संभावनाओं की एक तसवीर

Published at :02 Feb 2014 3:41 AM (IST)
विज्ञापन
संभावनाओं की एक तसवीर

।। एमजे अकबर।।(वरिष्ठ पत्रकार)खबर और उसके कारण के बीच अक्सर उसकी परछाई भी आती है. मराठी अखबार में छपी यह खबर पुख्ता नहीं थी कि शरद पवार ने नरेंद्र मोदी से मुलाकात की, लेकिन यह सही लगी. अखबार ने साक्ष्य के लिए पर्याप्त पड़ताल नहीं की और परिस्थितिजन्य सबूतों को तरजीह दी. ऐसे सबूत खबर […]

विज्ञापन

।। एमजे अकबर।।
(वरिष्ठ पत्रकार)
खबर और उसके कारण के बीच अक्सर उसकी परछाई भी आती है. मराठी अखबार में छपी यह खबर पुख्ता नहीं थी कि शरद पवार ने नरेंद्र मोदी से मुलाकात की, लेकिन यह सही लगी. अखबार ने साक्ष्य के लिए पर्याप्त पड़ताल नहीं की और परिस्थितिजन्य सबूतों को तरजीह दी. ऐसे सबूत खबर प्रकाशित करने के अखबार के फैसले को जायज नहीं बना सकते. इस खबर का महत्व क्या है और इसे क्यों छापा गया, अखबार को बताना चाहिए.

पवार ने इख खबर को नकार दिया. हमें उनकी बात माननी चाहिए. लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि शरद पवार कभी भी भाजपा नेताओं से अकेले में नहीं मिले हैं. वे मिले हैं और उन्हें ऐसा करने का हक भी है. बातचीत करने के लिए दो नेताओं का एक ही दल से होना जरूरी नहीं है. यही हमारे लोकतंत्र की खूबी है. लेकिन हमेशा टीवी कैमरों की निगाहों में रहने के दौर में ऐसा काफी मुश्किल हो गया है. हर दौरे में मोदी के पीछे पत्रकार लगे रहते हैं. चुनाव के समय में तो नेताओं के लिए कोई जगह सुरक्षित नहीं है.

यह खबर केवल इसलिए प्रकाशित की गयी, क्योंकि अखबार ने मौजूदा तथ्यों पर नहीं, बल्कि पुराने रिकार्ड पर भरोसा किया. पवार की नजर काफी तेज है और वह हमेशा जीतनेवाले पक्ष की ओर होती है. जमीनी स्तर की हकीकत को भांप कर और अपने निजी अनुभवों के आधार पर वे कांग्रेसी और गैर कांग्रेसी गंठबंधन में से कौन बेहतर है, इस बारे में जान गये है. वे राजनीतिक फैसलों में नाराजगी या पसंद-नापसंद के मुद्दे को हावी नहीं होने देते हैं. आलोचक इसे अनैतिक कहते हैं, लेकिन वे इसे हारनेवालों का विशेषाधिकार बता कर खारिज कर देते हैं. जब तक पवार जीत रहे हैं, उन्होंने कुछ भी नहीं गंवाया है. उस समय भी, जब वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए छह वर्षो तक सत्ता में रही, पवार ने यह सुनिश्चित किया कि प्रधानमंत्री के साथ उनके व्यक्तिगत संबंध अच्छे बने रहें. उन्हें वाजपेयी ने केंद्रीय मंत्री के रैंक वाला पद दिया था.

महाराष्ट्र की राजनीति में शरद पवार अब तक अग्रणी भूमिका निभाते रहे हैं. वे कभी इतने मूर्ख नहीं रहे कि सीटों के बंटवारे में जरूरत से ज्यादा का दावा करें. 2004 के बाद उन्होंने दिल्ली में अपनी कम ताकत को स्वीकार कर लिया, ताकि बेहतर संबंध बने रहें. लेकिन पवार के साथ कांग्रेस भी जानती है कि राज्य में उनकी ताकत के बिना कांग्रेस कभी सत्ता में नहीं आ सकती है. पवार खेमे के सोच से स्पष्ट जाहिर होता है कि मोदी ने राज्य में इस पैटर्न को कमजोर किया है. मुंबई और पुणो के बीच शहरी क्षेत्रों में मोदी की लहर को देखते हुए कम-से-कम पवार मोदी के प्रति कठोर नहीं दिखना चाहते हैं, ताकि वे उनसे छिटक न जायें. लेकिन उनके लिए बुरी खबर यह है कि इस मुद्दे पर भाजपा और शिवसेना भी पुनर्विचार कर रहे हैं.

पिछले एक दशक से भाजपा पवार को कांग्रेस से अपने पाले में लाने की कोशिश करती रही है, लेकिन इस बार भाजपा और सेना दोनों ने बातचीत शुरू होने से काफी पहले ही कह दिया है कि पवार जहां हैं वहीं बने रहें. भगवा सहयोगियों ने छोटे दलों, लेकिन काफी महत्वपूर्ण, को अपने पाले में करके मत प्रतिशत बढ़ाने का इंतजाम कर लिया है. इन छोटी पार्टियों को जमीनी हकीकत की बेहतर जानकारी होती है. वे अकेले कुछ नहीं कर सकतीं और आम धारणा है कि आगे बढ़ने के लिए बड़ी गाड़ी के साथ हो लेना चाहिए. भारत में किसी अन्य नेता से बेहतर यह बात शरद पवार जानते हैं और इसमें व्यक्तिगत कुछ भी नहीं है. यही आज की राजनीति है. ये हवा के तिनके हैं जो आंधी के बारे में इशारा करते हैं. यह आंधी इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि पिछले एक दशक से महाराष्ट्र यूपीए के लिए सबसे सुरक्षित राज्य रहा है. अगर महाराष्ट्र में कांग्रेस के मौजूदा सांसद फिर जीत हासिल नहीं कर पाते हैं तो पूरे देश में बह रही आंधी में उसके उखड़ने का खतरा है. वहां भी, जैसे पश्चिम बंगाल, ओड़िशा, जहां मोदी जीत नहीं सकते, कांग्रेस का हारना तय लग रहा है. स्वाभाविक तौर पर पवार कांग्रेस की बजाय अपनी पार्टी को लेकर अधिक चिंतित हैं. इसलिए संभवत: उन्हें मोदी से मिलना चाहिए था!

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola