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एआइ का वैश्विक केंद्र बन रहा भारत

AI: स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के ग्लोबल एआइ वाइब्रेंसी इंडेक्स में भारत को तीसरी रैंकिंग दी गयी है. पहले स्थान पर अमेरिका और दूसरे स्थान पर चीन है. जबकि 2023 में इस सूची में भारत सातवें स्थान पर था. देश में एआइ पारिस्थितिकी तंत्र का विस्तार तो तेजी से हो ही रहा है, एआइ का बाजार भी तेजी से बढ़ रहा है और 2025 में यह 13.05 अरब डॉलर मूल्य की ऊंचाई पर रहा था. वर्ष 2032 में इस बाजार के बढ़कर 130.63 अरब डॉलर के होने का अनुमान है.

AI: हाल ही में एआइ इंडिया के मुख्य कार्याधिकारी अभिषेक सिंह ने राजस्थान डिजिफेस्ट टाइ ग्लोबल समिट, 2006 में कहा कि भारत एआइ के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और अब देश को इसका उपभोक्ता बने रहने के बजाय आत्मनिर्भर एआइ इकोसिस्टम बनाने के लिए पूरी एआइ वैल्यू चेन में क्षमताएं विकसित करने की जरूरत है. भारत के पास इस समय करीब 38,000 जीपीयू उपलब्ध हैं और इनमें से करीब 25,000 शुरू किये जा चुके हैं. एआइ पर प्रकाशित वैश्विक रिपोर्टों में कहा गया है कि इस साल भारत इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ेगा. फरवरी में प्रस्तावित ‘एआइ इंपैक्ट समिट’ से भारत का एआइ बाजार और ऊंचाई छुयेगा. हाल ही में प्रकाशित स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के ग्लोबल एआइ वाइब्रेंसी इंडेक्स में भारत को तीसरी रैंकिंग दी गयी है. पहले स्थान पर अमेरिका और दूसरे स्थान पर चीन है. जबकि 2023 में इस सूची में भारत सातवें स्थान पर था.

इस रैकिंग में भारत को ब्रिटेन और दक्षिण कोरिया जैसे उच्च तकनीकी वाले देशों से आगे रखा जाना सबूत है कि भारत एआइ का नया वैश्विक केंद्र बन रहा है. विगत 25 दिसंबर को ओपनएआइ के सीइओ सैम ऑल्टमैन ने कहा था कि अब ऊंचे वेतन वाली नयी नौकरियां सिर्फ एआइ पेशेवरों को मिलेंगी. ऐसे में इस साल देश की नयी प्रतिभाशाली पीढ़ी को एआइ पेशेवर के रूप में तैयार करने हेतु रणनीतिक रूप से आगे बढ़ना लाभप्रद होगा. हाल ही में एमेजॉन ने 2030 तक भारत में एआइ को लेकर 35 अरब डॉलर का नया निवेश करने का एलान किया है. इससे पहले माइक्रोसॉफ्ट ने भारत में 17.5 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की थी, जो एशिया में अब तक का सबसे बड़ा निवेश होगा. पिछले दो महीनों में गूगल और टीपीजी ने भी भारत में 16 अरब डॉलर निवेश की प्रतिबद्धता जतायी है.

उल्लेखनीय है कि अमेरिका की वैश्विक वैकल्पिक परिसंपत्ति प्रबंधक कंपनी ब्रुकफील्ड एसेट मैनेजमेंट ने मुंबई के पवई में एशिया का सबसे बड़ा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) बनाने पर एक अरब डॉलर का निवेश करने की बात की है. माइक्रोसॉफ्ट ने भी कहा कि हैदराबाद स्थित उसका ‘इंडिया साउथ सेंट्रल क्लाउड रीजन’ इस साल के मध्य में शुरू हो जायेगा, जिसका कुल आकार लगभग दो ईडन गार्डन स्टेडियम के बराबर है. कंपनी ने भारत में एआइ कौशल से लैस प्रतिभा विकसित करने के अपने लक्ष्य को एक करोड़ से दोगुना करते हुए 2030 तक दो करोड़ लोगों को एआइ कौशल देने का संकल्प लिया है. एआइ को लेकर नयी निवेश प्रतिबद्धताओं के बीच प्रधानमंत्री का कहना है कि जब एआइ की बात आती है, तब दुनिया भारत को लेकर आशावादी है. भारत के युवा एआइ में निवेश का लाभ उठाकर इसका उपयोग नवाचार और आर्थिक-सामाजिक विकास में करेंगे.

देश में एआइ पारिस्थितिकी तंत्र का विस्तार तो तेजी से हो ही रहा है, एआइ का बाजार भी तेजी से बढ़ रहा है और 2025 में यह 13.05 अरब डॉलर मूल्य की ऊंचाई पर रहा था. वर्ष 2032 में इस बाजार के बढ़कर 130.63 अरब डॉलर के होने का अनुमान है. भारत में प्रौद्योगिकी और एआइ पारिस्थितिकी तंत्र में 60 लाख से अधिक लोग कार्यरत हैं और 1,800 से अधिक वैश्विक क्षमता केंद्र हैं, जिनमें 500 से अधिक एआइ केंद्रित हैं. यहां लगभग 1.8 लाख स्टार्टअप हैं, और पिछले वर्ष शुरू हुए नये स्टार्टअप में से करीब 89 फीसदी ने अपने उत्पादों/सेवाओं में एआइ का उपयोग किया है. एआइ अपनाने वाले अग्रणी क्षेत्रों में औद्योगिक और ऑटोमोटिव, उपभोक्ता वस्तुएं व खुदरा क्षेत्र, बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं तथा बीमा व स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र शामिल हैं. ये सभी एआइ के कुल मूल्य में करीब 60 फीसदी का योगदान करते हैं.

दुनिया की 16 फीसदी एआइ प्रतिभा भारत के पास है और इस मामले में यह अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर है. यहां अभी छह लाख से अधिक एआइ पेशेवर हैं और 2027 तक यह आंकड़ा बढ़कर 12.5 लाख पर पहुंच जाने की उम्मीद है. गूगल की एआइ अवसर एजेंडा रिपोर्ट के मुताबिक, उद्योग, सेवा क्षेत्र, कृषि, स्वास्थ्य तथा अन्य क्षेत्रों में एआइ के बढ़ते उपयोग से भारत को 2030 तक 33.8 लाख करोड़ का आर्थिक लाभ हो सकता है. भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने राष्ट्रीय श्रम शक्ति नीति, 2025 के मसौदे के तहत स्वीकार किया है कि भारत का श्रम बाजार ढांचागत बदलाव से गुजर रहा है और अब एआइ तथा नये कौशल विकास पर जोर देना जरूरी है. नीति आयोग की रिपोर्ट ‘रोडमैप फॉर जॉब क्रिएशन इन द एआइ इकोनॉमी, 2025’ के मुताबिक एआइ के बढ़ते प्रभाव से 2031 तक बड़ी संख्या में पारंपारिक नौकरियां खत्म हो सकती हैं, वहीं एआइ से जुड़ी करीब 40 लाख नयी नौकरियां निर्मित होंगी. एआइ कौशल से प्रशिक्षित भारतीय युवाओं के लिए विदशों में भी मौके बढ़ रहे हैं.

देश की नयी पीढ़ी के लिए एआइ आधारित नौकरियों के बढ़ते अवसरों के बीच नयी पीढ़ी को एआइ पेशेवर के रूप में सुसज्जित करने की बड़ी चुनौती भी सामने खड़ी है. स्थिति यह है कि अगर इस परिप्रेक्ष्य में तुरंत कदम न उठाये गये, तो भारत न केवल दूसरे देशों से एआइ प्रतिभा के क्षेत्र में पीछे हो जायेगा, बल्कि एआइ से होने वाले बहुआयामी विकास में भी पिछड़ जायेगा. ऐसे में हमें देश की नयी पीढ़ी को एआइ कौशल से सुसज्जित करने की नयी रणनीति के साथ आगे बढ़ना होगा. यह सराहनीय कदम है कि शिक्षा मंत्रालय ने नयी पीढ़ी को प्रारंभिक स्तर से ही भविष्य की तकनीक, यानी एआइ से जोड़े जाने के मद्देनजर 2026-27 के शैक्षणिक सत्र से देशभर के सभी स्कूलों में तीसरी कक्षा से एआइ पढ़ाने का फैसला किया है.

ऐसे में, यह भी जरूरी है कि देश के कोने-कोने में खासकर ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में एआइ से रोजगार के मद्देनजर एआइ कौशल से जुड़ी प्रोग्रामिंग भाषाएं प्रमुख रूप से पायथन, जावा, सी प्लस प्लस, आर और जूलिया में बड़ी संख्या में युवाओं को कुशल बनाने के कई गुना प्रयास करने होंगे. उम्मीद करें कि स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के ग्लोबल एआइ वाइब्रेंसी इंडेक्स में आगामी वर्ष भारत तीसरी रैंकिंग से आगे बढ़ेगा. उम्मीद करें कि सरकार के साथ-साथ देश के तकनीकी और प्रौद्योगिकी शिक्षण संस्थान देश को 2027 तक दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था और वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के मद्देनजर नयी पीढ़ी को एआइ कौशल से सुसज्जित करने की डगर पर तेजी से आगे बढ़ेंगे. (ये लेखक के निजी विचार हैं.)

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