मेडिकल कचरे के खतरे को समझें

Published at :25 Jan 2014 4:08 AM (IST)
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मेडिकल कचरे के खतरे को समझें

पिछले कुछ वर्षो में जिस तरह मेडिकल सेवाओं का विस्तार हुआ है, उससे नयी तरह की कुछ समस्याएं भी खड़ी हुई हैं. इन समस्याओं पर न तो सरकारी मशीनरी का ध्यान है और न ही इसे लेकर लोग जागरूक हैं. छोटे कस्बों से लेकर जिला मुख्यालयों और राजधानी पटना तक नर्सिग होम, अस्पताल, पैथोलॉजिकल सेंटर […]

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पिछले कुछ वर्षो में जिस तरह मेडिकल सेवाओं का विस्तार हुआ है, उससे नयी तरह की कुछ समस्याएं भी खड़ी हुई हैं. इन समस्याओं पर न तो सरकारी मशीनरी का ध्यान है और न ही इसे लेकर लोग जागरूक हैं. छोटे कस्बों से लेकर जिला मुख्यालयों और राजधानी पटना तक नर्सिग होम, अस्पताल, पैथोलॉजिकल सेंटर आदि धड़ल्ले से खुल रहे हैं.

उनसे निकलनेवाला मेडिकल कचरा उसी तरह सड़कों के किनारे या रिहायशी इलाकों में फेंका जा रहा है, जैसा घरेलू कचरा होता है. इन दोनों के बीच फर्क की समझ विकसित करने की कोई मुहिम न तो सरकारी स्तर पर दिख रही है और न ही शिक्षण संस्थानों की ओर से इसके लिए कोई अभियान चल रहा है. सड़कों पर फैला मेडिकल कचरा मानव स्वास्थ्य के लिए घातक होता है. जाने-अनजाने इसके संपर्क में आने पर बीमारियों का शिकार बनना तय है. इतना ही नहीं, इनके संपर्क में आने वाले मक्खी या मच्छर इंफेक्शन को घरों तक और मानव शरीर तक पहुंचा रहे हैं.

मेडिकल कचरा के प्रबंधन के लिए बाजाब्ता कानून है, जो बिहार समेत पूरे देश में लागू है. इसके तहत सभी स्वास्थ्य संस्थानों को निबंधन कराना अनिवार्य है. इसके लिए वर्ष 2002 तक ही मेडिकल सेवा से जुड़े संस्थानों को निबंधन कराना था. लेकिन, 12 वर्ष बीत जाने के बाद भी पूरे बिहार में सिर्फ 1200 संस्थानों ने निबंधन कराया है. यानी बड़ी संख्या में नर्सिग होम, अस्पताल या पैथोलॉजिकल सेंटर इस कानून के दायरे से बाहर हैं. मेडिकल कचरा के प्रबंधन के लिए राज्य में सिर्फ तीन ट्रीटमेंट प्लांट पटना, मुजफ्फरपुर और भागलपुर में हैं.

इससे गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है कि दूसरे शहरों का मेडिकल कचरा का निबटान वैसे ही हो रहा है, जैसा घरेलू कचरा का होता है. यह सीधे तौर पर लापरवाही और जागरूकता से जुड़ा मसला है. इस मुद्दे को ज्यादा दिनों तक टालना जीवन को खतरे में डालने की तरह होगा. ऐसे में यह जरूरी है कि मेडिकल कचरे के अकुशल निबटान या प्रबंधन से मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव के प्रति लोगों को जागरुक किया जाये. सरकार स्वास्थ्य सेवा पर प्रतिवर्ष भारी रकम खर्च करती है, तो मेडिकल कचरा के प्रबंधन को लेकर भी पहले से बने कानून को कड़ाई से लागू करने की जरूरत है.

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