वर्तमान में चाह अतीत की

Published at :31 Jan 2014 4:01 AM (IST)
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वर्तमान में चाह अतीत की

अगर वर्तमान पर अतीत हावी होता है, तो दोषी वर्तमान होता है. यानी वर्तमान में अतीत की याद आती हो, तो स्पष्ट है कि वर्तमान से लोग संतुष्ट नहीं हैं. आज जब देश में हर ओर भ्रष्टाचार, कालाबाजारी, घूसखोरी, व्यभिचार व्याप्त है और जनता नित नयी समस्याओं से त्रस्त है, तो ऐसे में लगता है […]

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अगर वर्तमान पर अतीत हावी होता है, तो दोषी वर्तमान होता है. यानी वर्तमान में अतीत की याद आती हो, तो स्पष्ट है कि वर्तमान से लोग संतुष्ट नहीं हैं. आज जब देश में हर ओर भ्रष्टाचार, कालाबाजारी, घूसखोरी, व्यभिचार व्याप्त है और जनता नित नयी समस्याओं से त्रस्त है, तो ऐसे में लगता है कि काश आज फिर भगत सिंह, चंद्रशेखर जैसे युवा इस देश में पैदा होते, जो इन समस्याओं से मुक्ति दिला कर पुन: देश में शांति, सदाचार का परिवेश स्थापित करते. आज के युवा खुदीराम बोस कम दुर्योधन एवं दु:शासन ज्यादा दिखते हैं, जो नित किसी न किसी द्रौपदी का चीरहरण करते हैं.

जिनके हाथ में हमने देश की बागडोर दी, वे देश को प्रगति के रास्ते से विमुख कर सिर्फ कुरसी की लड़ाई लड़ रहे हैं. आज देश में हर दिन जालियांवाला बाग हत्याकांड हो रहा है. वहां तो लोग एक ही दिन अंगरेजों की गोलियां खाकर मरे थे, लेकिन आज हर दिन गरीबी, तंगी, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, बलात्कार जैसी कई गोलियों से जनता बेमौत मर रही है. इसका कारण सोचा जाये तो इन सारी समस्याओं की जिम्मेवार खुद जनता है, जिन्होंने इस देश की एकता व अखंडता को बिगाड़ रखा है.

अतीत में एक ही जयचंद था, लेकिन आज देश के हर कोने में जयचंद दिखते हैं, जो चंद रुपये के लिए अरविंद केजरीवाल जैसे क्रांतिकारी का साथ न देकर उन लोगों का साथ दे रहे हैं, जो देश को बर्बादी की ओर अग्रसर कर रहे हैं. इन्हीं वजहों से अन्ना हजारे के जन आंदोलन की आवाज जेपी आंदोलन की ही तरह दब कर रह गयी. जिस दिन देश की जनता अपनी शक्ति को पहचान, सच्चई की ओर कदम बढ़ायेगी, उस दिन देश का वर्तमान और भविष्य दोनों सुखमय होगा और अतीत का सिर्फ सबक रह जायेगा.

अपर्णा कुमारी, पोड़ैयाहाट, गोड्डा

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