एंबुलेंस मंगवा लेगी और तत्काल इलाज शुरू हो जायेगा. अब तक ऐसी कोई सेवा नहीं थी, जिससे परिजनों के आते-आते जान चली जाती थी. पुलिस भी अस्पतालों की लंबी प्रक्रिया व खर्च को देख कर इलाज के लिए तत्काल पहल नहीं करती थी. क्या यह किसी की जान के साथ खिलवाड़ नहीं था? मुख्यमंत्री ने नये सिस्टम की शुरुआत कर संवेदनशीलता दिखायी है, पर लोगों को अब भी सजग रहने की जरूरत है.
तेज रफ्तार में गाड़ी चलाना और ट्रैफिक नियमों को तोड़ना ज्यादातर हादसों की वजह होती है. ऐसा करने से बचना होगा. वहीं ट्रैफिक पुलिस को अब और चौंकन्ना रहना होगा. ट्रैफिक नियमों का पालन सुनिश्चित कराना होगा. दरअसल, किसी भी सिस्टम की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसका क्रियान्वयन कैसे हो रहा है. गोल्डन आवर सिस्टम से जुड़े अस्पतालकर्मियों की जवाबदेही ज्यादा होगी कि कैसे एक घंटे के अंदर दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति का समुचित इलाज शुरू हो? अस्पताल प्रबंधन व राज्य सरकार के बीच इलाज के पैसे को लेकर समन्वय की जरूरत होगी.
ट्रैफिक पुलिस व स्थानीय पुलिस के बीच संवाद जरूरी है. दुर्घटना कैसी भी हो, पहले उसका इलाज हो, फिर पुलिसिया कार्रवाई शुरू होनी चाहिए. अगर यह सब ठीक से चला, तो निश्चित रूप से सरकार की यह पहल मिसाल साबित होगी. आम लोगों को भी सरकार की इस पहल में मदद करनी चाहिए. डायल नंबर 108 को उपयोगी बनाने की जरूरत है. प्रदेश में सड़क हादसों के अन्य कारणों यथा- जजर्र सड़कें, यातायात व्यवस्था के समुचित संचालन आदि को दुरुस्त करने की दिशा में भी काम करना चाहिए.
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