पलकों के शामियाने तले आशाओं के दीप

Published at :29 Jan 2014 4:18 AM (IST)
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पलकों के शामियाने तले आशाओं के दीप

वर्ष 2013 एक भयानक स्वप्न की तरह बीत गया और घायल जनता अपने गहरे जख्मों पर मरहम लगा रही है और नववर्ष के आगमन में उसके पलकों के शामियाने में आशाओं के दीप जल रहे हैं. ऐसी बात नहीं कि सिर्फ भारत ही इस नवउदारवादी अंधेरी घुप्प अंधकार में सुबह की रोशनी तलाश रही है […]

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वर्ष 2013 एक भयानक स्वप्न की तरह बीत गया और घायल जनता अपने गहरे जख्मों पर मरहम लगा रही है और नववर्ष के आगमन में उसके पलकों के शामियाने में आशाओं के दीप जल रहे हैं. ऐसी बात नहीं कि सिर्फ भारत ही इस नवउदारवादी अंधेरी घुप्प अंधकार में सुबह की रोशनी तलाश रही है बल्कि पूरा विश्व ही जगतगुरु रहे भारत से मार्गदर्शन की आस लगाये बैठा है.

चूंकि यह अहम चुनावी वर्ष है, जिसमें अभिमन्यु जैसे छोटे दलों का बोलबाला रहेगा. यानी जो जनता की आवास, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, बेरोजगारी, बढ़ती अमीर-गरीब भी खाइयों को पाटने व न्याय एवं शांति व्यवस्था कायम करने का प्रयास करेगा, वही दिल्ली की गद्दी पर बैठेगा. हालिया विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी जैसे दलों से कई आशाएं लगी हैं और जनता इनमें अपना तारणहार तलाश रही है.

नित्यानंद सिंह, धनबाद

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