9.1 C
Ranchi

लेटेस्ट वीडियो

कर्फ्यू और कश्मीर

कश्मीर में असंतोष की चिनगारी बुझने का नाम नहीं ले रही. आजाद भारत में शायद यह पहला मौका है, जब किसी प्रदेश में एक माह से अधिक समय से कर्फ्यू लगा है. धरती का स्वर्ग कहे जानेवाले कश्मीर के कई इलाकों में शिक्षण संस्थान बंद हैं और व्यापारिक गतिविधियां लगभग ठप. हिजबुल कमांडर बुरहान वानी […]

कश्मीर में असंतोष की चिनगारी बुझने का नाम नहीं ले रही. आजाद भारत में शायद यह पहला मौका है, जब किसी प्रदेश में एक माह से अधिक समय से कर्फ्यू लगा है. धरती का स्वर्ग कहे जानेवाले कश्मीर के कई इलाकों में शिक्षण संस्थान बंद हैं और व्यापारिक गतिविधियां लगभग ठप.
हिजबुल कमांडर बुरहान वानी की 8 जुलाई को मुठभेड़ में मौत के बाद से शुरू हुई हिंसक घटनाओं में अब तक 56 लोगों की मौत हो चुकी है, करीब दो हजार सुरक्षाकर्मियों सहित पांच हजार लोग घायल हैं. सुरक्षा कर्मियों की बड़े पैमाने पर तैनाती के बावजूद प्रदर्शनों का सिलसिला थम नहीं रहा. अलगाववादियों ने हड़ताल के आह्वान को 12 अगस्त तक बढ़ा दिया है. इस बीच पुंछ में आइएसआइएस के धमकी भरे पोस्टर लगना संकेत करता है कि यह आतंकी संगठन कश्मीर की अशांति में अपने लिए संभावनाएं तलाश रहा है.
यह ऐसी स्थिति है, जिसका हल गंभीर राजनीतिक प्रक्रिया के जरिये विश्वास बहाली से ही मुमकिन है. ऐसे में कश्मीर के हालात पर सर्वदलीय बैठक बुलाने और राजनीतिक प्रक्रिया बहाल करने के उद्देश्य से घाटी में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजने की राज्यसभा में की गयी विपक्ष की मांग गौरतलब है. राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने कहा कि यह कानून-व्यवस्था की सामान्य समस्या न होकर एक राजनीतिक समस्या है और लोग इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री को सुनने के लिए बेताब हैं.
इसके अगले ही दिन प्रधानमंत्री ने कहा कि जिन हाथों में खेल के सामान होने चाहिए थे, उनमें कुछ लोगों ने पत्थर पकड़ा दिये हैं. उन्होंने कश्मीरी युवाओं से आह्वान किया कि वे कश्मीर को ऊंचाइयों पर ले जाने में साथ दें. अब देश उम्मीद कर रहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी की तर्ज पर ही, मोदी भी कश्मीरी अवाम का दिल जीतने के लिए कोई बड़ी पहल करेंगे. इस बीच राज्य की सीएम महबूबा मुफ्ती ने दिल्ली पहुंच कर गृह मंत्री राजनाथ सिंह के साथ बैठक की, जिसमें रक्षा मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भी मौजूद थे. ऐसी बैठक से बड़ी पहल के लिए माहौल बनाने में मदद मिलेगी.
हालांकि, अवाम से संवाद बनाने और असंतोष पर काबू पाने में महबूबा अब तक विफल रही हैं. उधर, विपक्षी तेवर को देखते हुए केंद्र सरकार इस मुद्दे पर संसद में चर्चा के लिए राजी हो गयी है. लेकिन, यह चर्चा समाधान की राह तभी सुझा पायेगी, जब सांसद हालात की गंभीरता को समझते हुए इसका राजनीतिक इस्तेमाल नहीं करेंगे.
Prabhat Khabar Digital Desk
Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

संबंधित ख़बरें

Trending News

जरूर पढ़ें

वायरल खबरें

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel