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8000 KM दूर ग्रीनलैंड पर चीन की नजर! ट्रंप ने चेताया- रूस और ड्रैगन रख सकते हैं कदम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है और चेतावनी दी कि अगर अमेरिका पीछे हटा तो रूस और चीन दखल दे सकते हैं. वहीं डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने साफ किया कि वे संप्रभुता से समझौता नहीं करेंगे और सुरक्षा पर सहयोग जारी रहेगा.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि ग्रीनलैंड अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी के लिए बहुत जरूरी है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने कार्रवाई नहीं की, तो रूस और चीन आर्कटिक क्षेत्र में दखल दे सकते हैं. व्हाइट हाउस में एक कार्यक्रम में बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि हमें नेशनल सिक्योरिटी के लिए ग्रीनलैंड की जरूरत है, इसलिए हम देखेंगे कि क्या होता है. डेनमार्क के साथ हमारे बहुत अच्छे संबंध हैं.  

ट्रंप ने आगे कहा कि अगर अमेरिका अपने हितों को आगे नहीं बढ़ाता है, तो रूस और चीन इसमें दखल देंगे. उन्होंने कहा कि अगर हम कार्रवाई नहीं करते हैं, तो रूस और चीन आ जाएंगे. यह डेनमार्क का मामला नहीं है, लेकिन हम इसे कंट्रोल कर सकते हैं. चीन और ग्रीनलैंड के बीच की दूरी के बारे में बात करें तो अलग-अलग इंटरनेशनल ट्रैवल और ज्योग्राफिकल रिसर्च वेबसाइट्स के अनुसार, सीधी हवाई दूरी लगभग 7,700 और 8,000 किलोमीटर के बीच है. जबकि कुछ अनुमानों के अनुसार यह दूरी 7,829 किलोमीटर तक है.

ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा चाहते हैं

इस बीच, डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन और ग्रीनलैंड की विदेश मंत्री विवियन मोत्जफेल्डट ने व्हाइट हाउस में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रूबियो के साथ बैठक की. दोनों नेताओं ने प्रेस के सामने कहा कि अमेरिका ग्रीनलैंड को खरीदने का विचार नहीं कर रहा. साथ ही उन्होंने अमेरिका के साथ आर्कटिक सुरक्षा को लेकर उच्च स्तरीय कार्य समूह बनाने की घोषणा की. डेनमार्क के विदेश मंत्री ने कहा कि हमने तय किया कि उच्च स्तर पर बैठकर यह देखना चाहिए कि राष्ट्रपति की चिंताओं को कैसे ध्यान में रखा जाए, जबकि हम डेनमार्क की सीमा रेखाओं का सम्मान करें.

रासमुसेन ने कहा कि ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर ‘कब्जा’ करने की इच्छा जाहिर की, लेकिन उन्हें लगता है कि बैठक ने अमेरिका की स्थिति बदल दी है. उन्होंने कहा है कि राष्ट्रपति की यह इच्छा साफ है कि वे ग्रीनलैंड पर कब्जा करना चाहते हैं. हमने साफ कर दिया कि यह डेनमार्क के हित में नहीं है. भविष्य में ग्रीनलैंड डेनमार्क का हिस्सा रहेगा और यही हमारी साझा स्थिति है.

ग्रीनलैंड को अमेरिका के सबसे करीबी दोस्त मानते हैं

उन्होंने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अमेरिका के साथ सुरक्षा सहयोग को भी याद दिलाया, और कहा कि डेनमार्क की सेनाएं 2000 के दशक में अफगानिस्तान में अमेरिकी फोर्सेस के साथ रही हैं. उन्होंने कहा कि हम खुद को अमेरिका के सबसे करीबी दोस्त मानते हैं. भले ही ग्रीनलैंड को लेकर दृष्टिकोण अलग हो, लेकिन आर्कटिक सुरक्षा की चिंताएं हम साझा करते हैं.

रासमुसेन ने कहा कि चीन और रूस की कोई तत्काल खतरा नहीं है जिसे डेनमार्क और ग्रीनलैंड संभाल न सकें. उन्होंने कहा कि वर्तमान में ग्रीनलैंड में चीन की कोई मौजूदगी नहीं है. 10-20 साल में भी यह जरूरी नहीं कि हो. उन्होंने याद दिलाया कि ग्रीनलैंड, डेनमार्क के माध्यम से, NATO का सदस्य है और सामूहिक सुरक्षा अनुच्छेद 5 के तहत कवर है. उन्होंने कहा कि डेनमार्क ने सुरक्षा बढ़ाने के लिए पहले ही फंड बढ़ा दिए हैं और अमेरिकी सहयोग के लिए तैयार है.

अमेरिका के साथ सहयोग बढ़ाना जरूरी है- ग्रीनलैंड की विदेश मंत्री

रासमुसेन ने कहा कि डेनमार्क और अमेरिका एक उच्च स्तरीय कार्य समूह बनाएंगे जो अमेरिकी सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखते हुए डेनमार्क की सीमा रेखाओं का सम्मान करेगा. यह समूह अगले हफ्तों में पहली बार बैठक करेगा. उन्होंने कहा कि अमेरिका का ग्रीनलैंड को खरीदना बिल्कुल जरूरी नहीं है. डेनमार्क और अमेरिका के लंबे समय के सहयोग को उन्होंने इस प्रक्रिया के लिए आदर्श बताया.

ग्रीनलैंड की विदेश मंत्री मोत्जफेल्डट ने कहा कि अमेरिका के साथ सहयोग बढ़ाना जरूरी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि ग्रीनलैंड अपनी संप्रभुता छोड़ दे. उन्होंने कहा कि हम अमेरिका के अधीन नहीं होना चाहते. हमें हमेशा सही रास्ता तलाशना चाहिए और बेहतर समझ के लिए काम करना चाहिए.

मोत्जफेल्डट ने कहा कि अमेरिका और ग्रीनलैंड को पहले जैसी स्थिर रिश्तेदारी लौटानी चाहिए. उन्होंने कहा है कि दोनों देशों के हित में है कि संतुलन बनाए और मित्रता में काम करें. हम साथी हैं, हम दोस्त हैं.

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Govind Jee
Govind Jee
गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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