ग्रीनलैंड पर ट्रंप का लक्ष्य साफ, व्हाइट हाउस बोला- यूरोपीय सैनिकों से फैसला नहीं बदलेगा

Author Govind jee
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ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और यूरोप के बीच तनातनी बढ़ गई है. व्हाइट हाउस ने साफ कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ग्रीनलैंड का अधिग्रहण चाहते हैं और यूरोपीय सैनिकों की तैनाती से उनका फैसला नहीं बदलेगा. नाटो की मौजूदगी, डेनमार्क की चिंता और रूस की कड़ी प्रतिक्रिया से आर्कटिक क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव और गहरा गया है.

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व्हाइट हाउस ने गुरुवार को दोहराया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल (अधिग्रहण) करना चाहते हैं. व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि राष्ट्रपति की प्राथमिकता बिल्कुल साफ है. वह चाहते हैं कि अमेरिका ग्रीनलैंड हासिल करे. उनका मानना है कि यह हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है.

यूरोप के कुछ देशों द्वारा ग्रीनलैंड में सैनिक भेजे जाने पर लेविट ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि यूरोप में सैनिकों की तैनाती से राष्ट्रपति के फैसले या ग्रीनलैंड को हासिल करने के उनके लक्ष्य पर कोई असर पड़ेगा.

यूरोपिय नाटों देशों ने ग्रीनलैंड में सैन्य कर्मियों की तैनाती शुरू की

यह बयान ऐसे समय आया है, जब यूरोपीय नाटो देशों ने रणनीतिक रूप से अहम आर्कटिक क्षेत्र में स्थित ग्रीनलैंड में सैन्य कर्मियों की तैनाती शुरू की है. इस कदम पर रूस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. इससे पहले वॉशिंगटन में अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक हुई थी, लेकिन डेनमार्क के मुताबिक ग्रीनलैंड को लेकर मौलिक मतभेद दूर नहीं हो सके.

डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने गुरुवार को कहा कि आर्कटिक सुरक्षा मजबूत करने के लिए एक वर्किंग ग्रुप बनाया जाएगा, लेकिन इससे मूल विवाद हल नहीं होगा. एएफपी के अनुसार, उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड को अपने कब्जे में लेने की अमेरिकी महत्वाकांक्षा अब भी बनी हुई है. फ्रेडरिक्सन ने इसे गंभीर मामला बताया और कहा कि डेनमार्क इस स्थिति को रोकने के लिए प्रयास जारी रखेगा. 

ग्रीनलैंड में नाटो की मैजूदगी और बढ़ेगी

इसी बीच फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन और नॉर्वे ने ग्रीनलैंड की राजधानी नूक में सैन्य कर्मियों की तैनाती का ऐलान किया है. एएफपी के अनुसार, इसे रिकॉनिसेंस (टोही) मिशन बताया गया है. ग्रीनलैंड के उप-प्रधानमंत्री म्यूट एगेडे ने कहा कि आने वाले दिनों में नाटो की मौजूदगी और बढ़ेगी जिसमें सैन्य उड़ानें और नौसैनिक गतिविधियां शामिल होंगी.

उन्होंने बताया कि सैनिक प्रशिक्षण के लिए वहां होंगे. जर्मनी के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह मिशन रूस और चीन से संभावित खतरों के मद्देनजर आर्कटिक सुरक्षा के उपायों की समीक्षा के लिए है. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बताया कि फ्रांसीसी सैनिकों का पहला दल पहले ही रवाना हो चुका है.

ग्रीनलैंड में नाटो की बढ़ती मौजूदगी गंभीर चिंता का विषय- रूस

रूस ने इस तैनाती पर कड़ी आपत्ति जताई. बेल्जियम में रूसी दूतावास ने कहा कि ग्रीनलैंड में नाटो की बढ़ती मौजूदगी गंभीर चिंता का विषय है और आरोप लगाया कि गठबंधन मॉस्को और बीजिंग से खतरे का झूठा बहाना बनाकर सैन्य जमावड़ा कर रहा है. ट्रंप पहले भी कह चुके हैं कि अगर अमेरिका ग्रीनलैंड पर नियंत्रण नहीं करता, तो चीन या रूस कर लेगा. इन बयानों से नाटो के भीतर तनाव बढ़ा है और ग्रीनलैंड के लोगों में यह चिंता भी गहरी हुई है कि कहीं वे बड़े भू-राजनीतिक टकराव के बीच न फंस जाएं.

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गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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