वेनेज़ुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो गुरुवार, 15 जनवरी को वाशिंगटन डीसी पहुंची. उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की. इसी दौरान उन्होंने अपना नोबेल शांति पुरस्कार पदक अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को सौंप दिया. इसके बाद उन्होंने प्रेस से बात करते हुए कहा कि यह हमारी (वेनेजुएला) स्वतंत्रता के प्रति उनकी विशिष्ट प्रतिबद्धता को सम्मान है. हालांकि उन्होंने इसके बारे में और डिटेल नहीं दी. वहीं व्हाइट हाउस ने भी यह नहीं बताया कि ट्रंप ने वह मेडल स्वीकार किया या नहीं. यह मुलाकात ऐसे समय हुई जब ट्रंप, मचाडो की विश्वसनीयता पर सवाल उठा चुके हैं. वहीं एक साहसिक अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को 3 जनवरी को कराकास से गिरफ्तार किया गया था.
कुल मिलाकर मचाडो ने व्हाइट हाउस में लगभग ढाई घंटे बिताए. इसके बाद, मारिया कोरिना मचाडो ने बाहर आकर प्रेस से बात की. उन्होंने ट्रंप को अपना पुरस्कार देते हुए सिमोन बोलिवर का उदाहरण देते हुए तुलना की. सिमोन बोलिवर ने ब्रिटेन के खिलाफ अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम में अमेरिका की मदद की थी. इस आजादी के बाद में अमेरिका के पहले राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन की तस्वीर वाला एक पदक फ्रांसीसी अधिकारी मार्क्विस डी लाफायेट ने सिमोन बोलिवार को दिया गया था. वह स्पेन के खिलाफ सफल स्वतंत्रता आंदोलनों का नेतृत्व करने वाले वेनेजुएलावासी थे. मचाडो ने कहा कि इतिहास के दो सौ साल बाद, बोलिवार की जनता वॉशिंगटन के उत्तराधिकारी को एक पदक लौटा रही है. इस मामले में नोबेल शांति पुरस्कार का पदक, हमारी स्वतंत्रता के प्रति उनकी विशिष्ट प्रतिबद्धता की मान्यता के रूप में है.
क्या नोबेल किसी और से साझा किया जा सकता है?
नोबेल संस्थान का कहना है कि नोबेल पुरस्कार किसी दूसरे व्यक्ति को स्थानांतरित नहीं किया जा सकता. जबकि व्हाइट हाउस ने पहले कहा था कि यदि मचाडो ट्रंप को पदक देने की कोशिश करती हैं, तो उसे स्वीकार करना या न करना राष्ट्रपति पर निर्भर करेगा. नोबेल संस्थान पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि भौतिक पदक भले ही किसी को दिया जा सकता है, लेकिन नोबेल शांति पुरस्कार का खिताब साझा या स्थानांतरित नहीं किया जा सकता. ट्रंप सार्वजनिक रूप से कई बार नोबेल शांति पुरस्कार जीतने की इच्छा जता चुके हैं. हालांकि उन्होंने अब तक इस बैठक पर कोई टिप्पणी नहीं की है.
कौन थे सिमोन बोलिवर?
सिमोन बोलिवर लैटिन अमेरिका में स्वतंत्रा आंदोलन के एक सबसे बड़ा चेहरा माने जाते हैं. उनका दक्षिण अमेरका के स्पैनिश देशों में बड़े सम्मान से नाम लिया जाता है. उनके नाम पर एक देश- बोलिविया भी है. वे 1783 में वेनेजुएला में ही पैदा हुए थे. इसीलिए वेनेजुएला का पूरा नाम बोलेवेरियन रिपब्लिक ऑफ वेनेजुएला भी है. उन्हें द लिबरेटर के नाम से जाना जाता है. साइमन बोलिवर ने दक्षिण अमेरिका को स्पेनिश उपनिवेशवाद से मुक्त कराने में निर्णायक भूमिका निभाई. वेनेजुएला में जन्मे बोलिवर ने यूरोप में शिक्षा प्राप्त की, जहाँ अमेरिकी और फ्रांसीसी क्रांतियों से प्रेरित होकर उन्होंने स्वतंत्रता और गणतंत्रवाद के विचार अपनाए. 1810 में वेनेजुएला के स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत के बाद उन्होंने 1813 में पहली बड़ी सैन्य सफलता हासिल की और उसे स्वंतंत्र करा लिया. हालांकि, बाद में वह फिर से स्पैनिश नियंत्रण में चला गया.
आधुनिक सैन्य रणनीतियों और छापामार युद्ध के सहारे 1819 में एंडीज पर्वत पार कर कोलंबिया में निर्णायक जीत सिमोन बोलिवर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में रही. उनका सपना “ग्रैन कोलंबिया” नामक महासंघ स्थापित करने का था. इसे उन्होंने 1819 में बनाया और इसके पहले राष्ट्रपति बने. इसमें वेनेजुएला, इक्वाडोर, कोलंबिया पनामा शामिल थे. उनके नेतृत्व में 1821 में वेनेजुएला, 1822 में इक्वाडोर व पेरू और 1824 में अयकुचो की लड़ाई के बाद पूरे दक्षिण अमेरिका ने स्पेनिश प्रभुत्व से मुक्ति पाई. हालांकि, जीवन के अंतिम वर्षों में ग्रैन कोलंबिया टूट गया, फिर भी 1830 में मृत्यु के बाद भी बोलिवर स्वतंत्रता और एकता के अमर प्रतीक बने रहे.

ट्रंप ने मचाडो से काटी कन्नी
हालांकि, मचाडो ने ट्रंप को अपना नोबेल पुरस्कार दे तो दिया है, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार किया है या नहीं इस पर कोई जानकारी सामने नहीं आई है. ट्रंप ने बार-बार मचाडो पर संदेह जताया है. ट्रंप ने यह संकेत भी दिया है कि वह कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रीगेज के साथ काम करने को तैयार हैं, जो मादुरो की नंबर दो थीं. रोड्रीगेज ने निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद कार्यवाहक राष्ट्रपति की शपथ ली थी. वे अब रोजमर्रा की सरकारी गतिविधियों की कमान संभाल रही हैं. वहीं जब मचाडो की वॉशिंगटन यात्रा पर थीं, तभी रोड्रिगेज अपना पहला स्टेट ऑफ द यूनियन भाषण दे रही थीं. एक तरह से रोड्रीगेज का समर्थन करके ट्रंप ने मचाडो को हाशिए पर डाल दिया है
ट्रंप खुद चाहते थे पुरस्कार
द वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वेनेज़ुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो का समर्थन करने से हिचकिचा रहे हैं, क्योंकि उन्होंने पिछले साल नोबेल शांति पुरस्कार स्वीकार कर लिया था. रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने मचाडो के इस फैसले को अपने प्रति एक व्यक्तिगत अपमान के रूप में देखा. ट्रपं खुद लंबे समय से खुद नोबेल शांति पुरस्कार पाने की इच्छा रखते हैं.
एक अधिकारी ने इसे ट्रंप की नजर में मचाडो का सबसे बड़ा अपराध बताया. मचाडो को अक्टूबर 2025 में वेनेज़ुएला के लोकतांत्रिक विपक्ष का नेतृत्व करने और निकोलस मादुरो की सरकार के खिलाफ प्रतिरोध को संगठित करने के लिए नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था. ट्रंप का मानना था कि यह पुरस्कार उन्हें मिलना चाहिए था. ट्रंप आए दिन पूरी दुनिया में युद्ध रुकवाने का दावा भी करते रहते हैं.
मादुरो को अमेरिकी बलों द्वारा गिरफ्तार कर देश से बाहर ले जाने के कुछ ही दिनों बाद ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से मचाडो से दूरी बना ली थी. पिछले हफ्ते जब ट्रंप से मचाडो के नेतृत्व की संभावनाओं के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि उनके लिए वेनेजुएला का नेतृत्व करना बहुत मुश्किल होगा. उन्होंने दावा करते हुए कहा कि उनके पास देश के भीतर न तो समर्थन है और न ही सम्मान. माना जाता है कि उनकी पार्टी ने 2024 के चुनाव जीते थे, जिन्हें मादुरो ने खारिज कर दिया था.
मचाडो ने रोड्रिगेज को बताया मादुरो से भी बदतर
हालांकि, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने मचाडो को वेनेजुएला की जनता के लिए एक असाधारण और साहसी आवाज बताया, लेकिन यह भी कहा कि इस बैठक का यह मतलब नहीं है कि ट्रंप की उनके बारे में राय बदल गई है. उन्होंने इसे यथार्थवादी आकलन बताया. लेविट ने कहा कि ट्रंप उचित समय आने पर वेनेजुएला में नए चुनावों का समर्थन करेंगे, लेकिन यह समय कब होगा, यह नहीं बताया.
हालांकि, ट्रंप से मिलने जाना मचाडो के लिए शारीरिक रूप से जोखिम भरा भी था, क्योंकि पिछले साल कराकास में थोड़े समय के लिए हिरासत में लिए जाने के बाद देश छोड़ने के बाद से उनका ठिकाना प्रमख रूप से अज्ञात ही रहा है. वह इसी वजह से अपना नोबेल पुरस्कार भी नहीं ले पाई थीं. इसे उनकी बेटी ने स्वीकार किया था.
ट्रंप से मुलाकात के बाद मचाडो ने अमेरिकी सीनेटरों के साथ बंद कमरे में बातचीत की. डेमोक्रेट सीनेटर क्रिस मर्फी ने कहा कि मचाडो ने सांसदों को चेतावनी दी कि अगर आने वाले महीनों में चुनाव या सत्ता हस्तांतरण की दिशा में प्रगति नहीं हुई, तो हालात और बिगड़ सकते हैं. मचाडो ने सीनेटरों से कहा कि रोड्रीगेज कई मायनों में मादुरो से भी बदतर हैं.
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