औद्योगिक विकास के खुलते द्वार

Published at :21 Jan 2014 5:58 AM (IST)
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औद्योगिक विकास के खुलते द्वार

झारखंड सरकार केंद्र से विशेष राज्य के दरजे की मांग कर रही है. इन मांगों को नहीं मानने के पीछे केंद्र सरकार तर्क देती है कि झारखंड में खनिज संपदा की भरमार है. उद्योग-धंधे हैं. एक तरह से यह सही भी है. झारखंड में टाटा मोटर्स, एचइसी व बोकारो स्टील प्लांट जैसी बड़ी कंपनियां हैं. […]

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झारखंड सरकार केंद्र से विशेष राज्य के दरजे की मांग कर रही है. इन मांगों को नहीं मानने के पीछे केंद्र सरकार तर्क देती है कि झारखंड में खनिज संपदा की भरमार है. उद्योग-धंधे हैं. एक तरह से यह सही भी है. झारखंड में टाटा मोटर्स, एचइसी व बोकारो स्टील प्लांट जैसी बड़ी कंपनियां हैं.

इन कंपनियों ने हजारों लोगों को नौकरी दी है. ये कंपनियां यहां की आर्थिक स्थिति को मजबूत करती है. अब सेल के अध्यक्ष ने बोकारो में अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने की बात कही है. यह इस प्रदेश के लिए खुशखबरी है. इसका लाभ पूरे देश को मिलेगा.

वैसे भी बीएसएल अपने लाभांश का दो प्रतिशत सामाजिक विकास पर खर्च करती है. इससे विकास के नये द्वार खुलेंगे. सेल अध्यक्ष का कहना है कि बोकारो स्टील प्लांट की उत्पादन क्षमता को छह मिलियन टन सालाना से बढ़ा कर 2025 तक 16 मिलियन टन करने का लक्ष्य है. इसके लिए सेल यहां 60 हजार करोड़ रुपये निवेश करेगा. साथ ही बोकारो में मेडिकल कॉलेज खोलने की भी बात कही है. बोकारो में स्टील उद्योग के विस्तार की काफी संभावना है.

सेल अध्यक्ष के इस कथन पर यहां की सरकार को गौर करना चाहिए. उसे प्लांट के विस्तार में आनेवाली बाधाओं को हल करने में सहायक बनना चाहिए. यहां स्टील उद्योग के विकास के लिए पर्याप्त संसाधन हैं. सबसे बड़ी बात, मैन पावर है. यहां के कामगार शारीरिक रूप से मजबूत व दक्ष हैं.

बावजूद इसके यहां की सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है. झारखंड की सरकार आधारभूत कमियों को दूर कर इस राज्य को दुनिया के सबसे विकसित क्षेत्रों में ला सकती है. राज्य गठन के बाद इसकी कोशिश भी हुई, लेकिन व्यक्तिगत लाभ, अस्पष्ट नीति व राजनीति के चलते यह प्रदेश पीछे रह गया. बोकारो स्टील प्लांट की ही बात करें, तो करीब 40 साल पहले इसके विस्तारीकरण के लिए जो जमीनें ली गयीं, उस पर अभी काम शुरू नहीं हुआ है.

वहीं विस्थापितों को पुनर्वास करने में भी सरकारें अब तक सफल नहीं हो पायी हैं. राज्य सरकार को सेल अध्यक्ष को भरोसा दिलाया जाना चाहिए कि हरसंभव सहायता की जायेगी. अगर सेल की यह योजना कारगर साबित होती है, तो और भी कंपनियां यहां आना चाहेंगी.

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